बिहार चुनाव: सत्ता में आई तो शराबबंदी की समीक्षा करेगी कांग्रेस, बोली- चार साल में तीन लाख लोग हुए गिरफ्तार

कांग्रेस का वादा- शराबबंदी की करेंगे समीक्षा
कांग्रेस का वादा- शराबबंदी की करेंगे समीक्षा

कांग्रेस के शराबबंदी (Prohibition) की समीक्षा मामले पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी (Ashok Chaudhary) ने कहा सामाजिक सरोकार के कार्यो से इनका लेना देना नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 6:29 PM IST
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पटना. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वाम दलों के साथ महागठबंधन (Mahagathbandhan) में शामिल कांग्रेस (Congress) ने बुधवार को अपना मेनिफेस्टो जारी किया. इसमें महिलाओं को इंसाफ से लेकर किसानों के कर्ज माफी का वादा किया गया. इसके अलावा कई अन्य वादे भी किए गए हैं. बदलाव पत्र के नाम से जारी कांग्रेस के इस मेनिफेस्टो (Manifesto) में एक बड़ा वादा शराबबंदी (Prohibition) को लेकर भी किया है. पार्टी का कहना है कि शराबबंदी से गरीब जनता के लिए मुश्किलें पैदा हुई हैं और वह सत्ता में आने पर इस निर्णय की वो सत्ता में आने पर समीक्षा करेगी.

कांग्रेस ने अपने बदलाव पत्र में कहा है कि हमारी सरकार बिहार के वर्तमान शराबबंदी कानून की समीक्षा करते हुए इस में आवश्यक सुधार करेगी जिससे राज्य के गरीब एवं असहाय लोगों के साथ न्याय हो सके.पार्टी ने यह भी कहा कि शराबबंदी से राज्य के राजस्व को नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार इसके सकारात्मक उद्देश्य से भटक गई है. इसके कारण राज्य में अवैध व्यापार हो रहा है और पुलिस को लाभ पहुंचा है, जबकि जनता अभी भी परेशान ही है. ऐसे में सत्ता में आने पर इसकी सही से समीक्षा की जाएगी.

कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में यह भी लिखा  है कि एक आंकड़े के अनुसार 1 अप्रैल 2016 से लेकर 31 अगस्त 2020 तक 300000 से अधिक लोग शराबबंदी के केस में गिरफ्तार हो चुके हैं. इनके परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. कांग्रेस ने आगे लिखा कि सही मायने में मद्य निषेध केवल कागजों तक ही सीमित है पर इसी के नाम पर एक समानांतर अर्थव्यवस्था पुलिस एवं माफिया के सांठ-गांठ के साथ सरकार के साथ ही चल रही है. इससे सरकारी कोष में तो घाटा हो रहा है साथ ही सरकार सकारात्मक उन उद्देश्यों से भी भटक रही है.



मेनिफेस्टो में आगे लिखा गया है कि पुलिस की सहायता से यह वैधानिक व्यापार राज्य के पंचायती स्तर पर भी पनप रहा है. बेरोजगार युवक भी इस अवैधानिक व्यापार की ओर आकर्षित हो रहे हैं. इनमें से अधिकांश दलित महादलित परिवार के हैं. पुलिस का सारा ध्यान जघन्य एवं आम अपराधों से हटकर उत्पाद शुल्क एवं वस्तुओं की ओर ज्यादा दिखता है फलस्वरूप पुलिस एवं प्रशासन को तो व्यक्तिगत लाभ हो रहा है, लेकिन हमारी मासूम जनता लगातार प्रताड़ित हो रही है.
बता दें कि वर्ष 2016 में शराबबंदी के फैसले को नीतीश सरकार ने लागू किया था और इसे एक बड़ी उपलब्धि करार दिया था. हालांकि, चुनावी सीज़न में बिहार के कई इलाकों में शराब पकड़ी गई है, जो कि इस फैसले के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है.  बता दें कि कांग्रेस के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने भी बुधवार को शराबबंदी पर सवाल उठाए थे. चिराग ने कहा था कि क्या सिर्फ शराबबंदी करने से ही महिला सशक्तिकरण हो गया है. शराबबंदी का फैसला सही तरीके से लागू नहीं हुआ है.

कांग्रेस के शराबबंदी की समीक्षा मामले पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा सामाजिक सरोकार के कार्यो से इनका लेना देना नहीं है. कांग्रेस की स्थिति ऐसी क्यों हुई है. महात्मा गांधी और अम्बेडकर को तो अब ये मान नहीं रहे हैं.  जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने कहा कि शराबबंदी से बिहा में कितना बदलाव हुआ सभी ने देखा है. ऐसे कांग्रेस का यह बयान समझ से परे है. कांग्रेस कि स्थिति पूरे देश मे कैसी हो गई है सब जानते हैं. अपनी साख बचाने के लिए कुछ भी कर रही है. वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि शराब पीने वाले लोग शराबबंदी की समीक्षा करेंगे,अच्छी बात है. उनको करना चाहिए, शराब छोड़नी चाहिए.
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