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क्या सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी के बढ़ते कद से 'खौफजदा' है लालू की RJD?

News18 Bihar
Updated: January 16, 2020, 5:10 PM IST
क्या सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी के बढ़ते कद से 'खौफजदा' है लालू की RJD?
सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के बढ़ते कद ने बीजेपी विरोधी पार्टियों में हलचल मचा दी है.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सीएए और एनआरसी के विरोध में तेजस्वी की प्रतिरोध यात्रा उस डर का भी नतीजा है जिसके तहत सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का जनाधार बढ़ता जा रहा है.

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पटना. बिहार की सियासत में एनआरसी-सीएए (NRC-CAA) बड़ा मुद्दा बनने वाला है ये बात सभी पक्ष जाहिर कर चुके हैं. बीजेपी जहां एनआरसी और सीएए लागू करने पर तुली है, वहीं जेडीयू ने एनआरसी का विरोध किया है और सीएए पर चर्चा की बात छेड़ दी है. दूसरी ओर आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) गुरुवार से सीमांचल के दौरे पर रहेंगे. सीमांचल से तेजस्वी की इस यात्रा के सियासी मायने ये हैं कि वो अपने वोट बैंक (मुस्लिम वोट) को आरजेडी के हाथ से छिटकने देना नहीं चाहते.

दरअसल राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सीएए और एनआरसी के विरोध में तेजस्वी की प्रतिरोध यात्रा उस डर का भी नतीजा है जिसके तहत सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM का जनाधार बढ़ता जा रहा है. जाहिर है इसका सीधा सियासी खतरा आरजेडी को दिख रहा है. क्योंकि ओवैसी अगर किसी वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे तो वह आरजेडी ही होगी.

किशनगंज में मिली थी AIMIM को जीत
दरअसल बीते अक्टूबर में हुए विधानसभा उपचुनाव में ओवैसी की पार्टी ने किशनगंज की मुस्लिम बहुल सीट पर जीत हासिल कर सबको चौंका दिया था. दरअसल सीमांचल की इस सबसे महत्वपूर्ण सीट पर हमेशा कांग्रेस का कब्जा रहा है, लेकिन ओवैसी लगातार वहां का दौरा कर अपनी स्थिति को मजबूत करने में सफल रहे.

गौरतलब है कि किशनगंज में 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. यहां से बीजेपी ने अपना उम्मीदवार उतारा था, हालांकि जीत का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. लेकिन खास बात ये है कि आरजेडी ने अपना समर्थन यहां कांग्रेस को दिया था. इसके बाद भी कांग्रेस तीसरे नंबर पर चली गई. जाहिर है कि ये आरजेडी और कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत तो बिल्कुल ही नहीं हैं.

आरजेडी-कांग्रेस को होगा नुकसान
सबके खास बात ये है कि इस जीत से उत्साहित AIMIM ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. जाहिर है इसका असर महागठबंधन की पार्टियों पर ही पड़ रहा है.दरअसल सीमांचल में चार जिले अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में मुस्लिमों की आबादी करीब-करीब पचास फीसदी है. वहीं मुस्लिमों से जुड़े सेंटीमेंट को उभारना ओवैसी खूब जानते हैं. ऐसे में मुस्लिम वोटों में अगर बिखराव होता है तो आरजेडी-कांग्रेस को इसका सीधा नुकसान होगा.

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First published: January 16, 2020, 4:03 PM IST
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