बिहार चुनाव: पांच मोर्चे पच्चीस दल! ...और नीतीश की राह हो गई आसान, जानें किस फ्रंट में शामिल है कौन सी पार्टी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फाइल फोटो)
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फाइल फोटो)

पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने एनडीए (NDA) में शामिल कर बड़ा दांव पहले ही चल दिया था और महागठबंधन (Grand Alliance) की एकता में सेंध लगा दी थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 5:25 PM IST
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पटना. विधानसभा चुनाव से पहले सीट शेयरिंग पर साथी दलों के बीच बनी असहमति ने बिहार में विपक्ष के बिखराव की कहानी लिख दी है. उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की रालोसपा (RLSP) की मायावती (Mayawati) की बसपा के साथ नया मोर्चा बनाने के साथ ही अब बिहार में पांच फ्रंट पर चुनावी लड़ाई लड़ी जाएगी. जाहिर है इसमें जो ज्यादा संगठित रूप से जनता के बीच वोट मांगने जाएगा उसे अधिक फायदा होगा. दरअसल बिखराव की शुरुआत सबसे पहले महागठबंधन से शुरू हुई जब पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने महागठबंधन को अलविदा कह दिया. इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा भी इस गठबंधन से अलग हो गए. हालांकि वाम दलों की एंट्री के साथ आने से महागठबंधन (Grand Alliance) थोड़ा मजबूत तो दिख रही है, लेकिन मांझी-कुशवाहा के अलग होने से परसेप्शन पर असर तो पड़ा ही है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विपक्षी दलों में बिखराव का सीधा फायदा सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) को होने वाला है और उनकी चुनावी राह आसान हो गई है.

वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए में शामिल कर बड़ा दांव पहले ही चल दिया था और महागठबंधन की एकता में सेंध लगा दी थी. अब जब विपक्षी दल एक-एक कर बिखर रहे हैं और मोर्चे पर नए मोर्चे बन रहे हैं, ऐसे में जनता के पास भी विकल्प का अभाव सीधे तौर पर हो जाता है.

अशोक शर्मा कहते हैं कि दरअसल आज के दौर में नीतीश कुमार से बड़ा चेहरा बिहार में कोई और है भी नहीं. वहीं, तेजस्वी खेमे से दो बड़े घटक दलों का निकल जाना इस बात को पुष्ट करता है कि तेजस्वी यादव अभी उतने परिपक्व नहीं हैं, जो बिहार की राजनीति को संभाल पाएं. जाहिर है इतना परसेप्शन भर जनता के मिजाज को बदलने के लिए काफी है और ऐसे में विकल्पहीनता दिखती है.




बता दें कि मंगलवार को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और जनवादी पार्टी सोशलिस्ट पार्टी के साथ एक नए मोर्चे का ऐलान किया गया. इससे पहले सोमवार को जन अधिकार पार्टी (JAP) के अध्यक्ष व पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (Pappu Yadav) ने चार पार्टियों के साथ यूडीए बनाया था. आइये हम नजर डालते हैं कि बिहार में कौन-कौन से मोर्चे हैं और इनमें कौन-कौन से दल शामिल हैं.
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ( NDA)- इस गठबंधन की ही सरकार बिहार में शासन कर रही है. इसमें जनता दल यूनाइडेट, भारतीय जनता पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी पहले से शामिल है. वहीं, हाल में ही पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा भी इसका हिस्सा हो गई है.
महागठबंधन (Grand Alliance)- बिहार में महागठबंधन राष्ट्रीय जनता दल की अगुआई में बनी है. इसमें फिलहाल आरजेडी के साथ ही कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी, सीपीआई, सीपीआई (एम), भाकपा माले शामिल है. हालांकि यहां भी सीट शेयरिंग का मामला फाइनल नहीं हुआ है.
प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (PDA) - बीते सोमवार को जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने इस मोर्चे के गठन का ऐलान किया है. इसमें उनकी जन अधिकर पार्टी, चंद्रशेखर आजाद 'रावण' की आजाद समाज पार्टी, एमके फैजी की SDPI, वीएल मतंग की बहुजन मुक्ति पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग शामिल है. अब इसमें प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) को भी शामिल करने की कोशिश की जा रही है.
मंगलवार को रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra kushwaha) ने महागठबंधन से अलग होकर नए गठबंधन ऐलान किया. उन्होंने रालोसपा, मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी और जनवादी पार्टी सोशलिस्ट पार्टी के साथ एक नया चुनावी फ्रंट तैयार किया है.
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव की पार्टी समाजवादी जनतादल के बीच गठबंधन किया है. इस गठबंधन को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक सेक्युलर एलायंस (यूडीएसए) का नाम दिया गया है.
गौरतलब है कि पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी बिहार में एक चुनावी मोर्चा बनाया है. इसमें ज्यादातर ऐसे नेता शामिल हुए हैं, जो न तो महागठबंधन का हिस्सा हैं और न ही एनडीए का. इसमें यशवंत के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र यादव, पूर्व बिहार मंत्री नरेंद्र सिंह और रेनू कुशवाहा, पूर्व सांसद अरुण कुमार और नागमणि जैसे नेता शामिल हैं.
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