बिहार में है चुनाव तो बंगाल में क्या कर रहे प्रशांत किशोर? आखिर PK को क्यों ढूंढ रहे लोग

बिहार विधानसभा चुनाव  में प्रशांत किशोर की गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहे सवाल. (फाइल फोटो)
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की गैरमौजूदगी को लेकर उठ रहे सवाल. (फाइल फोटो)

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे में सियासी गतिविधियां तेज हैं, पर प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) की ओर से कोई हलचल नहीं है. आलम यह है कि वे सोशल मीडिया (Social media) पर भी एक्टिव नहीं हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 11:55 PM IST
  • Share this:
पटना. बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है! पिछले विधानसभा चुनाव (2015) में ठेठ बिहारी बातचीत की शैली में बने इस स्लोगन की खूब चर्चा हुई थी. सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की छवि को और निखारने के लिए इस नारे को गढ़ने वाले प्रशांत किशोर ने भी खूब सुर्खियां बटोरी थीं. बिहार के जनमानस में इस नारे का इतना गहरा असर हुआ कि मोदी लहर के बावजूद दो तिहाई बहुमत से आरजेडी-जेडीयू गठबंधन बिहार की सत्ता में आई थी. अब 5 साल बाद फिर बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) है, लेकिन देश के मशहूर चुनावी स्ट्रैटजिस्ट व जनता दल यूनाइटेड के पूर्व उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) सुर्खियों से गायब हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे में सियासी गतिविधियां तेज हैं, पर प्रशांत किशोर की ओर से कोई हलचल नहीं है. आलम यह है कि वे सोशल मीडिया पर भी एक्टिव नहीं हैं और 20 जुलाई के बाद से उन्होंने कोई ट्वीट भी नहीं किया है. अपने अंतिम कमेंट में प्रशांत किशोर ने 20 जुलाई को देश में कोरोना वायरस के संक्रमण का जिक्र किया था और इससे पहले भी 11 जुलाई को लिखा था कि नीतीश जी ये वक्त चुनाव का नहीं, बल्कि कोरोना से लड़ने का है. चुनाव कराने की जल्दी में लोगों की जिन्दगी को खतरे में मत डालिए.

गत 11 जुलाई को किया गया प्रशांत किशोर का ट्वीट.





कहां रह गया प्रशांत किशोर का एक्शन प्लान?
पहले सीएम नीतीश के नेतृत्व में बिहार को विकसित राज्य बनाने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर के सक्रिय नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यही नहीं, फरवरी 2020 में सीएम नीतीश से मनमुटाव के कारण जेडीयू से निष्कासित होने के बाद अगले 10 साल में देश के अन्य विकसित राज्यों की तर्ज पर ले जाने वाला एक्शन प्लान लेकर आने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर की गैरमौजूदगी से राज्य के नेताओं के साथ जनता और मतदाता सभी हैरान हैं.

बंगाल में एक्टिव हैं पीके!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रशांत किशोर कोरोना लॉकडाउन के दौरान ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की 'मिशन बंगाल' के लिए निकल गए हैं. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि प्रशांत किशोर ने बिहार में सीधे सीएम नीतीश सरकार के खिलाफ एक तरह से मोर्चा खोल दिया था. जाहिर है एक वक्त में नीतीश के करीबी रहे प्रशांत किशोर के लिए मुख्यमंत्री से अदावत के बाद बिहार में टिकना भी मुश्किल हो गया था.

विकल्पहीनता के कारण पीके ने छोड़ा बिहार का मैदान!
राजनीतिक जानकार बताते हैं कि प्रशांत किशोर के लिए बिहार में राजनीति का आधार ही सीएम नीतीश थे और उनकी हर नीति में भी सिर्फ और सिर्फ नीतीश ही नीतीश थे. अब जब नीतीश से ही अलगाव हो गया तो दूसरे चेहरे को प्रोमोट करने की कवायद भी की थी. लेकिन, ऐसा लगता है कि सीएम नीतीश जैसे चेहरे की काट खोजना फिलहाल बिहार में मुश्किल था, ऐसे में उनके पास भी फिलहाल अपने पुराने पेशे में लौटने के अलावा बहुत ऑप्शन नहीं था.

वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में साथ थे प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)


पंजाब चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ होंगे पीके!
बता दें कि पिछले साल आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस की चुनावी रणनीति प्रशांत किशोर ने ही तैयार की थी. जगन मोहन रेड्डी (46) की पार्टी को 175 में से 151 सीटें मिलीं. जगन ने तेलगु देशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू को हराया और मुख्यमंत्री बने. अब खबर है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक बार फिर किशोर को अपने खेमे में शामिल करना चाहते हैं.

2017 में पंजाब को लेकर पीके का अनुमान सही साबित हुआ
दरअसल, पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे अमरिंदर सिंह के चेहरे के साथ ही प्रशांत किशोर की रणनीति का भी हाथ रहा था. पंजाब चुनाव के बाद प्रशांत किशोर ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें उन्होंने साफ कह दिया था कि प्रदेश में कांग्रेस 68 से 70 सीटों पर कब्ज़ा करेगी और सरकार बनाएगी. कांग्रेस ने 77 सीटों पर जीत हासिल की थी.

प्रशांत किशोर को शिद्दत से ढूंढ रहे बिहार के लोग और नेता
बहरहाल, प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से शांत और सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर 'बात बिहार की' के नाम से एक पेज एक्टिव है और वह उसी के जरिए नीतीश सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. राजनीतिक जानकार भी बताते हैं कि प्रशांत किशोर जैसे चेहरे का यूं राज्य की राजनीति से गायब हो जाना भी ठीक नहीं है. जाहिर है सूबे की सियासी समझ रखने वाले लोग अब प्रशांत किशोर की तलाश कर रहे हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज