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    बिहार चुनाव: ...तो तेजस्वी को फांसी पर चढ़ा देना, शक्ति मलिक हत्याकांड पर गरमाई सियासत

    शिवानंद तिवारी (फाइल फोटो)
    शिवानंद तिवारी (फाइल फोटो)

    शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwary) ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) और उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव ((Tej pratap Yadav) हत्या के मामले में नामजद अभियुक्त बनाया जाना एक गंभीर राजनीतिक षडयंत्र है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 6, 2020, 2:32 PM IST
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    पटना. बिहार में राजद के दलित नेता रहे शक्ति मलिक  (RJD's Dalit leader Shakti Malik ) हत्या मामले में सियासत गर्म है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) और राजद नेता  तेज प्रताप (Tejpratap Yadav) के खिलाफ केस दर्ज कराए जाने के बाद बीजेपी और जेडीयू नेता जहां आरजेडी (RJD and JDU) पर हमलावर है, वहीं उसके राजद के राज्यसभा सांसद मनेाज झा (Manoj Jha) और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी (Shivanand Tiwary) समेत तमाम नेता बचाव में उतर आए हैं. मनोज झा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यदि जांच में दोषी साबित हों तब तेजस्वी यादव को फांसी पर चढ़ा देना.

    वहीं, शिवानंद तिवारी ने कहा कि इस मामले में मृतक के परिवार के लोगों ने जो नामजद एफआईआर दर्ज कराई है उसमें नेता प्रतिपक्ष और उनके बड़े भाई को नामजद किया जाना घोर आपत्तिजनक है. उन्होंने कहा कि हम इस आरोप को मजबूती के साथ नकारते हैं. राजद नेता ने कहा कि विधानसभा का चुनाव सिर पर है ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष और उनके बड़े भाई को हत्या के मामले में नामजद अभियुक्त बनाया जाना एक गंभीर राजनीतिक षडयंत्र है.

    शिवानंद तिवारी ने कहा कि जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. ऐसे में इस बयान को हम मुख्यमंत्री जी की पार्टी का आधिकारिक बयान मान रहे हैं. हम जदयू की इस मांग का समर्थन करते हैं और मांग करते हैं कि सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करे.



    बता दें कि इससे पहले सोमवार को भाजपा ने तेजस्वी यादव व तेज प्रताप यादव से जवाब मांगते हुए कहा था कि इन दोनों नेताओं के नाम मृतक नेता के परिजनों द्वार प्राथमिकी में दर्ज करवाए गए हैं. ऐसे में बिहार की जनता को इस बारे में स्थिति साफ होनी चाहिए.
    बता दें कि शक्ति कुमार मलिक पहले राजद के अनुसूचित जाति मोर्चा के महासचिव थे, कुछ दिन पहले ही उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था. कयास लगाए जा रहे थे कि वे रानीगंज से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, ऐसे में एक दलित नेता की हत्या सवालों के घेरे में है. गौरतलब है कि मलिक की हत्या मामले में तेजस्वी और उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव सहित छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है.
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