बिहार चुनाव: 'बैड एलिमेंट' को भी क्यों गले लगाने जा रहे तेजस्वी? सियासत गर्म

अनंत सिंह और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)
अनंत सिंह और तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

पिछले दिनों अनंत सिंह (Anant Singh) ने पेशी के दौरान मीडिया से कहा था कि इस बार मैं राजद के टिकट पर चुनाव लड़ूंगा और तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करूंगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 8:45 PM IST
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पटना. कल तक तेजस्वी जिन्हें बैड एलीमेंट कहा करते थे आज उन्हें गले लगा रहे हैं मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) अब आरजेडी (RJD) के सिंबल पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक कल यानि 7 अक्टूबर को अनंत सिंह मोकामा (Mokama) सीट से अपना नामांकन दाखिल करेंगे. मोकामा में अनंत सिंह का मुकाबला जदयू के उम्मीदवार राजीव लोचन सिंह से होगा. अनंत सिंह की आरजेडी में इंट्री को लेकर अब बिहार की सियासत गरमा गई है. खासकर एनडीए के नेता तेजस्वी पर जोरदार हमला बोल रहे हैं.

जेडीयू और बीजेपी का साफ कहना है कि आरजेडी की यही चाल और चरित्र है जो पार्टी शुरू से अपराधियों और बाहुबलियों के भरोसे चुनाव लड़ती है. वहीं आरजेडी का कहना है कि कल तक जब यही अनंत सिंह एनडीए के विधायक थे तो हरिश्चन्द्र और गंगा की तरह पवित्र थे और आज जब ये आरजेडी में शामिल हुए तो अपराधी और बाहुबली हो गए.

2015 का चुनाव अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था और जीत दर्ज की थी. पिछले दिनों अनंत सिंह ने पेशी के दौरान मीडिया से कहा था कि इस बार मैं राजद के टिकट पर चुनाव लड़ूंगा और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करूंगा.




गौरतलब है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में मोकामा से 20 लोगों ने नामांकन दाखिल किया था। 15 लोग मैदान में थे, जिनमें से 13 की जमानत जब्त हो गई थी. अनंत सिंह का मुकाबला जदयू के नीरज कुमार से था जिन्हें अनंत ने 18348 वोट से हराया था. अनंत सिंह को 54005 वोट मिले थे.

2005 फरवरी में हुए विधान सभा चुनाव में अनंत सिंह जदयू के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते थे। उसी साल 8 महीने बाद विधानसभा का चुनाव दूसरी बार हुआ और उसमें भी अनंत सिंह जदयू के ही उम्मीदवार थे. उस वक्त मोकामा से वो जीते भी। यह सिलसिला 2010 के चुनाव में भी जारी रहा. लेकिन बिखराव आया 2014 में आया. तब लोकसभा चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की दोस्ती हो चुकी थी.

2015 में बाढ़ के पुटुस यादव हत्याकांड को लेकर लालू प्रसाद काफी नाराज थे, जिसका खामियाजा अनंत सिंह को भुगतना पड़ा था। इस केस में अनंत सिंह का नाम जुड़ा था। इस कारण उन्हें जदयू छोड़ना पड़ा, जेल भी जाना पड़ा। बावजूद इसके निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 2015 का चुनाव वो जीत गए. जानकार मानते हैं कि बिहार की तमाम सियासी पार्टियां इससे अछूती नहीं है इसकी बड़ी वजह है कि ऐसे बाहुबली अपने बाहुबल से वोट और लोगों पर बड़ा प्रभाव डालते हैं.
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