बिहार चुनाव: सियासत में 'धूमकेतु' की तरह उभरीं पुष्पम प्रिया की चमक का क्यों है इंतजार?

पुष्पम प्रिया चौधरी. फोटो- साभार- ट्विटर
पुष्पम प्रिया चौधरी. फोटो- साभार- ट्विटर

पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र (Bankipur Assembly Constituency of Patna) में पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam Priya Chaudhary) अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे भाजपा नेता व इसी सीट से वर्तमान विधायक नितिन नवीन (Nitin Naveen) के मुकाबले खड़ी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 3, 2020, 10:32 PM IST
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पटना. सौरमंडल में धूमकेतु (Comet) तो हजारों हैं जिसे हम अक्सर पुछल्ल तारा कहते हैं. लेकिन, इसी में  हैली एक ऐसा तारा (धूमकेतु) है जो 75-76 वर्षों के अंतराल में पृथ्वी से देखा जा सकता है. एक सामान्य व्यक्ति अपने जीवन में इसे दो बार ही देख सकता है, लेकिन जितने ही पल वह दिखता है वह बेहद चमकदार और अत्यधिक दर्शनीय होता है. बिहार के सियासी आसमान में भी एक धूमकेतु आजकल चमक रहा है जिसे लोग पुष्पम प्रिया चौधरी (Pushpam Priya Chaudhary) के नाम से जानते हैं. पटना के बांकीपुर और मधुबनी के बिस्फी विधानसभा क्षेत्र ( Bankipur in Patna and Bisfi constituency in Madhubani ) से चुनाव लड़ने मैदान में उतरीं पुष्पम प्रिया चौधरी कौतूहल का विषय बनी हुई हैं.

पुष्पम पढ़े-लिखे लोगों, नौजवानों और गरीब तबके के लोगों से बिहार को बदलने के लिए वोट मांग रही हैं. सियासी जमीन पर तो फिलहाल यही चर्चा है कि सूबे की सियासत में धूमकेतु की तरह उभरीं नए दौर की सियासत में अपनी चमक जरूर बिखेरेंगी. लेकिन सवाल यह है कि क्या विचारधारा और जाति के आधार पर विभाजित लोग उनकी तरफ मुड़ भी रहे हैं या नहीं?

मधुबनी के बिस्फी के अलावा पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में पुष्पम प्रिया अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे भाजपा नेता व इसी सीट से वर्तमान विधायक नितिन नवीन के मुकाबले खड़ी हैं. दूसरे दौर के चुनाव में यहां वोटिंग भी हो चुकी है. पुष्पम हेल्थ रिफॉर्म, एजुकेशन रिफॉर्म और आठ डेवलपमेंट जोन के एजेंडे पर चुनाव लड़ रही हैं. पटना के बुद्धिजीवी वर्ग में पुष्पम को लेकर उत्सुकता तो है, लेकिन पुष्पम किसी बड़े उलटफेर की स्थिति में हैं या नहीं यह तो 10 नवंबर को चुनाव नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा.




बांकीपुर में पुष्पम की एंट्री के साथ ही एक बड़ा तथ्य यह है कि ये सीट भाजपा का गढ़ है. यहां से नितिन नवीन बांकीपुर सीट पर तीन बार चुनाव जीत चुके हैं. सबसे खास बात यह है कि वे हर बार पहले से अधिक वोटों से जीतते रहे हैं. मतों की संख्या की अगर बात करें तो अभी तक भाजपा के सामने कोई विपक्षी दल टिक नहीं पाया है. 2015 में जब लालू-नीतीश एक साथ थे तब भी नितिन नवीन करीब चालीस हजार वोटों से जीते थे.

इससे पहले 2010 में नितिन नवीन करीब साठ हजार वोट से जीते थे. 2010 में तो राजद की तरफ से लालू यादव के निजी सचिव रहे विनोद कुमार श्रीवास्तव ने चुनाव लड़ा था. बांकीपुर में कायस्थ मतदाताओं की निर्णायक संख्या है. इसी सोच के साथ विनोद श्रीवास्तव इस सीट पर चुनाव लड़ने आये थे. उनके साथ लालू यादव का नाम जुड़ा था इसके बाद भी उन्हें केवल 17 हजार 931 वोट ही मिले थे.

गौरतलब है कि नितिन नवीन भी कायस्थ जाति से आते हैं. चुनाव के नतीजे भी बताते हैं कि कि इस जाति के वोटर पूरी तरह से नितिन नवीन के साथ हैं. दूसरा बड़ा पहलू यह भी है कि कायस्थ वोटर जाति से अधिक भाजपा के प्रति निष्ठावान माने जाते हैं और किसी दूसरी पार्टी का स्वजातीय उम्मीदवार इन्हें लुभा नहीं पाता. दूसरी ओर नितिन नवीन को जनता का नेता माना जाता है.. 2019 में जब पटना में बाढ़ की स्थिति थी तब नितिन नवीन लोगों के बीच सक्रिय रहे.

2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार लव सिन्हा से पहली बार नितिन नवीन को चुनौती मिल रही है. पिता शत्रुघ्न सिन्हा, मां पूनम सिन्हा और भाई कुश सिन्हा के प्रचार से लव सिन्हा के लिए कुछ माहौल बना है. चुनाव प्रचार के दौरान मिले फीडबैक के आधार पर ये माना जा रहा है कि इस बार बांकीपुर में एकतरफा लड़ाई नहीं होगी.

वरिष्ठ पत्रकार अशोक शर्मा कहते हैं कि जाति-जमात की राजनीति से इतर बात करें तो पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार की सियासत में उस धूमकेतु की तरह उभरी हैं जो स्थायी तौर पर चमकते रहना चाहती हैं. उनके विचार, विजन और उद्देश्य भी क्लीयर लगते हैं. जीत-हार के विमर्श से बाहर पुष्पम ने बिहार में विकास के नये मॉडल पर एक बहस तो जरूर छेड़ दी है. बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि विचारधारा और जाति जमात में बंटी राजनीति के बीच धूमकेतु बनकर उभरीं पुष्पम प्रिया चौधरी कितना चमक पाती हैं.
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