Bihar Chunav: 3 चेहरे जिन पर खास कारणों से टिकी है सबकी नजर, जानें सियासी समीकरण

अनंत सिंह, श्रेयसी सिंह और जीतन राम मांझी (फाइल फोटो)
अनंत सिंह, श्रेयसी सिंह और जीतन राम मांझी (फाइल फोटो)

Bihar Chunav 2020: जमुई सीट से BJP की प्रत्याशी श्रेयसी सिंह (Shreyasi Singh), मोकामा से अनंत सिंह (Anant Singh) और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी (Jitanram Manjhi) पहले चरण के चुनाव में हैं मैदान में. श्रेयसी सिंह राजनीति में भले नई हों, लेकिन राजनीति उनके लिए नई चीज नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 9:00 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के पहले चरण (First Phase Voting)  में जिन 71 सीटों के लिए 1066 प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें से कुछ खास सीटों पर लोगों की निगाहें टिकी हैं. उनमें से कुछ की हार-जीत पर उनके भविष्य की राजनीति का भी फैसला टिका है तो कुछ अपने दलों के लिए प्रतिष्‍ठा बन गए हैं. कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिनके लिए यह अस्तित्‍व की लड़ाई है. इनमें एनडीए (NDA) के दो और महागठबंधन (Mahagathbandhan) की तरफ से एक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की पुत्री व शूटर श्रेयसी सिंह

श्रेयसी सिंह (Shreyasi Singh) जमुई से बीजेपी की प्रत्‍याशी हैं, जहां उनका मुकाबला राष्‍ट्रीय जनता दल के बड़े नेता विजय प्रकाश से हो रहा है. राजनीति में भले ही नयी हों, लेकिन राजनीति उनके लिए नयी चीज नहीं है. देश के लिए भी वे कोई अनजान चेहरा भी नहीं हैं. अर्जुन पुरस्‍कार से सम्‍मानित तथा निशानेबाजी में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण व एशियाई खेलों में कांस्‍यपदक विजेता श्रेयसी सिंह पूर्व मंत्री दिग्‍विजय सिंह एवं पूर्व सांसद पुतुल सिंह की बेटी हैं. बीते लोक सभा चुनाव के दौरान उन्‍होंने बांका से प्रत्‍याशी रहीं अपनी मां के लिए चुनाव प्रचार भी किया था. 29 साल की श्रेयसी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना भविष्‍य का चेहरा देखा है. अगर वह सफल होती हैं तो अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगी.


पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की इमामगंज सीट पर फंसी लड़ाई
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्‍यमंत्री जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) इस चुनाव में राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में हैं. मांझी के लिए यह चुनाव अस्तित्‍व की लड़ाई है। अगर वे सम्‍मानजनक सीटें पाने में कामयाब रहे तो बिहार की राजनीति में बड़ा दलित चेहरा बनकर उभरेंगे. हालांकि उनके सामने महागठबंधन से उदय नारायण चौधरी हैं जो उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं. बता दें कि विधानसभा चुनाव के ठीक पहले उन्‍होंने महागठबंधन छोड़ कर नीतीश कुमार के साथ एनडीए का दामन थाम लिया था. लोक जनशक्ति पार्टी के बाद मांझी को एनडीए में दलित चेहरा के रूप में देखा जा रहा है. अगर इस बार नाकामयाबी हाथ लगी तो निश्चित तौर पर उनके पॉलिटिकल करियर को बड़ा झटका लगेगा.



नीतीश से अदावत के बाद बाहुबली अनंत सिंह महागठबंधन से मैदान में
मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) हों या राष्‍ट्रीय जनता दल सुप्रीमो (RJD) लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav), अनंत सिं‍ह समय-समय पर दोनों के लिए राजनीतिक मजबूरी बनते रहे हैं. कभी सीएम नीतीश के करीब रहे अनंत इस चुनाव में लालू के साथ हैं और तेजस्‍वी यादव (Tejashwi Yadav) में भविष्‍य का मुख्‍यमंत्री देख रहे हैं. अनंत सिंह मोकामा से चौथी बार चुनावी मैदान में हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के राजीव लोचन सिंह से है. मोकामा में 'छोटे सरकार' के नाम से प्रसिद्ध अनंत सिंह बीते चुनाव में जेडीयू को भारी अंतर से पराजित करने में सफल रहे थे. पिछली बार लालू -नीतीश के सामूहिक विरोध के बावजूद जीत दर्ज करने वाले अनंत इस बार अगर बीजेपी-जदयू के गठबंधन से जीतते हैं तो भी यह उनकी बड़ी कामयाबी होगी.
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