बिहार चुनाव: पोस्टर में CM नीतीश की तारीफ क्यों कर रहे हैं PM मोदी? जानें इनसाइड स्टोरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की नीतीश कुमार की तारीफ तो बिहार में लगे नए पोस्टर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की नीतीश कुमार की तारीफ तो बिहार में लगे नए पोस्टर

कोसी रेल महासेतु के उद्घाटन के दौरान बीते 18 सितंबर को पीएम मोदी (Narendra Modi) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जमकर तारीफ करते हुए कहा था कि अगर नीतीश जी जैसे सहयोगी हों तो कुछ भी संभव है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 22, 2020, 3:38 PM IST
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पटना. वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) 7 चरणों में हुआ था. इसके चुनाव प्रचार को अगर याद करेंगे तो एक बात साफ तौर पर दिखेगी कि लोकसभा चुनाव के पहले दो चरण के मतदान के दौरान बिहार के सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) अपने अधिकतर भाषणों में खुद के किए कार्यों को ही गिनाते थे. इसके बाद के सभी चरणों में सीएम नीतीश, पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नाम पर वोटिंग की अपील करने लगे. वे अक्सर अपनी सभाओं में जनता से ये पूछते देखे जाते थे कि - नरेंद्र मोदी को पीएम बनाएंगे न! जनता से आवाज आती कि हां. एक बार फिर बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Legislative Assembly Election) में भी कुछ ऐसे ही राजनीतिक हालात के संकेत मिल रहे हैं.

दरअसल, कोसी रेल महासेतु के उद्घाटन के दौरान बीते 18 सितंबर को पीएम मोदी (Narendra Modi) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की जमकर तारीफ करते हुए कहा था कि अगर नीतीश जी जैसे सहयोगी हों तो कुछ भी संभव है. इसके बाद राजधानी पटना में पीएम की इसी तारीफ के साथ नए पोस्टर लगे, जिसमें नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की तस्वीरें लगीं. इसमें पीएम मोदी के उसी वक्तव्य को मोटे अक्षरों में लिखा गया जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि आधुनिक बिहार को गढ़ने में नीतीश जी की अहम भूमिका है. नीतीश जी जैसे सहयोगी हों तो कुछ भी संभव है.

पटना की सड़कों पर CM नीतीश के साथ PM मोदी के पोस्टर लगाए गए.




राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह सिर्फ पीएम मोदी द्वारा सीएम नीतीश की काबिलियत की तारीफ का पोस्टर भर नहीं है, बल्कि जेडीयू की ओर से सीएम नीतीश कुमार को लेकर स्ट्रेटेजिक चेंज भी है. दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार की राजनीति में दो चीजें स्पष्ट हैं. पहला दो ध्रुवीय संघर्ष, जिसमें एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है. दूसरा तेजस्वी यादव का अत्यधिक मुखर होना और सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा जाना. इसमें चिराग पासवान द्वारा भी सीएम नीतीश को निशाना बनाया जाना एक पहलू है.
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि राजनीतिक शैली में 'चेंज', या यूं कहें कि सीएम नीतीश की राजनीतिक शैली में एक बड़ा 'शिफ्ट' बस यूं ही नहीं है. दरअसल, कुछ हद तक उन्हें भी जमीनी हालात के बारे में खबर है और वह राजनीति के मिजाज से ही अपनी रणनीति बनाते हैं. पहले जीतन राम मांझी को अपने साथ लाकर दलितों के नाम पर हो रही सियासत को थाम लिया, वहीं इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले की जांच सीबीआई को हवाले कर तेजस्वी के सवर्ण सियासत को भेदने के सियासी दांव को फेल कर दिया.

रवि उपाध्याय कहते हैं कि सीएम नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों के ही सियासी हित से बिहार विधानसभा का चुनाव जुड़ा है. ऐसे में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू पीएम मोदी के चेहरे के साथ सीएम नीतीश की छवि को जोड़ रही है. शायद आने वाले चुनाव में पीएम मोदी की छवि इतनी भारी पड़ जाए कि सीएम नीतीश कुमार के प्रति एंटी इनकंबेंसी की बातें चुनावी मैदान में कमजोर साबित हो जाए. ऐसे भी भाजपा के हाल के इंटरनल सर्वे में ये बात सामने आई है कि नीतीश के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी है. हालांकि, कई राजनीतिक जानकार इसे कुछ अन्य पहलू से भी जोड़ते हैं.

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक प्रेम कुमार कहते हैं कि जिस तरह से तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश के सामने खुद को मजबूत तरीके से खड़ा किया है ऐसे में बिहार की राजनीतिक लड़ाई दो ध्रुवीय हो गई है. यही नहीं जिस तरह से तेजस्वी ने यादव- मुस्लिम समीकरण में निषाद, कुशवाहा और महादलित जातियों को जोड़ने की रणनीति अपनाई ये सीएम नीतीश की राजनीति को टक्कर देने के लिए ही है. इसलिए सीएम नीतीश ने शुरू में विकास कार्यों को बताने की कोशिश जरूर की, लेकिन जिस तरह से महागठबंधन ने जातिगत समीकरण बनाए हैं वह नीतीश के इस रणनीतिक शिफ्ट का बड़ा कारण है.

प्रेम कुमार कहते हैं कि सियासी जमीन पर सामाजिक समीकरण के अलावा एक बड़ा फैक्टर परसेप्शन भी होता है. बिहार में अंदरुनी तौर पर राजस्थान जैसी स्थिति बन रही है, जिसमें ये कहा गया था कि - 'मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुधरा तेरी खैर नहीं'. ठीक इसी तर्ज पर बिहार में भी ये कहा जाने लगा है,- 'मोदी तुझसे बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं.' ऐसे में नीतीश कुमार के लिए बिहार की संवेदनशील सियासी जमीन (जातीय आधार पर) पर चुनाव जीतने के लिए फिलहाल अनुकूल माहौल नहीं लगता है.

modi nitish
पीएम मोदी द्वारा खुद की तारीफ वाले पोस्टर लगवाकर सीएम नीतीश कुमार ने संकेत दिए हैं कि उन्होंने अपनी चुनावी रणनीति बदल ली है. (फाइल फोटो)


प्रेम कुमार कहते हैं कि ऐसे भी बिहार में तीन ध्रुवीय चुनाव होने पर (यानी जेडीयू, बीजेपी और आरजेडी) अकेले चुनाव मैदान में जाने पर पर अब बीजेपी का पलड़ा अधिक भारी लगता है. ऐसे में सीएम नीतीश को पीएम मोदी के चेहरे के परसेप्शन के साथ ही बीजेपी के सामाजिक समीकरण को भी एड्रेस करना है. ऐसे में सीएम नीतीश की सही रणनीति मानी जा सकती है कि वह पीएम मोदी के आसरे ही अपनी चुनावी नैया आगे बढ़ाएं.

वहीं, रवि उपाध्याय कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेहद गूढ़ राजनीतिज्ञ होने के साथ ही मंझे हुए रणनीतिकार भी हैं. उन्होंने जमीन की परिस्थितियों को जल्दी ही भांप लिया. दरअसल, वह यह समझ गए कि बिहार की अधिसंख्य जनता का मूड उनके नाम पर सकारात्मक नहीं है, वहीं बिहार के लोग अभी भी पीएम मोदी को लेकर पॉजिटिव हैं. ऐसे में क्यों न पीएम मोदी के फेस को ही तवज्जो दी जाए, लेकिन खुद की पीठ थपथपाते हुए.
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