Bihar Assembly Election : चिराग के तल्ख तेवर और नीतीश की बेफिक्री! जानें इनसाइड स्टोरी

चिराग पासवान और  नीतीश कुमार(फाइल फोटो)
चिराग पासवान और नीतीश कुमार(फाइल फोटो)

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) कुशल रणनीतिकार हैं, ऐसे में उन्होंने जीतन राम मांझी (Jitan ram Manjhi) को अपने पाले में लाकर राजनीतिक दांव चल दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 12:47 PM IST
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पटना. पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी (Jitan ram Manjhi) के अलग होने के ऐलान के साथ ही महागठबंधन (Grand Alliance) में बिखराव शुरू हो चुका है. अब कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra kushwaha) भी अपनी पार्टी के इस अलायंस से अलग होने का ऐलान कर सकते हैं. वहीं, विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी भी अक्सर डिप्टी सीएम पद को लेकर अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं, जिसे आरजेडी ने अब तक कोई खास तवज्जो नहीं दी है. दूसरी ओर एनडीए के भीतर भी घमासान मचा हुआ है. खबर है कि लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान के सीएम नीतीश कुमार को लेकर तल्ख तेवर से अब बीजेपी भी नाराज है. इन सब के बीच एक बात जो गौर करने लायक है वह है सीएम नीतीश कुमार की बेफिक्री.

चिराग पर बोले नीतीश- कोई खास बात नहीं
दरअसल, बुधवार को जब सीएम नीतीश कार्यकर्ताओं से मैराथन मीटिंग कर वापस जाने लगे तो मीडिया के सवालों पर उन्होंने जो जवाब दिया उससे साफ जाहिर है कि NDA में चिराग के तेवर को सीएम नीतीश कुमार शायद तवज्जो देने के मूड में नहीं हैं. तभी तो जब उनसे चिराग की नाराजगी को लेकर सवाल किया गया तो पहले वो सवाल को अनसुना करते रहे, लेकिन फिर कहा कि इसमें कोई खास बात नहीं है. यानी चिराग को लेकर नीतीश कुमार कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं.


बीजेपी ने चिराग को दिया यह ऑफर


बता दें कि पहले ही नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने ये जता दिया है कि चिराग भारतीय जनता पार्टी का मसला हैं और वही उनसे निपटेगी. इस बीच खबर ये है कि बीजेपी इस चुनाव में लोजपा को 25 सीट से ज्यादा देने के मूड में नहीं है. पहले ही बीजेपी ने लोजपा को 20 से 22 सीटें ऑफर की थीं, लेकिन अब 25 सीट तक देने को तैयार है.

चिराग पासवान एक ओर जेडीयू को अल्टीमेटम दे रहे हैं तो दूसरी तरफ लोजपा प्रमुख चाहते हैं कि उनके पाले में कम से कम 30 सीटें हों. सीटों की संख्या के साथ मनपसंद सीटों को लेकर भी विवाद बढ़ गया है. बीजेपी-लोजपा और जेडीयू के बीच कई जगहों पर पेच फंस रहा है. सूत्रों के मुताबिक, समझौता न होने की सूरत में लोजपा 143 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, जिसके संकेत चिराग पासवान पहले ही दे चुके हैं.

मांझी दांव से चिराग को चित कर गए नीतीश!
बिहार में ताजा सियासी घटनाक्रम से जो संकेत मिल रहे हैं वो यही है कि जेडीयू चिराग को घुटनों पर लाना चाहती है, जबकि बीजेपी उसका साथ नहीं छोड़ना चाहती है. लेकिन, पेच सीट शेयरिंग को लेकर फंसा हुआ है. दूसरी ओर सीएम नीतीश की नजर महागठबंधन में हो रही उठापठक पर लगी हुई है. अगर कुशवाहा की वहां से विदाई होती है या फिर वे खुद छोड़ते हैं तो नीतीश कुमार उन्हें अपने पाले में कर सकते हैं.

सीएम नीतीश ने मांझी को अपने पाले में लाकर चिराग पासवान की दलित सियासत को चोट पहुंचा चुके हैं. वहीं, चिराग पासवान के लिए एनडीए छोड़ने का फैसला करना आसान नहीं होगा. इसके पीछे की वजह ये है कि उनके पिता रामविलास पासवान केंद्र सरकार में मंत्री हैं और आने वाले समय में वे इस पद पर तकरीबन चार साल और रह सकते हैं. वहीं, चिराग की मुश्किल ये है कि अकेले लड़ेंगे तो पार्टी को सियासी समीकरण के तहत बड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है.

महागठबंधन की राह भी आसान नहीं
दूसरी ओर, अगर कुशवाहा के महागठबंधन छोड़ने के बाद चिराग की वहां एंट्री होती है तो भी एलजेपी के लिए बड़ा घाटा होगा. इसके पीछे की वजह ये है कि वहां तीन-तीन वामपंथी दलों की दावेदारी है और सीट शेयरिंग में कांग्रेस के बाद उनका हिस्सा अन्य छोटे दलों (वीआईपी) से काफी अधिक होने जा रहा है. वहीं, महागठबंधन में चेहरे की भी लड़ाई हो सकती है, क्योंकि तेजस्वी यादव खुद को सीएम फेस के तौर पर पेश करना चाहते हैं और चिराग स्वयं अपना वजूद बनाना चाहते हैं.

सीट शेयरिंग पर फंसा है पेच
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि दरअसल चिराग की छटपटाहट इसलिए भी है, क्योंकि एक ओर जेडीयू से बैर है तो दूसरी ओर बीजेपी भी बहुत अधिक भाव नहीं दे रही है. हालांकि, बीजेपी नेता चाहते हैं कि एलजेपी एनडीए में ही रहे, लेकिन सीट शेयरिंग पर पेच फंसा हुआ है. सूत्र बताते हैं कि लोकसभा चुनाव के आधार पर चिराग पहले 42 सीटों पर दावा कर रहे थे, लेकिन बाद में वे 36 सीटों पर भी मानने को तैयार हो गए थे.

मांझी की एंट्री ने बिगाड़ा LJP का खेल?
इस बीच मांझी की एंट्री के कारण सीट शेयरिंग में जेडीयू बड़ा भाई बने रहने को तत्पर है और 115 से 119 सीटों पर उनकी दावेदारी है. ये इसलिए भी है कि वह मांझी की पार्टी को अपने कोटे से सीट देने जा रही है. वहीं, बीजेपी, एलजेपी का साथ तो नहीं छोड़ना चाहती है, लेकिन सीट शेयरिंग का समीकरण ऐसा बन रहा है कि काफी समझौता करने के बाद भी बीजेपी 22 से 26 सीटें ही एलजेपी को दे सकती है. ऐसे में अब ये हेडेक भी बीजेपी की है न कि जेडीयू की.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि सीएम नीतीश कुमार कुमार कुशल रणनीतिकार हैं, ऐसे में उन्होंने मांझी को अपने पाले में लाकर राजनीतिक दांव चल दिया है. मांझी की एनडीए में एंट्री के साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि नीतीश की बड़े भाई की भूमिका ही रहने जा रही है. वहीं, चिराग पासवान की एलजेपी को जेडीयू अकेले चुनाव मैदान में जाने की चुनौती भी दे रही है.

नुकसान LJP का ही?
विश्‍लेषक यह भी बताते हैं कि नीतीश कुमार इसलिए भी बेफिक्र हैं, क्योंकि पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा जैसे बड़े नेता यह कह चुके हैं कि बिहार चुनाव में सीएम फेस नीतीश कुमार ही होंगे. जाहिर है बीजेपी नीतीश कुमार को सीएम फेस की अपनी मजबूरी दिखा चिराग का खुलकर सपोर्ट नहीं कर पा रही है. ऐसे में चिराग पासवान कुछ खास कर पाने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि हर परिस्थिति में नुकसान एलजेपी का ही है. ऐसे में सीएम नीतीश की बेफिक्री भी दिख रही है.
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