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    बिहार चुनाव: इस 'दाग' का मतदाताओं के पास क्या है जवाब? पहले चरण के 1066 प्रत्याशियों में 319 पर क्रिमिनल केस, देखें पूरी सूची

    पहले चरण के 319 उम्मीदवारों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले. (सांकेतिक चित्र)
    पहले चरण के 319 उम्मीदवारों पर दर्ज हैं आपराधिक मामले. (सांकेतिक चित्र)

    Bihar Assembly Election 2020: तमाम तरह के दावों के बावजूद विभिन्‍न राजनीतिक दल आपराधिक मामलों में नामजद नेताओं को पार्टी प्रत्‍याशी बनाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 16, 2020, 9:29 AM IST
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    पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Elections 2020) के पहले चरण के लिए 28 अक्टूबर को वोटिंग होगी. मतदाओं के समक्ष अपने क्षेत्र का विकास करने वाले और बेदाग छवि के जनप्रतिनिधि चुनने की चुनौती होगी. हालांकि, बेदाग उम्मीदवारों को चुनना थोड़ा मुश्किल होगा, क्योंकि पहले चरण में 30 प्रतिशत उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनपर आपराधिक मामले दर्ज हैं. बता दें कि पहले चरण में 71 सीटों पर चुनाव होने हैं और इसके लिए कुल 1,066 उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें से 319 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

    गुरुआ विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 10 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. दिनारा विस क्षेत्र में 9 प्रत्याशियों पर और बांका, शेखपुरा और शाहपुर में आठ-आठ प्रत्याशियों पर एवं तरारी, चैनपुर, अरवल, ब्रह्मपुर, डुमरांव, आरा व रजौली में सात-सात उम्मीदवारों पर आपराधिक केस हैं. अमरपुर में पांच, कहलगांव में तीन, धोरैया में दो, बेलहर में दो पर क्रिमिनल केस दर्ज हैं, जबकि सुल्तानगंज, कटोरिया, मोहनिया, बाराचट्टी और जमुई के मतदाता भाग्यशाली हैं. इन पांचों सीटों पर एक-एक दागी उम्मीदवार ही हैं.

    वहीं, तारापुर में पांच, मुंगेर, लखीसराय व जमालपुर में छह-छह, सूर्यगढ़ा में पांच, बरबीघा, मोकामा व बाढ़ में चार-चार, मसौढ़ी व पालीगंज में तीन-तीन, बिक्रम में दो, संदेश में पांच, बड़हरा, अगिआंव व कुटुम्बा में छह-छह, तरारी, जगदीशपुर व बक्सर में पांच-पांच उम्‍मीदवारों पर मामले दर्ज हैं.



    राजपुर, रामगढ़, काराकाट, कुर्था, घोसी, नवीनगर, शेरघाटी, गया टाउन में चार-चार, मोहनिया में एक, भभुआ, सासाराम, कुटुम्बा, अतरी व वजीरगंज में छह-छह, मोहनिया में एक, जहनाबाद में दो, मखदुमपुर, औरंगाबाद, रफीगंज, इमामगंज, बेलागंज, हिसुआ, गोविंदपुर, वारसलिगंज व गोह में तीन-तीन प्रत्‍याशियों पर मामले दर्ज हैं.
    2010 और 2015 के इन आंकड़े
    अगर दलगत स्थिति पर गौर करें तो RJD के 81 विधायकों में 46, जदयू के 71 में 37, भाजपा के 53 में 34, कांग्रेस के 27 में 16 और सीपीआई (एम) के तीनों तथा रालोसपा और लोजपा के एक-एक विधायक के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे. 2010 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे 57 फीसदी तो 2015 में विजयी 58 फीसदी माननीयों पर विभिन्न धाराओं में केस चल रहा था. 2010 में 33 फीसदी तो 2015 में 40 फीसदी विधायक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपित थे.
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