बिहार में अबकी बार किसकी सरकार? जानें क्या कहता है पहले चरण का वोटिंग परसेंटेज

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 3 नवंबर को है.
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 3 नवंबर को है.

चुनाव नतीजे (Election results) आने से पहले तक पहले मतपेटियां और अब ईवीएम (EVM) हर राजनीतिक पार्टियों के लिए रहस्य का केंद्र रहती हैं. हालांकि उम्मीद सबको रहती है कि वही जीत रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2020, 11:46 AM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Asembly Election) के लिए पहले चरण का मतदान बुधवार को संपन्न हुआ. महागठबंधन और एनडीए (Grand Alliance and NDA) की ओर से क्लीन स्वीप के दावे किए जा रहे हैं. जाहिर है हर राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से मतदाताओं को अपने पक्ष में बताने की कवायद करती रही है. हालांकि इन दावों के बीच हर चुनाव में मतदान प्रतिशत भी कुछ संकेत करता है. बिहार के पहले चरण के चुनाव को लेकर चुनाव आयोग के मुताबिक 71 सीटों पर मतदान 54.26 प्रतिशत रहा है. अगर आंकड़ों पर गौर करें तो जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 54.75% वोटिंग हुई थी. ऐसे पूरे बिहार की 243 सीटों पर उस वर्ष 56.66 % मतदान हुआ था.

इसी तरह वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव  62.57 % , 2005 में 46.50%  और 2010  में 52.67%  मतदान हुआ था. बिहार चुनाव के पहले चरण के वोटिंग ट्रेंड को देखें तो पिछले चुनाव के बराबर ही लगभग मतदान नजर आ रहा है. हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में 53.92 फीसदी वोटिंग हुई थी जबकि 2010 के विधानसभा चुनाव में प्रतिशत बढ़कर 52.67%  फीसदी मतदान हुआ था.

हर दल के अपने- अपने दावे
चुनाव नतीजे आने से पहले तक पहले मतपेटियां और अब ईवीएम हर राजनीतिक पार्टियों के लिए रहस्य का केंद्र रहती हैं. हालांकि उम्मीद सबको रहती है कि वही जीत रहे हैं. कई चरणों में होने वाले चुनाव होने के कारण कार्यकर्ताओं-समर्थकों का मनोबल कायम रखने के लिहाज से भी यह हौसला जरूरी होता है और दावों का अपना अहम स्थान होता है.
दोनों पक्षों  के लिए चिंता का सबब!


हालांकि बिहार विधानसभा के पहले चरण का  मतदान प्रतिशत से यह साफ नहीं है कि क्या होने जा रहा है. दरअसल मतदान प्रतिशत अधिक होने का मतलब सत्ता विरोधी  लहर माना जाता रहा है, जबकि कम प्रतिशत को यथास्थिति बररकार रखने जनता के मूड के तौर पर देखा जाता रहा है. लेकिन इस बार फर्स्ट फेज में कोरोना का दौर होने के बावजूद मतदान प्रतिशत में बदलाव नहीं होना दोनों ही पक्षों के लिए चिंता का सबब हैं.

महिला और युवा मतदाताओं में उत्साह
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि कोरोनाकाल में चुनाव होने को लेकर यह आशंका थी कि मतदान प्रतिशत कम होगा, लेकिन बिहार के मतदाताओं का उत्साह पिछली बार से कम नहीं है. जाहिर है राजनीतिक पार्टियां अगले चरण के लिहाज से अपने दावों पर जोर दे रही हैं. हालांकि जमीन पर हालात यह हैं कि बूथों पर युवाओं और महिलाओं की संख्या ज्यादा नजर आती है और बुजुर्गों और की संख्या थोड़ी कम है.
दोनों ही पक्षों में खुशफहमी का ये है कारण
अब  इस स्थिति में सत्ता पक्ष एनडीए को महिला मतदाताओं की बड़ी संख्या खुश कर रहा है तो विरोधी महागठबंधन को युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या उम्मीद परवान चढ़ा रहे हैं. दरअसल दोनों ही पक्ष अपने हिसाब से दो मुद्दे- रोजगार और शराबबंदी केंद्रीय मुद्दा मानते हुए अपने तर्क दे रहे हैं. यह सच है कि शराबबंदी से जहां गरीब तबके की महिलाओं को राहत मिली है, वहीं हकीकत यह भी है कि यह पुलिस और शराब माफियाओं के गठजोड़ के कारण परेशानी का सबब भी है.


चुनाव के केंद्र में दो मुद्दे सबसे अधिक हावी

इसी तरह महागठबंधन ने 10 लाख सरकारी नौकरी और भाजपा ने 19 लाख रोजगार का वादा किया है. वहीं, जदयू ने सरकारी रिक्तियों को प्राथमिकता के स्तर पर भरने का भरोसा किया है जबकि कांग्रेस ने अलग से साढ़े तीन लाख लोगों को काम देने का वचन दिया है. कुल मिलाकर बेरोजगारी मुद्दा केंद्र में तो जरूर है, लेकिन बिजली, सड़क जैसे मुद्दे भी लोगों को प्रभावित कर रहे हैं.


दूसरे चरण की वोटिंग तय करेंगे चुनाव नतीजे

बहरहाल यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि पहले चरण के मतदान की प्रवृति को देखते हुए राजनीतिक दल बाकी के दो चरणों में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करें.  दूसरे चरण का मतदान तीन और अंतिम चरण का सात नवम्बर को है. अब तीन चरणों में हो रहे इस बार के चुनाव में निगाहें दूसरे चरण की 94 सीटों पर लगी हुई हैं.


सबसे बड़ा सवाल- क्या होगा इस बार?

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि जिस तरह किसी भी टफ फाइट वाले क्रिकेट मैच में सेंकेड लास्ट ओवर काफी हद तक जीत-हार तय करता है, उसी तरह दूसरे चरण के मतदान का रुझान यह बता देगा कि बिहार में बदलाव की बयार बह रही है या फिर जनता फिलहाल परिवर्तन के मूड में नहीं है.
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