बिहार चुनाव: दलबदलू कहलाए तो क्या हुआ फिर भी 'इज्जत' मिली! पाला बदलने वाले नेताओं की बल्ले-बल्ले

 (सांकेतिक चित्र)
(सांकेतिक चित्र)

बिहार के प्रमुख सियासी दलों, बीजेपी, राजद, जदयू, कांग्रेस और लोजपा (BJP, RJD, JDU, Congress and LJP) ने बागी नेताओं के लिए अपने-अपने दरवाजे खोल दिए जिससे इन्हें चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिल गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 9:04 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar election, Bihar Assembly ) के नतीजे तो 10 नवंबर को आएंगे, लेकिन इससे पहले कई सियासी उठापठक देखने को मिले हैं. खास तौर से वैसे नेता जिनके टिकट किसी न किसी वजह से कटे तो उनके लिए इस बार के चुनाव में ढेरों विकल्प मौजूद रहे. यही नहीं टिकट बंटवारे के बीच अंतिम दौर में पार्टियों में शामिल हुए नेताओं को टिकट मिलते देर नहीं लगी. लोक जन शक्ति पार्टी इस चुनाव में 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, ऐसे में इन टिकट कटे नेताओं के लिए सबसे बेहतरीन अवसर भी लोजपा में ही रहा. हालांकि भाजपा की बी टीम कही जाने वाली लोजपा ने ने सबसे ज्यादा नुकसान भी भाजपा को पहुंचाया है.

लोजपा में भाजपा के बागियों का समायोजन

बता दें कि भाजपा छोड़कर आए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह लोजपा कि टिकट पर दिनारा से चुनाव लड़ रहे हैं. इसी तरह टिकट कटने पर भाजपा छोड़ कर लोजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक रामेश्वर चौरसिया सासाराम से लोजपा उम्मीदवार हैं. भाजपा की पूर्व विधायक उषा विद्यार्थी पालीगंज से लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. श्वेता सिंह, रविंद्र यादव, इंदु कश्यप, मृणाल शेखर, कामेश्वर सिंह मुन्ना, रानी कुमारी, कुमारी शोभा सिन्हा, अर्जुन राम, शशि भूषण और तारकेश्वर सिंह भले ही इस चुनाव में लोजपा उम्मीदवार हैं, लेकिन लोजपा का टिकट मिलने से पहले तक ये सभी भाजपा में सक्रिय  थे.



राजद छोड़े तो नीतीश की जदयू ने दिया सम्मान
राजद छोड़कर जदयू में आए कई नेता जदयू के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं. लालू प्रसाद यादव के समधी चंद्रिका राय परसा सीट से  चुनाव लड़ रहे हैं. जयवर्धन यादव, प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव, फराज फातमी, अशोक कुमार और संजय प्रसाद राजद छोड़ जदयू का उम्मीदवार बने हैं. जमुई से चुनाव लड़ रही अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह ने कभी राजनीति नहीं की, लेकिन ऐन चुनाव से पहले भाजपा पर निशाना साधा. निशाना सटीक बैठा और टिकट पा कर भाजपाई हो गईं.

राजद ने भी हर दल से आने वालों का किया स्वागत

राजद ने ऐसे कई लोगों को उम्मीदवार बनाया है जो हाल ही में दूसरे दलों से पार्टी में आए हैं. लोजपा सांसद रमा सिंह अब राजद नेता हैं और उनकी पत्नी वीणा सिंह महनार से राजद उम्मीदवार. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे भरत बिंद राजद में शामिल हुए और भभुआ से टिकट मिल गया. रालोसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे भूदेव चौधरी राजद में शामिल हुए और धौरैया से राजद का उम्मीदवार बना दिया गया.



राजद ने सियासत के कुछ बड़े नाम भी अपने साथ जोड़े

पूर्व सांसद लवली आनंद दल बदल कर राजद में शामिल हुईं. खुद सहरसा से चुनावी मैदान में हैं तो बेटे चेतन आनंद शिवहर से. चौधरी महबूब अली कैसर कभी कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष थे. कांग्रेस छोड़ लोजपा में आए. अभी लोजपा सांसद हैं। बेटे चौधरी युसूफ कैसर ने राजद का लालटेन थामा और सिमरी बख्तियारपुर से उम्मीदवार बना दिए गए. इसी तरह रालोसपा छोड़कर राजद में आए मोहम्मद कामरान भी अब चुनावी मैदान में हैं.

कांग्रेस ने भी बागियों का अपनी पार्टी में किया वेलकम

पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव तो कांग्रेस में टिकट लेकर ही शामिल हुईं. राजद से नाता तोड़कर आए विजेंद्र चौधरी को पार्टी ने मुजफ्फरपुर से प्रत्याशी बनाया तो जदयू वाले गजानन शाही बरबीघा से. जदयू से आए रवि ज्योति राजगीर से टिकट पा गए और लोजपा से आए काली पांडेय कुचायकोट से. वीआईपी के तो लगभग सभी उम्मीदवार ही दूसरे दलों से हैं. सुगौली से उम्मीदवार रामचंद्र साहनी भाजपा के मौजूदा विधायक हैं. वीरेंद्र ओझा, हरि साहनी, सुमन महासेठ और मिश्री लाल भी वीआईपी उम्मीदवार बनाए जाने से ठीक पहले दूसरे दलों के नेता थे.
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