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तेजस्वी के 'एकाधिकार' के बीच क्या कहती है तेजप्रताप की 'छटपटाहट'?

तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव
तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति में बीते कुछ दिनों से तेजप्रताप यादव जिस तरह से एक्टिव हुए हैं, इससे जाहिर हो गया है कि आरजेडी में कमान संभालने की खींचतान जोरों पर है. तेजस्वी के अज्ञातवास को लेकर सवाल ही सवाल हैं, वहीं मीसा भारती की चुप्पी पर भी बड़ा प्रश्‍नचिह्न है.

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बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजप्रताप यादव लालू-राबड़ी मोर्चे के बाद अब तेज सेना का गठन करने जा रहे हैं. तेजप्रताप 28 जून को 'तेज सेना' नाम का संगठन लांच करेंगे. उन्होंने युवाओं से अपनी सेना में शामिल होने की अपील की है. दरअसल, कभी बदलाव यात्रा, कभी लालू-राबड़ी मोर्चा तो कभी तेज सेना के नाम पर तेजप्रताप खुद को आरजेडी की मेन स्ट्रीम राजनीति में स्थापित करने की कोशिश करते रहे हैं. सवाल यह कि जब लालू यादव ने एक तरह से तेजस्वी यादव को विरासत सौंप दी है, तो फिर यह किस तरह की छटपटाहट है?

तेजस्वी के अज्ञातवास पर सवाल ही सवाल
दरअसल, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति में बीते कुछ दिनों से तेजप्रताप यादव जिस तरह से एक्टिव हुए हैं इससे जाहिर हो गया है कि आरजेडी में कमान संभालने की खींचतान जोरों पर है. तेजस्वी के अज्ञातवास को लेकर सवाल ही सवाल हैं, वहीं मीसा भारती की चुप्पी भी प्रश्‍नचिह्न है.

विरासत के संघर्ष में किनारे पड़े तेजप्रताप और मीसा
माना जाता है कि जिस तेजी से तेजस्वी यादव ने पार्टी में अपना कद बढ़ाया, इससे बहन मीसा भारती और तेजप्रताप एक तरह से किनारे पड़ गए हैं. तेजप्रताप यादव, तेजस्वी यादव और मीसा भारती के बीच कुछ ऐसे ही वाकयों को देखा जाए तो तेजप्रताप की छटपटाहट साफ दिख जाती है.



जब मीसा ने कहा- रानी झांसी की तरह लड़ेंगे
बीते अक्टूबर में ही मीसा भारती को शायद इस बात की भनक लग गई थी कि भाई वीरेंद्र को पाटलिपुत्र से उतार कर उन्हें किनारे करने की कोशिश की जा रही है. इसीलिए उन्होंने तब तल्खी में कहा था, अगर कोई सामने से लड़ेगा तो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की तरह लड़ेंगे, लेकिन पीठ में कोई खंजर घोंपेगा तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे, चाहे वह पार्टी का कार्यकर्ता क्यों न हो.

जब तेजप्रताप यादव ने दिखाए तल्ख तेवर
तेजप्रताप ने ये बात समझ ली है कि मीसा भारती की तरह वह भी पार्टी और परिवार में किनारे हो चुके हैं. ऐसे में बीते 16 दिसंबर को जिस अंदाज में तेजप्रताप आरजेडी ऑफिस पहुंचे, मीटिंग ली और विरोधियों के खिलाफ हुंकार भरते हुए जंग का ऐलान किया, इससे ये संकेत साफ निकलकर आ रहा था कि तेजप्रताप पार्टी की कमान खुद लेना चाहते हैं.

बदलाव के बहाने RJD की कमान थामने की कवायद
बीते दिसंबर में जब तेजप्रताप यादव ने ये घोषणा की कि वो बिहार के सभी 40 लोकसभा क्षेत्रों में बदलाव यात्रा निकालेंगे तो सियासी गलियारों में इसे अलग नजरिये से देखा गया. माना जा रहा था कि वो पार्टी संगठन को मजबूत कर खुद उसकी कमान अपने हाथों में लेना चाहते हैं.

जब तेजस्वी के आगे बेबस और लाचार दिखे तेजप्रताप
13 मई को नालंदा की एक चुनावी सभा में तेजप्रताप ने तेजस्वी के सामने ही मंच पर कहा, 'हमेशा से हम व्याकुल रहे कि तेजस्वी जी के साथ (जो हमारे अर्जुन हैं) उनके कार्यक्रम में जाएं, लेकिन ये पहले ही हेलीकॉप्टर से उड़ जाते थे और हम रह जाते थे जमीन पर.'' तेजप्रताप के इस बयान से साफ है कि वह अपने छोटे भाई तेजस्वी के साथ हर वक्त साथ होना चाहते थे, लेकिन तेजस्वी ने तेजप्रताप से दूरी बना रखी थी.

जब तेजप्रताप ने कहा कि उनकी भूमिका सुझाव देने की
विरासत के संघर्ष में तेजस्वी अपने बड़े भाई पर तब ही भारी दिखने लगे थे जब 28 मार्च को तेजप्रताप ने छात्र राजद के संरक्षक पद से भी इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने से महज दो घंटे पहले तेज प्रताप यादव ने न्यूज 18 बताया था कि वह सिर्फ तेजस्वी को सुझाव देने की हैसियत रखते हैं न कि किसी निर्णायक भूमिका में हैं.

जब तेजप्रताप के लिए RJD दफ्तर में जड़ दिया गया ताला
दोनों भाइयों के बीच दूरी तब भी दिखी जब बीते 26 जनवरी को तेज प्रताप आरजेडी कार्यालय जा रहे थे तो मेन गेट पर ताला जड़ दिया गया था. हालांकि, तेज प्रताप ने इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन सियासी गलियारों में यही चर्चा थी कि ऐसा तेजस्वी यादव के कहने पर ही किया गया था.

तेजस्वी के एकाधिकार को चुनौती देने की कोशिश
दरअसल, तेजप्रताप को अपने ही कुनबे में बहुत भाव नहीं मिल रहा है. ये तब भी जाहिर हुआ था जब 3 जनवरी को पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र से बहन मीसा भारती के चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. तब तेजस्वी ने खुलकर मीडिया के सामने इसका विरोध किया और उन्हें अनुशासन की नसीहत तक दे डाली थी. ऐसे में तेजप्रताप की 'तेज सेना' बनाने की पहल भी तेजस्वी के एकाधिकार को चुनौती देने की एक कोशिश भर मानी जा रही है.

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