Bihar Assembly Election: इंटरनेट कनेक्टिविटी में पिछड़े बिहार में कितनी सफल होंगी वर्चुअल रैलियां?
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Bihar Assembly Election: इंटरनेट कनेक्टिविटी में पिछड़े बिहार में कितनी सफल होंगी वर्चुअल रैलियां?
इंटरनेट कनेक्शन और टेली-डेंसिटी के मामलों में देश में सबसे निचले पायदान पर है बिहार.

Bihar Assembly Election: बिहार में फोन कनेक्शन (Tele-density) और इंटरनेट कनेक्टिविटी देश में सबसे कम है. TRAI और नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों की चुनौतियों के बीच वर्चुअल रैलियों (Virtual Rally) के जरिए मतदाताओं तक कैसे पहुंचेंगे सियासी दल?

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 7, 2020, 12:16 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण (COVID-19) के बढ़ते रफ्तार के बीच बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) का बिगुल कभी भी बज सकता है. निर्वाचन आयोग ने 29 नवंबर से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करा लेने का ऐलान कर भी दिया है. इन सबके बीच बिहार के सियासी दल कोरोनाकाल की चुनौतियों से जूझते हुए आम जनता यानी मतदाताओं तक पहुंचने की हरसंभव जुगत में लगे हैं. संक्रमण के खतरों की वजह से जनसंपर्क अभियान, सभा, रैली आदि करने की 'पाबंदी' है, तो बीजेपी, जेडीयू, राजद और कांग्रेस समेत तमाम सियासी दलों ने इसका तोड़ वर्चुअल रैली (Virtual Rally) के रूप में निकाला है. वर्चुअल रैली यानी इंटरनेट के माध्यम से पार्टियां कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से सीधा संपर्क करती हैं और उन तक अपनी बात पहुंचा सकती हैं. लेकिन, दूरसंचार नियामक ट्राई (TRAI) के हालिया आंकड़े बिहार में इन वर्चुअल रैलियों की सफलता को ही संदेह के घेरे में ला दिया है.

100 में से 32 के पास ही इंटरनेट
ट्राई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बिहार देश का सबसे कम टेली-डेंसिटी (Tele-density) वाला राज्य है. टेली-डेंसिटी का मतलब फोन कनेक्शन से है. ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में साल 2019 के अंत तक प्रति 100 लोगों में मात्र 59 के पास ही फोन कनेक्शन है. देश में यह आंकड़ा प्रति 100 में 89 है. हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा इंटरनेट (Internet) की उपलब्धता के मामले में भी बिहार देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है. बिहार में प्रति 100 व्यक्तियों में से मात्र 32 के पास ही इंटरनेट कनेक्शन है, जबकि इस मामले में राष्ट्रीय औसत 54 है. ग्रामीण इलाकों में तो यह आंकड़ा और भी कम है. बिहार के ग्रामीण इलाकों में प्रति 100 में से मात्र 22 घरों तक ही अब तक इंटरनेट पहुंच पाया है. ट्राई के मुताबिक, देश के कुल 22 टेलीकॉम एरिया में इंटरनेट उपलब्धता के आंकड़ों में भी बिहार सबसे निचले पायदान पर है.

जनसंचार से दूर बड़ी आबादी
बिहार के राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ टेली-डेंसिटी या इंटरनेट की उपलब्धता ही बड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि मास-मीडिया यानी संचार के विभिन्न माध्यमों तक आम बिहारी लोगों की पहुंच का आंकड़ा भी चिंता का कारण बन सकता है. 2015-16 में हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में रहने वाली 61 फीसदी महिला और 36 प्रतिशत पुरुष आबादी तक आज भी संचार के माध्यम नहीं पहुंच पाए हैं. महिलाओं तक मास-मीडिया की पहुंच के मामले में बिहार का स्थान देश में सबसे नीचे है. बिहार में ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक इंटरनेट के जरिए पहुंच बनाने के दावों के बीच, ट्राई और फैमिली हेल्थ सर्वे के ये आंकड़े बिहार के राजनीतिक दलों के लिए नई चुनौतियों के रूप में सामने आए हैं.



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बीजेपी, RJD, जेडीयू- सभी कर रहे रैलियां
TRAI और फैमिली-हेल्थ सर्वे के आंकड़े जो भी कहें, बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों की वर्चुअल रैलियां हो रही हैं. प्रदेश में सत्ताधारी गठबंधन का प्रमुख घटक दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) आज अपना पहला वर्चुअल रैली करने जा रहा है, तो उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ऐसी कई रैलियां कर चुकी हैं. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस भी ऐसी ही रैलियों के जरिए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने की कवायद में जुटे हैं. कोरोनाकाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में संक्रमण के खतरों से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का पालन करना सभी दलों के लिए जरूरी है. कोरोना संक्रमण, ट्राई, फैमिली-हेल्थ सर्वे और चुनाव आयोग की गाइडलाइन, इन सबके बीच ये दल कैसे जनता तक पहुंचते हैं, यह गौर करने वाली बात होगी.
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