बिहार चुनाव: सिर्फ गुप्तेश्वर पांडेय ही बुरे नहीं फंसे! 3 पूर्व DGP राजनीति में रह चुके हैं नाकामयाब

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को कुछ दिन पहले ही सीएम नीतीश कुमार ने JDU की सदस्यता दिलाई थी.
पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को कुछ दिन पहले ही सीएम नीतीश कुमार ने JDU की सदस्यता दिलाई थी.

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey) ने राजनीति में इससे पहले भी उतरने की कोशिश की थी. इससे पहले भी उन्होंने VRS लिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 2:49 PM IST
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पटना. बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey) ने हाल में ही सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की मौजूदगी में जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ली थी. उनके बक्सर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें भी काफी दिनों से थीं. लेकिन, यह सीट जदयू (JDU) के बजाय भाजपा (BJP) के खाते में चली गई. उम्मीद जताई जा रही थी कि वह भाजपा के प्रत्याशी हो सकते हैं, पर बुधवार को उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही यह संभावना भी खत्म हो गई. भाजपा ने बक्सर से परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दिया है. जाहिर है 1987 बैच के आईपीएस अफसर रहे गुप्तेश्वर पांडेय के लिए यह बड़ा सेटबैक माना जा रहा है, लेकिन एक तथ्य यह भी है कि गुप्तेश्वर पांडेय अकेले ऐसे पूर्व डीजीपी नहीं हैं, जिन्हें राजनीति रास नहीं आई. इससे पहले भी बिहार के कई पूर्व पुलिस महानिदेशक राजनीति में असफल रह चुके हैं.

गुप्तेश्वर पांडे से पहले बिहार के डीजीपी रह चुके तीन पूर्व पुलिस महानिदेशकों ने भी राजनीति में किस्मत आजमाई थी, लेकिन वे सभी अपनी पॉलिटिकल पारी में नाकामयाब रहे. सबसे पहले साल 2004 में पूर्व डीजीपी डीपी ओझा बेगूसराय से सीपीआईएमएल के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा पर हार गए. इसी क्रम में पूर्व पुलिस महानिदेशक आशीष रंजन सिन्हा का भी नाम शामिल है. राजद से जुड़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 2014 में नालंदा से लोकसभा का उपचुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए. बिहार के डीजीपी रहे आरआर प्रसाद ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में से राजनीति में एंट्री मारी पर चुनावी मैदान में सफल नहीं हुए.





बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय ने राजनीति में इससे पहले भी उतरने की कोशिश की थी. इससे पहले भी उन्होंने वीआरएस ले लिया था. वह बक्सर से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन टिकट कंफर्म नहीं हुआ. बाद में उन्होंने वीआरएस वापस ले लिया. दूसरी बार फिर चुनावी राजनीति में उतरने के लिए उन्होंने डीजीपी का पद छोड़ दिया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में जदयू की सदस्यता भी ली, लेकिन एक बार फिर वह चुनावी मैदान से अभी तक दूर हैं.
गुप्‍तेश्‍वर पांडेय ने इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी बात रखी. उन्होंने लिखा, 'मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा, लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा. हताश निराश होने की कोई बात नहीं है. धीरज रखें. मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है. मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा. कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन न करें. बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है. अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहां के सभी जाति-मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें.'
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