बिहार चुनाव 2020: कांग्रेस पर फिर लगा परिवारवाद का ठप्पा, कहीं बेटी तो कहीं भतीजे को मिला टिकट  

कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगा है. (सांकेतिक फोटो)
कांग्रेस पर बड़ा आरोप लगा है. (सांकेतिक फोटो)

Bihar Assembly Election 2020: बिहार विधानसभा चुनाव की हलचल के बीच एक बार फिर कांग्रेस (Congress) पर परिवारवाद का आरोप लगा है. पहले और दूसरे चरण में टिकट मिलने वाले ऐसे कई उम्मीदवार हैं जिनका ताल्लुक किसी बड़े चेहरे से हो.

  • Share this:
पटना. कांग्रेस (Congress) पार्टी पर हमेशा से परिवारवाद का आरोप लगते रहा है. इस बार 2020 विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) में भी कंग्रेस पार्टी अपने आप को परिवारवाद से ऊपर नहीं उठा पाई. दो चरण के लिए चयनित उम्मीदवारों पर परिवारवाद का साया साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. पहले चरण और दूसरे चरण के लिए जिन उम्मीदवारों को तय किया गया है उनमें कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके पिता या परिवार के अन्य सदस्य पार्टी में बड़े पद पर हैं.

मसलन, कहलगांव विधानसभा से सुभानंद मुकेश उम्मीदवार हैं जो कि सदानंद सिंह के पुत्र हैं, बांकीपुर से लव सिन्हा, सत्रुघन सिन्हा के पुत्र हैं, वजीरगंज से शशि शेखर जो वर्तमान विधायक अवधेश सिंह के पुत्र हैं, बिहारीगंज  से सुभाषिनी यादव जो कि शरद यादव की पुत्री हैं, लालगंज से राकेश कुमार उर्फ पप्पू सिंह यह निखिल कुमार के भतीजा हैं, गोपालगंज से आशिफ गफ्फूर हैं जो पूर्व सीएम अब्दुल गफ्फूर के पोता हैं, बेनीपुर से मिथलेश चौधरी है और यह कृति आज़ाद के साला हैं, पारू से अनुनय सिंह जो कि उषा सिन्हा पूर्व मंत्री भारत सरकार के पुत्र हैं और खगड़िया से छत्रपति यादव हैं इनके पिता भी बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं.

ये भी पढ़ें: नीतीश कुमार ने पिता का किया अपमान, 2019 के चुनाव में भी दिया था 'धोखा': चिराग पासवान




तो क्या इस बार भी चला परिवारवाद का सिक्का?

इन उम्मीदवारों के नाम देखते ही आप यह समझ गए होंगे कि किस तरीके से कांग्रेस पार्टी में टिकट बंटवारे में परिवारवाद का सिक्का चला है. हालांकि यह पहली बार नहीं है या सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही एक मात्र इकलौती ऐसी पार्टी नहीं है जहां परिवारवाद हो. कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी पार्टी में परिवारवाद का खेल सालों से चला आ रहा है. दूसरे पार्टियों में भी यही हाल है. कोई पार्टी अपने आप को परिवारवाद से ऊपर नहीं उठा सकी. यह आरोप आए दिन सभी दलों पर लगता रहा है, लेकिन जिस तरीके से कांग्रेस बिहार में अपनी जमीन तलाशने में जुटी है ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या परिवारवाद का सहारा लेकर कांग्रेस पार्टी अपना खोया हुए जनाधार को वापस पा सकती है .
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज