इस बार भी धन और बाहुबल से अछूता नहीं है बिहार का चुनाव, जानें टिकट पाने वाले बाहुबलियों का रिकॉर्ड

बिहार का चुनाव इस बार भी धन और बाहुबल से अछूता नहीं है
बिहार का चुनाव इस बार भी धन और बाहुबल से अछूता नहीं है

बिहार में होने वाले विधानसभा के चुनाव (Bihar Election 2020) में जिन बाहुबलियों या उनके परिवार के लोगों को टिकट मिला है, उनमें अनंत सिंह, सुनील पांडेय, अमरेन्द्र पांडेय, रामा सिंह, आनंद मोहन जैसे चेहरे शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 13, 2020, 11:10 AM IST
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सुमित झा

पटना. बिहार यूं तो गरीब राज्य है. यहां के 33.7 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रहे हैं, लेकिन जब बात बिहार के नेताओं और चुनाव (Bihar Election) की आती है तो सिर्फ अमीरी ही अमीरी नजर आती है. मौजूदा विधायकों में 160 विधायक (MLA) यानी 67 प्रतिशत विधायक करोड़पति हैं. यही धनबल इनके चुनाव जीतने के काम आता है. अगर धनबल में बाहुबल जुड़ जाए तो सोने पे सुहागा हो जाता है. उसूलों और राजनीतिक सुचिता की दुहाई देने वाली सियासी पार्टियां भी इन्हें हाथों हाथ लेती हैं. आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे ही धनबलियों और बाहुबलियों (Bahubali) की कहानी. धनबलियों की श्रेणी में बिहार के इन राजनेताओं का नाम आता है.

नाम- पूनम देवी यादव
खगड़िया से विधायक और जेडीयू उम्मीदवार
कुल संपत्ति- 41 करोड़ 34 लाख रुपए


पति रणवीर यादव नरसंहार मामले में सज़ायाफ्ता

नाम- अजीत शर्मा
भागलपुर से विधायक और कांग्रेस उम्मीदवार
कुल संपत्ति- 40 करोड़ 57 लाख रुपए

नाम- अनंत सिंह
मोकामा से निर्दलीय विधायक और आरजेडी उम्मीदवार
कुल संपत्ति- 28 करोड़ रुपए
हत्या, अपहरण समेत कई आपराधिक मामले दर्ज

धनबल और बाहुबल का सहारा नहीं लेने के सियासी पार्टियों के दावों को मुंह चिढ़ाते ये वो तीन चेहरे हैं, जो मौजूदा 243 विधायकों में सबसे अमीर की लिस्ट में टॉप थ्री में हैं. इनमें सबसे ऊपर खगड़िया से जेडीयू की विधायक और इस बार के उम्मीदवार पूनम देवी यादव हैं वहीं दूसरे नंबर पर भागलपुर से कांग्रेस विधायक और उम्मीदवार अजीत शर्मा हैं, तो तीसरे नंबर पर मोकामा से निर्दलीय विधायक और इस बार के आरजेडी उम्मीदवार अनंत सिंह हैं. सिर्फ इन तीनों विधायकों की संपत्ति मिला दें, तो आंकड़ा 100 करोड़ हो जाता है. इनमें धनबल के साथ बाहुबल वाले अनंत सिंह पर हत्या, अपहरण समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो खगड़िया से जेडीयू विधायक पूनम देवी यादव के पति रणवीर यादव नरसंहार मामले में सज़ायाफ्ता है. टिकट बांटते वक्त बिहार के सभी दल धन और बल का सहारा जरूर लेते हैं, इनमें आरजेडी सबसे आगे है जिसने इस बार के चुनाव में भी दागी और बाहुबलियों या उनकी पत्नी को टिकट थमाया है.

नाम- अनंत सिंह
मोकामा से निर्दलीय विधायक
दाग- हत्या, अपहरण जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज
मोकामा से मिला आरजेडी का टिकट
पत्नी ने भी किया निर्दलीय नामांकन

नाम- राजवल्लभ यादव
नवादा से आरजेडी के पूर्व विधायक
दाग- नाबालिग से रेप मामले में सज़ायाफ्ता
पत्नी विभा देवी को मिला आरजेडी का टिकट

नाम- अरुण यादव
संदेश से आरजेडी के विधायक
दाग- नाबालिग से रेप का आरोपी, फरार
पत्नी किरण देवी को मिला आरजेडी का टिकट

नाम- रामा सिंह
वैशाली से पूर्व सांसद
दाग- हत्या और अपहरण के आरोपी
रघुवंश बाबू के विरोध के बावजूद आरजेडी में एंट्री
पत्नी को मिला महनार सीट से आरजेडी का टिकट

नाम- आनंद मोहन
शिवहर से पूर्व सांसद
दाग- डीएम जी कृष्णैया हत्याकांड में सज़ायाफ्ता
पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद आरजेडी में शामिल
बेटे चेतन आनंद को मिला शिवहर सीट से टिकट
लवली आनंद को सहरसा से आरजेडी का टिकट

राजनीतिक सुचिता का दावा करने वाली जेडीयू भी धनबल और बाहुबल के मामले में पीछे नहीं है. इस बार भी बाहुबलियों और दागियों को टिकट देकर जेडीयू ने बता दिया कि इस मामले में वो भी बाकी से अलग नहीं है.

नाम- रणवीर यादव
खगड़िया से पूर्व विधायक
दाग- नरसंहार मामले में सजायाफ्ता, रंगदारी, हत्या की कोशिश का आरोप
पत्नी पूनम यादव 2005, 2010, 2015 में खगड़िया से जेडीयू विधायक
इस बार भी खगड़िया से पूनम देवी को मिला जेडीयू का टिकट

नाम- अमरेंद्र कुमार पांडेय
कुचायकोट से जेडीयू विधायक
दाग- गोपालगंज ट्रिपल मर्डर केस में आरोपी
इस बार भी कुचायकोट से मिला है जेडीयू का टिकट

नाम- मंजू वर्मा
चेरिया बरियारपुर से विधायक और पूर्व मंत्री
दाग- मंत्री रहते हुए हुआ मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड
आर्म्स एक्ट के मामले में जमानत पर हैं बाहर
चेरिया बरियारपुर से फिर मिला जेडीयू का टिकट

दरअसल, धनबल और बाहुबल को चुनाव जीतने की गारंटी माना जाता है. आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. उम्मीदवार अगर अपराधिक मामलों का आरोपी है तो उसके जीतने की संभावना 15 प्रतिशत होती है. साफ छवि का उम्मीदवार मैदान में उतरे तो जीतने की संभावना मात्र 5 प्रतिशत होती है. हाल ही में जारी इलेक्शन वाच और एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2005 से अब तक 10,785 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे. इनमें 30 प्रतिशत ऐसे थे, जिन्होंने खुद पर लगे आपराधिक आरोपों की घोषणा की. इन दागी लोगों में 20 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनके ऊपर गंभीर अपराध के आरोप हैं. जीत के बाद 820 सांसदों और विधायकों का विश्लेषण हुआ तो इनमें 57 प्रतिशत पर आपराधिक आरोप थे, जिनमें 36 प्रतिशत पर गंभीर अपराध के आरोप थे. यानी वही उम्मीदवार ज्यादा जीते जिनपर अपराधिक घटनाओं में लिप्त होने का आरोप है.

रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव जीतने के बाद इन धनकुबेरों की संपत्ति में और इजाफा होता चला जाता है. साल 2005 से अब तक सभी उम्मीदवारों के पास औसतन 1.09 करोड़ की संपत्ति थी. जीत के बाद औसत संपत्ति बढ़कर 2.25 करोड़ हो गई. चुनाव मैदान में उतरे स्नातक या उसके अधिक की शिक्षा लेने वालों में 33 प्रतिशत पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें 21 प्रतिशत शिक्षित उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामलों का आरोप है. कम शिक्षित यानी 12वीं तक की शिक्षा ग्रहण करने वाले उम्मीदवारों में 29 प्रतिशत ही आपराधिक घटनाओं के आरोपी हैं. गंभीर आपराधिक घटनाओं के आरोपी 20 प्रतिशत हैं.
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