बिहार : कोरोना से बच्चों को बचाने की कवायद, पटना एम्स में कोरोनारोधी वैक्सीन का ट्रायल शुरू

पटना एम्स में कोरोनारोधी वैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल शुरू हुआ.

पटना एम्स में कोरोनारोधी वैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल शुरू हुआ.

कोविड वैक्सीन परीक्षण के प्रिंसिपल इन्वेजिलेटर डॉ. सीएम सिंह ने कहा कि हमारा लक्ष्य 525 बच्चों का टीकाकरण करना है. ट्रायल से पहले आरटी-पीसीआर और एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं. नियमित आधार पर बच्चों के स्वास्थ्य का फॉलोअप लिया जा रहा है.

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पटना. बिहार की राजधानी पटना के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में बच्चों पर कोरोना रोधी वैक्सीन का ट्रायल (Anti COVID Vaccine Trials) किया जा रहा है. यह जानकारी डॉ. सीएम सिंह (Dr. CM Singh) ने दी. डॉ. सिंह कोविड वैक्सीन परीक्षण के प्रिंसिपल इन्वेजिलेटर (Principal Investigator) हैं. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य 525 बच्चों का टीकाकरण करना है. ट्रायल से पहले आरटी-पीसीआर और एंटीजन टेस्ट किए जा रहे हैं. हमलोग नियमित आधार पर इन बच्चों के स्वास्थ्य का फॉलोअप ले रहे हैं.

दरअसल, बच्चे भी बड़ों की तरह की कोविड संक्रमण के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं. इस बारे में पीडियाट्रिक गैस्ट्रो इंटेलॉजिस्ट और आईसीएमआर की टास्क फोर्स कमेटी नेगवैक (नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19) के डॉ. एनके अरोड़ा बताते हैं कि उनके हाल के सीरो सर्वे में 25 फीसदी बच्चे कोविड-19 से प्रभावित मिले हैं. उन्होंने कहा कि दस साल से कम उम्र के बच्चों में भी अन्य उम्र के लोगों की तरह ही कोरोना संक्रमण देखा गया. डॉ. अरोड़ा के मुताबिक, राष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि कोविड की पहली और दूसरी लहर में 3 से 4 फीसदी बच्चे कोरोना संक्रमण के शिकार हुए थे. उन्होंने कहा कि अगर प्रतिशत की बात न भी करें और संख्‍या पर गौर करें तो दूसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने के कुल मामलों में मामूली ही सही पर बढ़ोतरी देखी गई. पहली लहर के मुकाबले इस बार बच्चों में कोरोना का संक्रमण थोड़ा ज्‍यादा मिला है.

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डॉ. अरोड़ा बताते हैं कि संक्रमित अधिकतर बच्चों में या तो हल्के लक्षण देखे गए हैं या फिर वे ए सिम्पटोमेटिक मिले हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी एक परिवार में एक या इससे ज्‍यादा लोग संक्रमित होते हैं तो बच्चों के भी कोविड संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है. हालांकि अच्छी बात यह है कि ऐसे मामलों में कोविड पॉजिटिव बच्चों की उम्र दस साल की उम्र से कम देखी गई और उनमें कोविड के बहुत हल्के या ए सिम्पमेटिक लक्षण यानी साधारण जुकाम या डायरिया मिला है.

वैक्सीन ट्रायल के बारे में जानकारी देते डॉ. अरोड़ा.
वैक्सीन ट्रायल के बारे में जानकारी देते डॉ. अरोड़ा.

जाहिर है इन स्थितियों के बाद बच्चों को लेकर चिंता बढ़ी है. इसलिए उन्हें ध्यान में रखते हुए वैक्सीनेशन की तलाश जारी है. इसी दौरान पटना के एम्स में भी रिसर्च का काम चल रहा है और वहां बच्चों पर वैक्सीन परीक्षण हो रहा है.

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