Bihar Assembly Election 2020: RJD को रोकने की जुगत में BJP-JDU, मनेर में मुकाबला होगा कड़ा

आरजेडी को रोकने के लिए बीजेपी और जेडीयू को कड़ी मेहनत करनी होगी.
आरजेडी को रोकने के लिए बीजेपी और जेडीयू को कड़ी मेहनत करनी होगी.

यादव वोटरों के दबदबे के साथ RJD इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने की कोशिश करेगी. वहीं बीजेपी और जेडीयू के सामने बड़ी समस्या इस सीट पर आरजेडी के विजय रथ को रोकने के लिए एक सही उम्मीदवार को उतारना होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 10:39 PM IST
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पटना. RJD की पक्की सीट के तौर पर देखी जाने वाले मनेर विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला जोरदार होने की उम्मीद है. पिछली तीन चुनवों से इस सीट पर कब्जा जमाए बैठी आरजेडी का विजय रथ रोकने की बड़ी चुनौती बीजेपी और जेडीयू के सामने होगी. मुकाबला काफी कठिन होगा और और इस सीट पर साफ तौर पर बीजेपी और जेडीयू की राजनीतिक समझ ही उन्हें पार लगा सकती है. कभी कांग्रेस की सीट के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले मनेर में अब कांग्रेस का कहीं भी नामोनिशां नहीं दिखता है.

16 बार हो चुके चुनाव
1952 से अब तक इस सीट पर तक 16 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. शुरुआत में कांग्रेस ने यहां पर बड़ी सफलता हासिल की. हालांकि 1990 के बाद से ही कांग्रेस यहां से गायब सी ही हो गई. 2005 में आरजेडी ने यहां पर अपना कब्जा जमाया जो अभी तक बरकरार है. आरजेडी के यहां पर अपना कब्जा बरकरार रखने का सबसे बड़ा कारण है यादव समुदाय के वोटरों का दबदबा होना. यहां तीन लाख वोटरों में से एक लाख वोटर यादव हैं. यादवों के बाद सवर्ण और महादलित वोटरों की संख्या अधिक है.

बीजेपी के सामने चुनौती
इस सीट को लेकर बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरजेडी के विजय रथ को रोकाना होगी. इसके लिए सवर्ण वोटरों को रिझाने के साथ ही जेडीयू और बीजेपी को महादलित वोटरों को भी टार्गेट करना होगा. इस सीट पर जातिगत समीकरण ही अहम रहेगा और पार्टियों को इसी हिसाब से रणनीति तैयार करनी होगी.



आरजेडी और जेडीयू थे साथ
2015 में हुए विधानसभा चुनावों में आरजेडी और जेडीयू साथ ही चुनाव लड़े थे. ऐसे में ये सीट आरजेडी के खाते में गई. आरजेडी से भाई वीरेंद्र यादव ने यहां पर जीत दर्ज की थी और बीजेपी के श्रीकांत निराला को करीब 30 हजार वोटा से करारी शिकस्त दी थी. वीरेंद्र यादव यहां पर 2005 से विधायक हैं और लगातार इस सीट पर अपना वर्चस्व उन्होंने कायम कर रखा है. हालांकि अब उनकी स्थित उतनी स्पष्ट नजर नहीं आ रही है और स्‍थानीय विरोध का सामना भी उन्हें करना पड़ रहा है.
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