Bihar Assembly Election 2020: क्या होगा तेजस्वी यादव का, NDA के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे या फंस जाएंगे?
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Bihar Assembly Election 2020: क्या होगा तेजस्वी यादव का, NDA के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे या फंस जाएंगे?
वर्ष 2015 की तुलना में इस बार आगामी विधानसभा चुनाव में 'बिहार के चाणक्य' माने जाने वाले नीतीश कुमार का साथ के बजाए उनकी उनसे सीधे टक्कर होगी

विपक्ष के बिखराव की तस्वीर ने तेजस्वी यादव के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या तेजस्वी आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान NDA की ओर से तैयार की जाने वाली चक्रव्यूह को भेद पायेंगे या फिर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और सुशील मोदी (Sushil Modi) के चक्रव्यूह में फंस जाएंगे

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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) की तारीखों का भले ही निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने अब तक ऐलान नहीं किया है लेकिन इसकी आहट से सियासी गतिविधियां तेज हो चुकी हैं. शह और मात का खेल शुरू हो चुका है. बात राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की करें तो NDA पूरी तरह इंटैक्ट दिख रहा है जबकि महागठबंधन में एकजुटता नहीं दिख रही. विपक्ष के बिखराव की तस्वीर ने तेजस्वी यादव के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. सवाल यह भी उठने लगा है कि क्या तेजस्वी आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान NDA की ओर से तैयार की जाने वाली चक्रव्यूह को भेद पायेंगे या फिर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और सुशील मोदी (Sushil Modi) के चक्रव्यूह में फंस जाएंगे.

यह सवाल आज बिहार के सियासी गलियारे में जोरों पर है. हालांकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के तेजस्वी यादव के करीबी विधायक शक्ति सिंह यादव का दावा है कि तेजस्वी में वो तेज है जो हर चक्रव्यूह को भेद देगा. तेजस्वी यादव के सामने किसी की नहीं चलेगी, सारे राजनीतिक चाणक्य धराशाई हो जाएंगे. शक्ति सिंह यादव के इस बयान पर बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद ने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी और उनके कुनबे के लोगों को जितने सपने देखने हैं, देख लें, इस बार उनको (चुनाव में) जमीनी हकीकत का पता चल जाएगा. क्योंकि इस बार वो चार्टर्ड प्लेन के जगह जमीन पर उतरे हैं

JDU भी तेजस्वी यादव को लेकर हमलावर  
बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री और जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के नेता नीरज कुमार कहते हैं कि बिहार की जनता अब आरजेडी के झांसे में आने वाली नहीं. जनता विकास के साथ खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी. नीतीश कुमार पर एक भी दाग नहीं है लेकिन तेजस्वी और उनके पूरे परिवार पर दाग की श्रृंखला है.
देखा जाए तो आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के सामने कई चुनौतियां होंगी. इनमें सबसे बड़ी चुनौती यह कि इस बार पार्टी के प्रमुख लालू प्रसाद यादव का साथ नहीं रहेगा. लालू न्यायिक सजा के तहत रांची के रिम्स में इलाजरत हैं. दूसरा यह कि वर्ष 2015 की तुलना में इस बार 'बिहार के चाणक्य' माने जाने वाले नीतीश कुमार का साथ के बजाए उनकी उनसे सीधे टक्कर होगी. तीसरा अपने नाराज सहयोगी दलों को फिर से अपने पाले में करना होगा. इन सब के अलावा अपने आपको और अपनी पार्टी को सोशल प्लेटफॉर्म पर मजबूत करना पड़ेगा तभी तेजस्वी नीतीश कुमार और सुशील मोदी की जोड़ी को तोड़ पाएंगे अन्यथा तेजस्वी को चुनाव बाद पांच साल फिर विपक्ष में बैठना पड़ेगा.
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