Bihar Assembly Election 2020: दानापुर में BJP का तोड़ना होगा रिकॉर्ड, RJD को दिखनी होगी मजबूती

बीजेपी की आशा देवी के लिए इस बार आरजेडी मुश्किलें खड़ी कर सकती है. (सांकेतिक तस्वीर)
बीजेपी की आशा देवी के लिए इस बार आरजेडी मुश्किलें खड़ी कर सकती है. (सांकेतिक तस्वीर)

दानापुर में BJP की राह इस समय मुश्किल भरी हो सकती है. कारण है जातिगत वोटों का गणित और यादव समुदाय के वोटरों की अधिकता. ये सभी समीकरण आरजेडी को फायदा दिलवा सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 8:46 PM IST
  • Share this:
पटना. पाटलीपुत्र लोकसभा क्षेत्र में आने वाली दानापुर विधानसभा सीट का गणित हमेशा ही भाजपा की तरफ जाता दिखा है. एक तरह से यह कहना गलत नहीं होगा कि ये भाजपा का गढ़ है. बीजेपी की आशा देवी ने इस सीट पर 2005 से लगातार जीत दर्ज की है. अब कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों या उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि आशा देवी के इस जीत के रिकॉर्ड को ब्रेक कैसे लगाया जाए. हमेशा ही यह देखने में आया है कि कांग्रेस और अन्य निर्दलीय उम्मीदवार दूसरे नंबर के लिए ही आपस में टकराते रहे हैं और आशा देवी को इसका खासा फायदा भी हुआ है. वहीं इतिहास की तरफ देखा जाए तो किसी समय में दानापुर की सीट कांग्रेस की पक्की सीट के तौर पर देखी जाती रही है.

हर पार्टी की रही है नजर
दानापुर में 1980 के दशक तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा लेकिन 1985 में जनता दल ने यहां पर अपनी जगह बनाई और फिर आरजेडी के आने के बाद ये सीट उनके खाते में चली गई. लालू प्रसाद यादव ने भी इस सीट पर कब्जा जमाया था लेकिन फिर 2005 में बीजेपी ने इस सीट को ऐसा कब्जाया कि तब से अब तक इस सीट पर कोई और पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं जीता सकी.

जातिगत समीकरण
दानापुर कहने को पटना से लगता हुआ इलाका है लेकिन विकास के नाम पर यहां हालात खस्ता हैं. ये एक अहम मुद्दा इन चुनावों में बन सकता है. यहां पर यादव और वैश्य समुदाय का बोलबाला है. इनके बाद यहां पर ज्यादा वोटर अगड़ी जातियों से हैं. इसी बात का फायदा बीजेपी को हमेशा होता रहा है. तीन लाख से ज्यादा वोटरों वाले दानापुर में 80 हजार यादव तो 60 हजार से ज्यादा अगड़ी जाति से वोटर हैं.



बीजेपी को करना पड़ा था मुकाबला
2015 के चुनावों की बात की जाए तो आरजेडी और जेडीयू के साथ ने बीजेपी की मुश्किलें थोड़ी बढ़ा दी थीं. दो बार विधायक रह चुकी आशा देवी जब 2015 में चुनावी मैदान में उतरीं तो उनके सामने राजद के राज किशोर यादव थे और वे यादवों के वोट साधने में काफी हद तक सफल रहे थे. नतीजा ये रहा कि आशा देवी ने जीत तो दर्ज की लेकन सिर्फ 6 हजार वोटों से. यदि समीकरण इस बार भी कुछ ऐसा रहा था आरजेडी को इसका काफी फायदा मिल सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज