...ऐसा हुआ तो राष्ट्रीय राजनीति का रुख मोड़ सकते हैं बिहार चुनाव के नतीजे! जानें 5 बड़े प्रभाव

बिहार चुनाव नतीजों का राष्ट्रीय राजनीति पर होगा असर.
बिहार चुनाव नतीजों का राष्ट्रीय राजनीति पर होगा असर.

बिहार चुनाव (Bihar election) में सिर्फ सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) या फिर एनडीए (NDA) की एकजुटता की ताकत का ही नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन की शक्ति का भी आकलन होना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 3:27 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में दो बातें साफ-साफ दिख रही हैं. पहला यह कि कई कोणों के बीच लड़े जा रहे बिहार चुनाव में महागठबंधन और एनडीए (NDA) के बीच सीधा मुकाबला नजर है. दूसरा यह कि  इस चुनाव के नतीजे केवल एक बिहार में सरकार बनने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसका राष्ट्रीय राजनीति (National Politics) पर भी असर पड़ना तय है. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि वर्ष 2015 में जिस तरह से भाजपा (BJP) के विजय रथ को बिहार रोका गया था और देश की सियासत में एक बदलाव देखने को मिला था, इस बार भी इसी प्रकार यह चुनाव अहम है और इससे भाजपा विरोध और विपक्ष की राजनीति की आगामी तस्वीर भी कुछ-कुछ साफ हो जाएगी.

विरोधी दलों का बन सकता है नया अलायंस!
बिहार चुनाव में सिर्फ बिहार में सीएम नीतीश कुमार या फिर एनडीए की एकजुटता की ताकत का ही नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन की शक्ति का भी आकलन होना है. बिहार में कांग्रेस, कम्युनिस्ट और समाजवादी (राजद) एक साथ चुनाव मैदान में हैं. इनका एक साथ आना इसलिए भी अहम है, क्योंकि देश के कई राज्यों में कांग्रेस मजबूत है तो कुछ राज्यों में कम्युनिस्ट पार्टी की भी प्रभावी भूमिका है. हालांकि, समाजवादी कुनबा (राजद-जदयू-बसपा-सपा-लोजपा जैसी पार्टियां) बिखरा हुआ है, लेकिन इस चुनाव के बाद काफी कुछ बदल सकता है और अगर इनके पक्ष में परिणाम रहे तो एकता की सुगबुगाहट होगी वरना यह दोबारा बिखर कर शक्तिहीन हो सकता है.


पश्चिम बंगाल के चुनाव पर भी होगा असर


बिहार चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल बड़ी चुनौती है. अगर बिहार के नतीजे एनडीए के लिए गड़बड़ाते हैं तो बंगाल का चुनावी समीकरण भी प्रभावित हो सकता है. भाजपा को रोकने के लिए वहां भी भाजपा विरोधी दलों में एकता हो सकती है. ऐसे में तस्‍वीर बदल भी सकती है, लेकिन यह भी तय है कि अगर नीतीश कुमार बिहार में भाजपा के साथ सरकार बनाने में कामयाब होते हैं तो यह भाजपा के लिए बंगाल में बड़ा बूस्ट होगा.

एनडीए में विश्वास-अविश्वास पर होगी बहस
बिहार चुनाव से पहले भाजपा को दो बड़े झटके लगे हैं. पहले शिवसेना एनडीए से निकली तो बाद में अकाली दल ने भी साथ छोड़ दिया. यानी एनडीए अब घट रहा है. वहीं, जिस तरह से बिहार में भाजपा-लोजपा गठजोड़ को प्रचारित किया जा रहा है, इससे चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के रुख से एनडीए का भविष्य निर्भर करेगा. अगर नीतीश कुमार जैसे सहयोगी को भाजपा अपने साथ रख पाने में सफल रही तो आने वाला समय उसके लिए सकारात्मक होगा वरना विपक्ष ताकतवर बनकर उभरेगा.

एनडीए बनाम भाजपा विरोधी मोर्चा
बिहार चुनाव परिणाम में एनडीए के मुकाबले अगर बिहार में कांग्रेस, कम्युनिस्ट और राजद का महागठबंधन आगे निकलता है तो पूरे देश में भाजपा विरोधी दलों के एक मंच पर आने का रास्ता साफ हो सकता है. जाहिर है भाजपा नहीं चाहती है कि उसके खिलाफ देशभर में कोई ऐसा गठबंधन बने जो विभिन्न राज्यों के चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके लिए चुनौती पेश कर सके.

...तो नये मोड़ की ओर चल पड़ेगी राष्ट्रीय राजनीति 
अकाली और शिवसेना के बाद एनडीए के भविष्य पर भी बहस होने लगी है. हालांकि, भाजपा अपने साथ आंध्र प्रदेश में वाईएसआरसीपी जैसे कुछ क्षेत्रीय जलों को जोड़ने की कवायद में लगी है. बीजू जनता दल और टीआरएस का साथ भाजपा को समय-समय पर मिलता रहा है. तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक का रुख भाजपा के लिए अनुकूल है. ऐसे में अगर बिहार चुनाव के परिणाम एनडीए के पक्ष में रहे तो भाजपा एनडीए में कुछ और दलों को जोड़ अपना विस्तार करेगा और उसे फिर आगामी पांच-दस वर्षों तक डिगा पाना कठिन होगा. अगर नतीजे विपरीत रहे तो जाहिर तौर पर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा नये मोड़ की ओर चल पड़ेगी.
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