जब नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने कहा- चुनाव प्रचार तो क्या इस इलाके से नहीं गुजरूंगा! 

वशिष्ठ नारायण सिंह ने नीतीश कुमार से जुड़ा एक किस्सा बताया.
वशिष्ठ नारायण सिंह ने नीतीश कुमार से जुड़ा एक किस्सा बताया.

वशिष्ठ नारायण सिंह बताते हैं कि 1995 में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने हरनौत से नामांकन भरा था, लेकिन समर्थकों से शर्त रखी थी कि वो एक दिन भी चुनाव प्रचार में नहीं जाएंगे. नीतीश कुमार का कहना था कि अगर मैंने काम किया है तो जनता जिताए, वोट मांगने क्यों जाऊं?

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पटना. तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को चुनौती दी है कि अगर हिम्मत है तो नालंदा के किसी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरें. मैं उनके मुकाबले चुनाव में उतरूंगा और उन्हें शिकस्त भी दूंगा. उनकी ये चुनौती जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने तेजस्वी को ना सिर्फ़ नसीहत दी बल्कि नीतीश कुमार के इतिहास को जानने का आग्रह भी किया. वशिष्ठ नारायण सिंह ने तेजस्वी को नीतीश के इतिहास को बताते हुए कहा कि कोई नासमझ है तो उसको क्या बोला जाए. जरा लोगों को इतिहास याद करना चाहिए. नीतीश कुमार तो ऐसे नेता हैं जो नोमिनेशन करने के बाद एक बार भी चुनाव प्रचार करने नहीं गए. ऐसे नेता को चुनौती दी है. अगर इस बात की जानकारी नहीं है तो अपने पिता से जानकारी ले लें.

दरअसल ये बात 1995 की है जब समता पार्टी का गठन हुआ था और नीतीश कुमार ने हरनौत से विधानसभा चुनाव का नामांकन किया था, लेकिन अपने समर्थकों से इसी शर्त पर नामांकन किया की वो एक दिन भी चुनाव प्रचार नहीं करने जाएंगे. सिर्फ यही नहीं बल्कि नामांकन करने के बाद हरनौत की सीमा से लगे किसी भी विधानसभा में प्रचार तक करने नहीं गए. नीतीश कुमार ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि अगर मैंने काम किया है तो जनता जिताए, मैं वोट मांगने क्यू जाऊं!

वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया किस्सा



वशिष्ठ नारायण सिंह कहते है,  'नीतीश कुमार ने जब नामांकन किया था तब मेरे साथ पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफ़ूर भी मौजूद थे. जब नीतीश कुमार ने बताया का  चुनाव प्रचार करने नहीं जाऊंगा तो हमें थोड़ा अजीब लगा. हमने कोशिश की समझाने की, लेकिन नीतीश कुमार के दृढ़ इच्छा शक्ति देख हम समझ गए थे कि नीतीश कुमार को अपने किए काम पर पूरा भरोसा है. नीतीश के इच्छा शक्ति को देख हम भी निश्चिंत हो गए थे. फिर हम लोग तब पटना के होटल में पहुंचे और एक साथ खाना खाया और हंसी मज़ाक का दौर चला.  हम चुनावी तैयारियों में व्यस्त हो गए. जब चुनाव परिणाम आया तो नीतीश कुमार ने शानदार जीत हासिल की.
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तेजस्वी पर तंज

वहीं नीतीश कुमार के साथ लम्बा समय गुजार चुके बिहार सरकार के मंत्री और नीतीश के बेहद करीबी नीरज कुमार कहते हैं, 'तेजस्वी यादव राजनीतिक रूप से नाबालिग हैं. उन्हें राजनीतिक इतिहास की जानकारी नहीं है, लेकिन इसमें उनका कोई दोष नहीं है. नौंवी पास है तो इतना ज्ञान कहां से होगा. नीतीश कुमार को चुनौती देते हैं, लेकिन ज़रा अपना पिछला विधानसभा चुनाव ही याद कर लेते जब उनके पिता लालू यादव ने चुनाव प्रचार की शुरुआत की थी तो तेजस्वी के विधानसभा राघोपुर से ही चुनावी श्री गणेश किया था. इधर, राजद नेता और प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते है कि जेडीयू के नेता कुछ भी कहानी सुना ले, लेकिन अगर नीतीश कुमार को अपनी लोकप्रियता का इतना ही गुमान है तो तेजस्वी के चुनौती को स्वीकार कर लें.
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