Bihar elections 2020: मोकामा को हासिल करने की कोशिश में JDU, इधर, टिकट की तलाश में अनंत

मोकामा सीट पर इस बार सभी राजनीतिक दलों की नजर है. यहां से जीत के लिए सभी कमर कसे हुए हैं.
मोकामा सीट पर इस बार सभी राजनीतिक दलों की नजर है. यहां से जीत के लिए सभी कमर कसे हुए हैं.

मोकामा (Mokama) सीट को हमेशा ही बाहुबलियों की सीट के तौर पर देखा जाता रहा है और ऐसा हुआ भी है. अब राजनीतिक दल इस छवि को बदलने का भी इस चुनाव (Assembly Elections) में प्रयास कर रहे हैं. हालांकि पिछले चार चुनावों से इस सीट पर बाहुबली विधायक अनंत सिंह अपना कब्जा बनाए हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 5:55 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Elections) की तारीख आ गई है. इसके साथ ही अब प्रदेश के कुछ खास विधानसभा क्षेत्र हैं जो एक बार फिर चर्चा में हैं. ऐसी ही एक सीट है मोकामा की. यहां बाहुबली विधायक अनंत सिंह का वर्चस्व है ये कहना गलत नहीं होगा. चाहे किसी पार्टी का साथ हो या न हो वे लंब समय से मोकामा से जीत दर्ज करते आ रहे हैं. साथ ही ये भी कहना कुछ हद तक ठीक है कि ये सीट कहीं न कहीं जेडीयू की भी मानी जाती रही थी. इसी के चलते अनंत सिंह भी जेडीयू के टिकट पर ही यहां से विधायक भी बने थे. लेकिन बाद में समीकरण बदले और उन्होंने पार्टी को छोड़ निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का फैसला किया. नतीजा कि वे निर्दलीय होते हुए भी जीत गए. अब इन चुनावों में एक बार फिर जेडीयू की नजर मोकामा सीट पर है.

बाहुबलियों की सीट!
मोकामा को हमेशा से ही बाहुबलियों की सीट के तौर पर देखा जाता रहा है. मोकामा को विधानसभा क्षेत्र के तौर पर 1951 में स्‍थापित किया गया. तभी से ये सीट सामान्य कैटेगरी में है. इस पूरे इलाके पर गौर किया जाए तो ये एक ग्रामीण क्षेत्र है और यहां पर भूमिहर जाति का दबदबा है. इस सीट की एक खास बात है कि अब तक यहां से जो भी विधायक रहे हैं उनकी छवि बाहुबली की ही रही है. भूमिहर जाति से आने वाले अनंत सिंह ही इस सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं और उनकी बाहुबली की छवि किसी से छुपी नहीं है. अनंत से पहले उनके ही भाई दिलीप कुमार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं, वहीं सूरज सिंह भी यहां से विधायक रह चुके हैं.

कभी थे नीतीश के करीबी
अनंत सिंह ने अपनी राजनीति की शुरुआत ही नीतीश कुमार के साथ की थी. लेकिन बाद में मनमुटाव बढ़ता गया. इस सीट पर नजर लालू यादव की भी थी और इसी के चलते उन्होंने अनंत सिंह को कई बार अपनी पार्टी में आने का न्यौता भी दिया लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अनंत हमेशा ही लालू के प्रस्ताव को ठुकराते रहे. अब हालात ये हैं कि अनंत को नीतीश की पार्टी से बाहर का रास्ता काफी पहले ही दिखाया जा चुका है और अब वे एक पार्टी के टिकट की तलाश में हैं. चर्चा है कि अब अनंत सिंह इस विधानसभा चुनाव के लिए लालू से टिकट की आस लगाए बैठे हैं और दोनों के बीच बातचीत के दौर भी चले हैं.



जातिगत गणित का सहारा!
2015 के आंकड़े देखे जाएं तो मोकामा में करीब 2.50 लाख मतदाता थे. इनमें से 1.35 लाख पुरुष और करीब इतनी ही महिलाएं भी थीं. वहीं जातिगत गणित की बात की जाए तो भूमिहर जाति का यहां पर वर्चस्व है और बड़ी संख्या में मतदाता भी भूमिहर ही हैं. ऐसे में अनंत सिंह को ये उम्मीद जरूर है कि वे पांचवी बार भी इस सीट पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब रहेंगे. वहीं जेडीयू और आरजेडी भी इस सीट के लिए अपनी गणित बनाने में लगे हैं.
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