Bihar Assembly Elections: ...तो क्या नीतीश के कैंडिडेट को हराएंगे चिराग पासवान?
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Bihar Assembly Elections: ...तो क्या नीतीश के कैंडिडेट को हराएंगे चिराग पासवान?
पिछले कुछ समय में एनडीए के घटक दलों लोक जनशक्ति पार्टी और जनता दल युनाइटेड के रिश्तों में तल्खी आई है (फाइल फोटो)

LJP संसदीय बोर्ड को चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने कहा कि पार्टी बिहार चुनाव (Bihar Election) को लेकर अगले हफ्ते पार्टी के सांसदों के साथ फिर से बैठक करेगी. इसके बाद पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगे कोई निर्णय लिया जाएगा.

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  • Last Updated: September 8, 2020, 11:38 AM IST
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पटना. बिहार की राजनीति के लिहाज से वर्तमान में दो बड़े प्रश्न सबसे ज्यादा अहम हैं. पहला ये कि क्या चिराग पासवान (Chirag Paswan) की लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) एनडीए का हिस्सा रहेगी अथवा नहीं? दूसरा ये कि क्या लोजपा एनडीए (NDA) में रहकर ही जेडीयू (JDU) के प्रत्याशियों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारेगी? दरअसल, ये दोनों ही सवाल इसलिए उभरकर सामने आ रहे हैं क्‍योंकि एलजेपी और जेडीयू में तल्खी काफी बढ़ गई है. खासकर जीतन राम मांझी के एनडीए में शामिल होने और उनका चिराग पासवान पर लगातार बयान देने के बाद दोनों ही पार्टियों के नेताओं के बीच भी तीखे बयानों का सिलसिला लगातार जारी है. अब चर्चा है कि लोजपा बिहार के 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर सकती है. दूसरी चर्चा ये भी है कि अगर कहीं विपरीत हालात बने तो चिराग एनडीए छोड़ने का भी ऐलान कर सकते हैं.

दरअसल, सोमवार को चिराग पासवान की अध्यक्षता में लोजपा के बिहार संसदीय दल की बैठक में अधिकतर सदस्यों की राय थी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव नहीं लड़ना चाहिए, क्योंकि लॉकडाउन और बाढ़ से नीतीश कुमार की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है. बैठक में यह प्रस्ताव भी पारित हुआ कि लोजपा 143 सीट पर प्रत्याशियों की सूची तैयार कर जल्द से जल्द केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेज देगी. साथ ही बिहार में गठबंधन के बारे में अंतिम फैसला लेने का अधिकार भी बिहार संसदीय बोर्ड ने चिराग पासवान को सौंप दिया.

दूसरी तरफ, लोजपा के सूत्रों का कहना है कि जिन 143 सीट पर अपने उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है, यह सभी सीट वे हैं, जिनपर भाजपा चुनाव नहीं लड़ेगी. इस तथ्य के आधार पर ही राजनीतिक जानकार कहते हैं कि चिराग पासवान सीएम नीतीश से अदावत तो दिखा रहे हैं, पर फिलहाल एनडीए छोड़ने का रिस्क नहीं उठाएंगे. इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि अभी केंद्र में 4 साल एनडीए की सरकार रहेगी. ऐसे में वह कोई ऐसा फैसला नहीं करेंगे कि लोजपा केंद्र की राजनीति से बाहर हो जाए और उनके पिता रामविलास पासवान को केंद्रीय मंत्री का पद गंवाना पड़े.



इसके पीछे वजह ये भी है कि चिराग बार-बार यही कह रहे हैं कि उनका गठबधंन बीजेपी के साथ है न कि जेडीयू के साथ. यानी लोजपा बीजेपी के साथ रहेगी ही रहेगी. दूसरी ओर जेडीयू के नेता भी अक्सर यही बात कह रहे हैं कि उनका गठबंधन तो बीजेपी के साथ है न कि एलजेपी के साथ. जेडीयू की ओर से ऐसा कहने के पीछे वजह ये भी है फिलहाल विधानसभा में महज दो सीटों वाली एलजेपी के बिहार में नीतीश कुमार की सत्ता के लिए किसी भी तरह से खतरा उत्पन्न नहीं कर सकते हैं. वहीं, बीजेपी कई बार यह भी कह चुकी है कि एनडीए नीतीश के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगा.
अब सवाल उठता है कि आखिर चिराग पासवान सीएम नीतीश और बिहार सरकार को लगातार निशाने पर क्यों ले रहे हैं? वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि चिराग पासवान दबाव की राजनीति कर रहे हैं, क्योंकि उनकी मंशा लोजपा के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने की है. अगर एलजेपी को विधानसभा में 40 से अधिक सीटें मिल गईं तो वह एनडीए में ही बने रहेंगे.

इस बीच बिहार बीजेपी ने एक बार फिर दोहराया है कि एनडीए में पूरी एकजुटता है. BJP MLC सम्राट चौधरी ने कहा कि NDA पूरी तरह से इन्टेक्ट है और हम सभी लोग मिलकर चुनाव लड़ेंगे और जीत हासिल कर अगली सरकार बनायेंगे. फिलहाल सीट शेयरिंग पर वरिष्ठ नेता विचार कर रहे हैं और अंतिम निर्णय होना बाकी है. वहीं JDU नेता राजीव रंजन ने कहा कि एलजेपी कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है. उनकी अपनी पार्टी है और हम लोगों को इससे कोई मतलब नहीं.
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