बिहार चुनाव: क्या ज्ञानू बचपाएंगे बाढ़ सीट या कांग्रेस जीतेगी 'चितौड़' ? जानें क्या बन रहे समीकरण

बाढ़ विधानसभा सीट पर एनडीए के प्रत्याशी ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू चुनाव प्रचार करते हुए.
बाढ़ विधानसभा सीट पर एनडीए के प्रत्याशी ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू चुनाव प्रचार करते हुए.

राजद (RJD) के खाते में बाढ़ सीट जाने के अनुमान पर यहां वर्षों से प्रभुनाथ सिंह की बेटी मधु सिंह (Prabhunath Singh's daughter Madhu Singh) और नमिता नीरज ने हर क्षेत्र में राजद के लिए काफी काम किया, लेकिन टिकट देने की बारी आई तो कांग्रेस (Congress) के सत्येंद्र बहादुर को मिल गया.

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पटना. बाढ़ विधानभा क्षेत्र (Barh Assembly Constituency)राजपूत बहुल मतदाओं वाला है. ऐसे में कई लोग इस क्षेत्र को बिहार का चित्तोड़ भी कहते हैं. इस सीट के हाल के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा से ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू (Gyanendra Singh Gyanu ) तीन बार से विधायक बनते आ रहे हैं. उन्होंने पहले दो बार जदयू और 2015 में जदयू-राजद के विरोध में भाजपा से जीत दर्ज की थी. लेकिन, इस बार समीकरण कुछ अलग दिख रहा है. दरअसल कहा जा रहा है कि एनडीए (NDA) में टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ता-नेता भीतरघात की तैयारी में लगे हैं. साथ ही जदयू (JDU) भी पूरे जोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए नजर नहीं आ रहे हैं. हालांकि विधायक ज्ञानू सबको साथ ले कर चलने की बात कहते हैं.

महागठबंधन का भी हाल ठीक नहीं

राजद के खाते में बाढ़ सीट जाने के अनुमान पर यहां वर्षों से प्रभुनाथ सिंह की बेटी मधु सिंह और नमिता नीरज ने हर क्षेत्र में राजद के लिए काफी काम किया, लेकिन टिकट देने की बारी आई तो कांग्रेस के सत्येंद्र बहादुर को मिल गया. अंदरखाने में चर्चा है कि कई कांग्रेसी भी चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं. यानी महागठबंधन में भी भीतरघात की गुंजाइश पूरी है. पर कांग्रेस उम्मीदवार  सत्येंद्र बहादुर को राजद का भरपूर सहयोग मिलते देख ये कयास लगाये जा रहे हैं कि इस बार यह सीट कांग्रेस के पाले में भी जा सकती है.



राजपूत बहुल क्षेत्र है बाढ़
बाढ़ में सबसे अधिक वोट राजपूत जाति का है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां से राजपूत जाति  के ही कई उम्मीदवार खड़े हैं. भाजपा से ज्ञानू , कांग्रेस से सत्येंद्र बहादुर, जाप से श्याम देव चौहान, विजय कृष्ण की पत्नी, और सबसे नजदीकी विधायक ज्ञानू के रहे निर्दलीय उम्मीदवार रणबीर सिंह पंकज, जो सबसे ज्यादा ज्ञानू को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में राजपूतों वोटों में बिखराव कहीं कुछ और ही कहानी न गढ़ दे.



निर्दलीय उम्मीदवार लल्लू मुखिया पर नजर

बाढ़ एनटीपीसी में अपना वर्चस्व जमाने के बाद चुनावी मैदान में कर्णवीर यादव उर्फ लल्लू मुखिया धीरे- धीरे वोटकटवा की भूमिका से चुनावी रेस में आ गए हैं. यादवों के साथ होने की बात कहते हुए लल्लू मुखिया की नजर अति पिछड़ों पर टिकी हुई है. इसके लिए लगातार ऐसे इलाकों में दौरे कर रहे हैं जहां उन्हें कुछ उम्मीद दिख रही है.
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