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बिहार उपचुनाव: ओवैसी ने इस सीट पर बढ़ा दी महागठबन्धन की मुश्किलें, दांव पर लगी प्रतिष्ठा

News18 Bihar
Updated: October 21, 2019, 3:03 PM IST
बिहार उपचुनाव: ओवैसी ने इस सीट पर बढ़ा दी महागठबन्धन की मुश्किलें, दांव पर लगी प्रतिष्ठा
असदुद्दीन ओवैसी बिहार में चुनाव प्रचार के लिए भी आ चुके हैं (फाइल फोटो)

यूं तो किशनगंज सीट (Kishanganj) को एमवाई (MY) समीकरण के कारण राजद (RJD) के लिए सुरक्षित सीट बताया जाता है लेकिन यहां लोकसभा के चुनाव में बीजेपी (BJP) भी जीत हासिल कर चुकी है.

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पटना. यूं तो बिहार में विधानसभा (Assembly) की पांच और लोकसभा (LOkSabha) की एक सीट पर उपचुनाव (By Election) हो रहे हैं लेकिन किशनगंज पर दोनो खेमों की साख दांव पर लगी है, उससे भी बड़ी बात कि जो पार्टियां अकलियतों के वोट पर अपना दावा ठोंकती हैं उनके लिए तो यह चुनाव किसी लिटमस टेस्ट से कम नहीं. हम बात कर रहे हैं महागठबन्धन (Grand Alliance) की दावेदारी के बारे में, जो डंके की चोट पर अकलियत वोट बैंक पर अपना दावा ठोकती रही है. अब फैसले की घड़ी है क्योंकि इस बार ओवैसी की पार्टी MIM फिर से चुनौती देने के लिए सामने खड़ी है.

महागठबन्धन को सता रहा है MIM का खतरा

वैसे तो उपचुनावों को कोई खास अहमियत पहले नहीं मिली है लेकिन इस बार का उपचुनाव कुछ मायनों में पहले से थोड़ा अलग जरूर है तभी तो सियासी लोग इसे 2020 के पहले का सेमीफाइनल बताते हैं. इसमें किशनगंज का चुनाव दोनों खेमों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. चूंकि किशनगंज विधानसभा में अकलियतों का वोट करीब 68 फीसदी है यानि 2 तिहाई मतदाता मुसलमान हैं जाहिर है ये वोटर्स जिनकी ओर मेहरबान होंगे सीट उनके कब्जे में होगी. यह सीट शुरू से ही कांग्रेस और आरजेडी के खाते में रही है लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी MIM की इंट्री ने महागठबन्धन को जरूर परेशान किया था. इस बार भी MIM ने किशनगंज में अपना उम्मीदवार उतारा है जाहिर है अगर MIM यहां अच्छा परफार्मेंस करती है तो ये कांग्रेस के लिए ही परेशानी खड़ी करेगी. आरजेडी इस सच्चाई को बखूबी जानती है कि अगर MIM ने ज्यादा कमाल किया तो हर हाल में महागठबन्धन के लिए यह खतरा है फिर भी शिवानन्द तिवारी अंतिम दम तक लड़ने को तैयार हैं इस उम्मीद के साथ कि कांग्रेस उम्मीदवार की फतह होगी.

एनडीए को है किसी बड़े चमत्कार की उम्मीद, नीतीश फैक्टर पर आस

एनडीए की बात करें तो इस खेमे को भी किसी बड़े चमत्कार की पूरी उम्मीद है. पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार ने जो अकलियतों के लिए विकास के कार्य किए हैं उन्हें लगता है कि अकलियत समाज इसबार जाति-धर्म और समीकरण से ऊपर उठकर विकास को ही चुनेंगे. किशनगंज लोकसभा का इतिहास एनडीए के साथ जुड़ा रहा है. शाहनवाज हुसैन और सिकन्दर सिंह यहां से पहले जीत हासिल कर चुके हैं. इस बार स्वीटी सिंह बीजेपी से उम्मीदवार हैं जिनकी इस बार किस्मत दांव पर लगी है अगर MIM वाकई अच्छा परफार्मेंस करता है तो इसकी उम्मीद ज्यादा है कि स्वीटी सिंह का भाग्योदय हो जाए.

एनडीए को भी चमत्कार की आस

मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में एनडीए के लिए यकीनन कोई चमत्कार होगा तभी यह जीत संभव है. उपचुनाव के नतीजे 2020 के लिए कितना नफा-नुकसान साबित होंगे ये तो वक्त बताएगा लेकिन किशनगंज की लड़ाई बीजेपी से ज्यादा अब महागठबन्धन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. अगर कोई बड़ा चमत्कार हुआ तो इसमें सबसे बड़ी भूमिका MIM की ही होगी अगर ऐसा हुआ तो फिर 2020 में महागठबन्धन के सामने एनडीए से बड़ी चुनौती ओवैसी की पार्टी यानि MIM होगी.
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रिपोर्ट- अमित कुमार सिंह

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First published: October 21, 2019, 2:59 PM IST
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