तेजस्वी यादव के अध्यक्ष बनने की राह में ये हैं 5 रोड़े! क्या रिस्क लेंगे लालू ?

सियासी गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी अपने पिता लालू यादव के कहने पर वापस आए हैं. दरअसल लालू ने आश्वासन दिया है कि इच्छा के मुताबिक़ उन्हें पार्टी में कोई न कोई महत्वपूर्ण पद संगठन के चुनाव के बाद दिया जाएगा.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 22, 2019, 4:24 PM IST
तेजस्वी यादव के अध्यक्ष बनने की राह में ये हैं 5 रोड़े! क्या रिस्क लेंगे लालू ?
लालू यादव की अनुपस्थिति में RJD का नेतृत्व संभाल रहे तेजस्वी यादव कई मोर्चों पर सवालों के घेरे में हैं.
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 22, 2019, 4:24 PM IST
राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janta Dal) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे बेटे और बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने एक बार फिर सक्रिय राजनीति में लौटने के संकेत दिए हैं. इसकी बानगी बुधवार को पटना में तब दिखी जब 40 वर्ष पुराने दूध मंडी पर को प्रशासन ने बुल्डोजर चलाया तो वे स्पॉट पर गए और धरना दे दिया. बड़े भाई तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने भी उनका साथ दिया और अपने समर्थकों को एक संदेश भी देने की कोशिश की. इस बीच उनकी पार्टी में ही उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) बनाने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है. हालांकि उन्होंने खुद इस मसले पर मीडिया के सामने कोई बात नहीं रखी है. फिर भी बिहार की राजनीति में इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि लालू यादव आरजेडी (RJD) की कमान तेजस्वी के हाथों में सौंप सकते हैं.

सियासी गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी अपने पिता लालू यादव के कहने पर वापस आए हैं. दरअसल लालू ने आश्वासन दिया है कि इच्छा के मुताबिक़ उन्हें पार्टी में कोई न कोई महत्वपूर्ण पद संगठन के चुनाव के बाद दिया जाएगा.

कई विधायकों ने की नेतृत्व देने की मांग
भाई वीरेंद्र जैसे कुछ वरिष्ठ नेता मांग करने लगे हैं कि तेजस्वी यादव को अगर पार्टी का भी नेतृत्व दिया जाता है तो इससे राज्य के युवाओं के बीच एक अच्छा संदेश जाएगा. इस मुद्दे पर वे अकेले नहीं हैं. उनके साथ बोधगया से निर्वाचित विधायक कुमार सरबजीत और जमुई से विधायक विजय प्रकाश भी इस मांग के समर्थन में हैं.

रोड़ा नंबर 1- पार्टी में 'एकाधिकार' चाहते हैं तेजस्वी!
हालांकि ये बात सत्य है कि बीते डेढ़ महीने से इस बात की चर्चा बिहार के राजनीतिक गलियारों में भी है कि तेजस्वी पार्टी में एकाधिकार चाहते हैं. परन्तु खबर यह भी है कि लालू यादव तेजस्वी को 'एकाधिकार' देने की बात पर सहमत नहीं हैं. दरअसल लालू यादव ही नहीं उनके अध्यक्ष बनने में परिवार और पार्टी के बीच कई रोड़े हैं.

Lalu Family dispute
तेजस्वी यादव को लालू यादव ने अपनी राजनीतिक विरासत सौंपी थी, लेकिन परिवार में इसपर मतभेद हैं.

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रोड़ा नंबर 2- पार्टी और परिवार में 'टूट' नहीं चाहेंगे लालू
लालू परिवार में सत्ता संघर्ष की बात सार्वजनिक है. बेटी मीसा भारती और तेज प्रताप यादव की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. वहीं पार्टी में कई वरिष्ठ नेता ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि तेजस्वी यादव ने लोक सभा चुनावों के बाद अपने आचरण से पार्टी के विधायक, कार्यकर्ता और नेताओं सभी को निराश ही किया है. ऐसे हालात में लालू यादव अगर तेजस्वी यादव को एकाधिकार देते हैं तो यह पार्टी के लिए हितकर नहीं भी हो सकता है.

रोड़ा नंबर 3- मीसा भारती की महत्वाकांक्षाएं
लालू यादव ने जब 2015 में विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राजनीतिक विरासत का बंटवारा किया था तो मीसा भारती को दिल्ली की जिम्मेदारी दी गई थी. यानी लोकसभा और राज्यसभा से संबंधित चीजों को वही देखेंगी. लेकिन, बीतते वक्त के साथ वो हाशिये पर जाती चली गईं और तेजस्वी पार्टी पर हावी होते चले गए. अब जब लोकसभा चुनाव में तेजस्वी के नेतृत्व में करारी शिकस्त होने के बाद अगर फिर लालू उन्हें ही फिर से बागडोर सौपेंगे तो हो सकता है कि राजनीतिक विरासत की जंग नए तेवर में हमारे सामने आ सकता है.

रोड़ा नंबर 4- तेज प्रताप यादव के तेवर भी कम नहीं
बुधवार को जब तेज प्रताप यादव भी दूध मंडी ढाए जाने के खिलाफ धरना में शामिल हुए और तेजस्वी के साथ बराबरी से बैठे, ऐसे में ये साफ है कि वे अपनी दावेदारी आसानी से नहीं छोड़ने जा रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने एक बार खुद को कृष्ण और तेजस्वी यादव को अर्जुन करार दिया. साफ है कि उनका संदेश स्पष्ट है कि वे अपने स्टैंड पर कायम हैं और राजनीतिक विरासत पाने के लिए वह भी बराबर के हिस्सेदार हैं.

तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव


रोड़ा नंबर 5- वरिष्ठ नेताओं को मनाना टेढ़ी खीर
आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी, रघुवंश प्रसाद सिंह और जगदाननंद सिंह जैसे कई नेता ये मानते हैं कि लालू यादव वाली बात किसी और में नहीं है. तेजस्वी में यह बात तो कदापि नहीं है. इन नेताओं का कहना है कि भले ही लालू यादव से इमोशनल ब्लैकमेल कर कोई भी पद तेजस्वी यादव हासिल कर लें लेकिन सच्चाई यही है कि अब भी वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दूर दूर तक विकल्प नहीं दिखता.  ऐसे में लालू यादव तेजस्वी को एकाधिकार देने का जोखिम लेंगे, ऐसा नहीं लगता.

आड़े आ रही तेजस्वी की अनुभवहीनता
लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद जिस तरह से तेजस्वी यादव ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया. इसके बाद पार्टी के कई महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं हुए. बीते दो महीने से बाढ़ में लोगों को देखने ना आए. चमकी बुखार जैसी महामारी के समय दिल्ली में घूमता रहे. ऐसे में जानकार कहते हैं कि तेजस्वी यादव से सोशल मीडिया पर तो राजनीति हो सकती है, लेकिन जमीन पर नहीं.

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First published: August 22, 2019, 1:13 PM IST
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