OPINION: अमित शाह की वर्चुअल रैली से बिहार में चुनावी मोड में आई BJP! विरोधियों के पास डिजिटल तैयारी का क्या है जवाब?
Patna News in Hindi

OPINION: अमित शाह की वर्चुअल रैली से बिहार में चुनावी मोड में आई BJP! विरोधियों के पास डिजिटल तैयारी का क्या है जवाब?
दिल्ली में बीजेपी हेडक्वार्टर से वर्चुअल रैली करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के लोगों को संबोधित किया था (फोटो: ANI)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपनी वर्चुअल रैली में लोगों को एक बार फिर लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav) और उनकी पार्टी आरजेडी पर प्रहार कर लालटेन युग की याद दिलाई. उनकी बातों और भाषण से साफ लग रहा था कि निशाने पर बिहार (Bihar) की मुख्य विरोधी आरजेडी ही है

  • Share this:
नई दिल्ली. बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने सात जून को वर्चुअल रैली के माध्यम से बिहार (Bihar) में पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर नई जान फूंकने की कोशिश की. कोरोना महामारी (COVID-19) के चलते लॉकडाउन में जिस तरह से पार्टी के नेता से लेकर कार्यकर्ता तक अपने-अपने गांवों और शहरों में फंसे रहने पर मजबूर हो गए थे, उससे राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह से विराम लग गया था. हालांकि बीच-बीच में सांसदों, विधायकों और पार्टी के दूसरे कार्यकर्ताओं के साथ केंद्रीय नेतृत्व ने कई बार डिजिटल संवाद स्थापित कर कई मुद्दों पर चर्चा की थी. लेकिन, लॉकडाउन (Lockdown) ने बिहार की दूसरी पार्टियों की तरह ही बीजेपी की चुनावी तैयारियों पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया था.

अब जबकि अनलॉक करने की प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है, तो हाईटेक बीजेपी कहां पीछे रहने वाली है. जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से अपनी पहली डिजिटल रैली के जरिए दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय से ही बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारी को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया. यह अलग बात है कि बीजेपी की तरफ से इसे चुनाव से जोड़कर नहीं देखने की बात कही जा रही है, क्योंकि इस तरह का कार्यक्रम सरकार के दूसरे मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता दूसरे प्रदेशों के लोगों के साथ भी कर रहे हैं. लेकिन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में जिस अंदाज में कोरोना काल में बिहार सरकार की उपलब्धियों और केंद्र की तरफ से दी जा रही मदद का जिक्र किया, उससे रैली से निकलने वाले संदेश का अंदाजा साफ-साफ लग रहा था.

बिहारवासियों को लालू यादव और लालटेन युग की याद दिलाई



अमित शाह ने एक बार फिर लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी आरजेडी पर प्रहार कर लालटेन युग की याद दिलाई. उनकी बातों और भाषण से साफ लग रहा था कि निशाने पर बिहार की मुख्य विरोधी आरजेडी ही है, जिसके शासनकाल की याद दिलाकर बीजेपी एक बार फिर यहां अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है. बिहार के प्रवासी लोगों के योगदान और उनके लिए सरकार की तरफ से किए गए कामों का जिक्र कर शाह की तरफ से उन्हें भी लुभाने की पूरी कोशिश की गई. वर्चुअल रैली में अमित शाह ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने औ दो-तिहाई बहुमत का दावा भी कर दिया.
बीजेपी की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रभारी संजय मयुख ने इस बात का दावा किया कि रैली में फेसबुक के माध्यम से 14 लाख से ज्यादा व्युअर जुड़े रहे. जबकि यूट्यूब से एक लाख 40 हजार से ज्यादा व्युअर रहे, ट्वीटर पर 66 हजार से ज्यादा ट्वीट हुए और अलग-अलग टीवी चैनलों के माध्यम से भी करोड़ों लोग जुड़े रहे, लिहाजा, करोड़ों लोगों ने अमित शाह की रैली को देखा और उससे जुड़े रहे.

अमित शाह की रैली के बाद जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बिहार के लोगों को डिजिटल रैली के माध्यम से संबोधित करेंगे. अमित शाह की सफल रैली के बाद बीजेपी अब प्रधानमंत्री की रैली को और बड़ा और भव्य बनाने की कोशिश करेगी. लेकिन, बड़ा सवाल यही है कि इस वक्त विपक्ष क्या कर रहा है? बीजेपी के इस हाइटेक चुनाव प्रचार और कुशल प्रबंधन के सामने विपक्ष कितना टिक पाएगा. क्योंकि कोरोना महामारी से बचाव के इस दौर में सभी पार्टियों के चुनाव प्रचार का अंदाज कुछ ऐसा ही होगा और इस अंदाज में बीजेपी बाकी दलों पर प्रचार-प्रसार के मामले में भारी पड़ेगी.

जेडीयू और एलजेपी भी हैं तैयार

सात जून को अमित शाह की रैली के दिन ही जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के जिलाध्यक्षों और कार्यकर्ताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. जेडीयू भी इस कड़ी में पीछे नहीं रहना चाहती. दूसरी तरफ एनडीए की एक अन्य सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान की तरफ से लगातार दिल्ली के पार्टी कार्यालय से ही विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जरूरी निर्दश दिए जा रहे हैं. न्यूज़ 18 से बात करते हुए चिराग पासवान ने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 243 सीटों पर अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारी में लगी है. उनका दावा है कि अपनी पार्टी की सीटों के अलावा सहयोगी बीजेपी-जेडीयू को भी इससे फायदा होगा.

विपक्ष कितना तैयार है

लेकिन, विपक्षी खेमे में अभी उहापोह की स्थिति बनी हुई है. महागठबंधन में आरजेडी का अपना सुर है. आरजेडी तेजस्वी यादव की अगुआई में नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, लेकिन, सहयोगी कांग्रेस, आरएलएसपी, हम और वीआईपी पार्टी के साथ समन्वय का अभाव साफ दिख रहा है. आरजेडी चुनावी तैयारियों के मामले में अभी काफी पीछे दिख रही है. हां, यह जरूर है कि पार्टी की तरफ से थाली बजाकर या अपना विरोध दर्ज कराकर कानून-व्यवस्था से लेकर कोरोना संकट काल में सरकार की व्यवस्था पर उसे घेरने की पूरी कोशिश हो रही है.

आरजेडी की तरफ से फिलहाल राजनीति करने के बजाए गरीब-गुरबों की जान की परवाह करने की नसीहत दी जा रही है. अमित शाह की रैली पर पार्टी के सासंद और मुख्य प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, उनकी तरफ से कही गई बातें अर्धसत्य है या असत्य है. जब बिहार के श्रमिक अपमानित हो रहे थे, बिहार अपमानित हो रहा था, तो उनकी तरफ से एक शब्द नहीं कहा गया.

आरजेडी की सहयोगी कांग्रेस के सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह कहते हैं, अभी चुनाव की घोषणा तक नहीं हुई, बीजेपी रैली की तैयारियों में लग गई है. जबकि सड़कों पर मजदूरों की मौत हो रही है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है. हालाकि यह वही अखिलेश प्रसाद सिंह हैं जिन्होंने दो दिन पहले इस बार विधानसभा चुनाव में पिछली बार की तुलना में ज्यादा सीटों पर कांग्रेस की तरफ से दावा किया था.

विपक्ष डिजिटल चुनाव और वर्चुअल रैली पर सवाल खड़े कर रहा

उधर महागठबंधन की एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) की तरफ से भी डिजिटल चुनाव और वर्चुअल रैली के तरीके पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. न्यूज़ 18 से बात करते हुए आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद कहते हैं, केंद्र सरकार ने जिस अंदाज में अनलॉक करना शुरू किया है, उससे प्रतीत होता है कि सरकार ने मान लिया है कि कोरोना संकट खत्म हो गया है. जब सरकार ही ऐसा अनलॉक कर रही है, तो ऐसी स्थिति में पुराने तरीके से ही बिहार में चुनाव कराए जाएं. माधव आनंद ने कहा, डिजिटल रैली और वर्चुअल रैली ये सब हवा-हवाई बातें हैं. इस तरह की रैली के तरीके को देश और बिहार की जनता स्वीकार नहीं करेगी.

बता दें कि विपक्षी पार्टियों में अब तक न तो नेतृत्व के सवाल पर और न ही साथ लड़ने के मुद्दे पर कोई सहमति बन पा रही है. यही वजह है कि कभी जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी की अलग से बैठक होती है तो कभी कांग्रेस के साथ मिलकर यह नेता आरजेडी पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं. लेकिन, आरजेडी फिलहाल अकेले अपनी सियासी राह पर चल रही है.

विपक्ष की तैयारियों को देखकर लग रहा है कि डिजिटल चुनाव तो दूर की बात है, डिजिटल रैली और प्रचार-प्रसार को लेकर भी तैयारियों में विपक्षी दल काफी पीछे हैं. दरअसल, विपक्ष की कोशिश है कोरोना के वक्त राजनीति करने के बजाए प्रवासी मजदूरों और गरीबों की सहानुभूति बटोर कर इसका सियासी फायदा उठाया जाए. लेकिन, इस कोशिश में चुनाव प्रचार-प्रसार और रणनीति बनाने में विपक्ष कहीं पिछड़ न जाए?
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज