लाइव टीवी

बिहार चुनाव@2020: नीतीश कुमार फिर बनेंगे सीएम या विपक्ष होगा हावी, चुनाव में किसका समीकरण सधेगा

Neel kamal | News18 Bihar
Updated: November 15, 2019, 11:09 PM IST
बिहार चुनाव@2020: नीतीश कुमार फिर बनेंगे सीएम या विपक्ष होगा हावी, चुनाव में किसका समीकरण सधेगा
बिहार में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं. (फाइल फोटो- नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी और तेजस्वी यादव)

बिहार (Bihar) में अगले साल यानी वर्ष 2020 में विधानसभा का चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) होना है. नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) क्या एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे या विपक्षी महागठबंधन (Mahagathbandhan) की एकता उन पर पड़ेगी भारी. बिहारवासियों के मन में अभी से उठने लगे हैं ऐसे प्रश्न.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: November 15, 2019, 11:09 PM IST
  • Share this:
पटना. बिहार (Bihar) में अगले साल विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) होना है. इस चुनाव का नतीजा क्या होगा? क्या नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) फिर बनेंगे बिहार के मुख्यमंत्री या फिर विपक्षी एकजुटता एनडीए पर भारी पड़ेगी? ऐसे प्रश्न बिहार के आम-जनों के मन में अभी से ही उठने लगे हैं. साथ ही लोगों के मन में उत्सुकता यह भी है कि क्या इस बार नीतीश-सुशील (Sushil Kumar Modi) के विकास कार्यों पर वोट मिलेंगे? या विपक्ष (Opposition Parties) की जातीय गोलबंदी की वजह से उनका हाल 2015 जैसा होगा. क्योंकि राजद (RJD) को जहां अब 'माई-बाप' का सहारा है, तो कांग्रेस (Congress) भी राजद से अलग सोच रखती है. बहरहाल, विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में किसका समीकरण कैसा सधता है, आइए देखते हैं.

जातिवाद की राजनीति
27 जुलाई 2017 को महागठबंधन को दरकिनार कर NDA के साथ आए सीएम नीतीश कुमार ने बीते ढाई साल में ऐसा क्या किया है कि लोग अगली बार भी बिहार में NDA की ही सरकार बनाएंगे? यह बड़ा सवाल है. दरअसल, इन दिनों बिहार में एक बार फिर जातिवाद की राजनीति हावी होने लगी है. बिहार में अगड़ी जाति के वोटरों की संख्या लगभग 14-15 प्रतिशत है. लोकसभा चुनाव में अगड़ों के 78 प्रतिशत वोट एनडीए गठबंधन को मिले थे. वहीं 50 फीसदी से ज्यादा दलित और 60 फीसदी से ज्यादा अति पिछड़ी जातियों के वोट भी एनडीए ने पाए थे. ओबीसी की जातियों में सबसे अधिक संख्या वाले यादवों ने राजद-कांग्रेस को वोट किया था.

Bihar Assembly Election 2020-Political Analysis
राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व की विधानसभा चुनाव में होगी परीक्षा. (फाइल फोटो)


राजद को अपने समीकरण का भरोसा
इस बार राजद को लगता है कि उसे MY यानी मुस्लिम-यादव के साथ-साथ BAP यानी बैकवर्ड क्लास, अगड़ी जाति का बड़ा वर्ग और ब्राह्मण वोटों का भी साथ मिलेगा. राजद नेता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि बिहार में जाति की राजनीति एक प्रथा के रूप में चली आ रही है. अगर कोई राजनीतिक दल कहता है कि वो जाति की राजनीति नहीं करता है, तो वो सरासर झूठ बोलता है. राजद का यह भी कहना है कि भले ही हम लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए हों, लेकिन बिहार में विधानसभा के चुनाव में पार्टी की जीत ने साबित कर दिया कि इस बार 'माई' के साथ बिहार में राजद को 'बाप' का भी साथ मिलेगा.

महागठबंधन की आपसी लड़ाई
Loading...

आपको याद दिला दें कि बिहार में दलितों का वोट लगभग 17 प्रतिशत है. वहीं कुर्मी, कोयरी और कुशवाहा को जोड़ दें तो यह आंकड़ा लगभग 12 फीसदी का बनता है. यही वजह है कि उपेन्द्र कुशवाहा ने 2020 विधानसभा को ध्यान में रखकर एनडीए से नाता तोड़ लिया. कांग्रेस की बात करें तो 2019 में करारी हार के बाद भी पार्टी 2020 के चुनाव में बिहार में राजद और अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर भाजपा को पछाड़ने की तैयारी कर रही है. हालांकि महागठबंधन का जो हाल है उसे देखकर यह समझना मुश्किल नहीं है कि इनकी लड़ाई भाजपा या एनडीए से कम, आपस में ही ज्यादा होगी.

यह है कांग्रेस की तैयारी
यही वजह है कि कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक यानी अगड़ी जाति के लोगों को रिझाने के साथ-साथ मुसलमानों को अपने पक्ष में करने के मुहिम में जुटी है. वहीं महागठबंधन के जाति आधारित दूसरे घटक दल भी जातीय सम्मेलनों के जरिए वोट बैंक तैयार करने में अभी से जुट गए हैं. हालांकि कांग्रेस के नेता राजेश राठौड़ का कहना है कि बिहार में, जाति की बात वही पार्टी करती है जिनके पास मुद्दे नहीं हैं या फिर वह जाति आधारित पार्टी ही हो. उन्होंने कहा कि बिहार में मुद्दों की कमी नहीं है. 15 साल में बिहार बेहाल हुआ है. बेरोजगारी चरम पर है. हत्या, लूट, बलात्कार और भ्रष्टाचार चरम पर है. किसान-नौजवान और अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस बिहार की जनता के पास जाएगी.

Bihar Assembly Election 2020-Political Analysis
2020 में होने वाले चुनाव के लिए भाजपा भी पुख्ता तैयारियों में लगी है.


भाजपा भी तैयारियों में पीछे नहीं
2015 में 'माई' समीकरण ने राजद को संकट से उबार लिया था. लेकिन राजद के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा पिछले पांच साल से काम कर रही है. लालू यादव के सामने ही भाजपा ने नित्यानंद राय को प्रमोट कर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बनाया तो भूपेन्द्र यादव को बिहार भाजपा प्रभारी बनाए रख यह संदेश पहुंचाने की कोशिश की कि यादव समाज को सम्मान भाजपा ही दे सकती है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि भाजपा जाति आधारित राजनीति नहीं करती, बल्कि भाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास आधारित राजनीति कर रही है. इसलिए देश और राज्य की जनता लगातार भाजपा को मजबूत बनाने का काम कर रही है. कांग्रेस ने 70 साल तक तुष्टीकरण की राजनीति और भ्रष्टाचार कर देश को लूटने का काम किया. इसके अलावा राजद ने एक खास जाति और समुदाय का सहारा तो लिया, लेकिन राज भोगते हुए सबसे ज्यादा नुकसान उसी जाति और संप्रदाय का किया.

ये भी पढ़ें -

वशिष्ठ नारायण सिंह के 'अपमान' पर लालू यादव का ट्वीट- नीतीश को नहीं मिली हाल पूछने की फुर्सत

बापू की धरती को CM नीतीश ने किया नमन, 385 करोड़ की योजनाओं का किया उद्घाटन-शिलान्यास

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 15, 2019, 10:01 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...