Bihar Election 2020: सुशांत सिंह, रघुवंश और हरिवंश के बहाने राजपूत वोट साधने में जुटे सियासी दल

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इस बार तीन फेज में वोटिंग होनी है (File Photo)

Bihar Assembly Elections 2020: राजपूतों की आबादी बिहार में करीब 6 से 8 फीसदी है. बिहार में दोनों बड़े गठबंधन यानी एनडीए और महागठबंधन की राजपूत वोटरों पर नजर है.

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    सुमित झा

    पटना. सुशांत सिंह राजपूत, रघुवंश प्रसाद सिंह और हरिवंश नारायण सिंह, बिहार से जुड़े ये वो तीन चेहरे हैं जिनके जरिए बिहार चुनाव में वोटों का समीकरण बनाने और बिगाड़ने की कोशिश में सियासतदान जुटे हैं. तीनों नाम राजपूत समाज से जुड़े हैं, ऐसे में इन तीनों नाम का इस्तेमाल करते हुए राजपूत समाज को अपने-अपने पाले में लाने की कोशिश है. यही वजह है कि 22 सितंबर को राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान हरिवंश के अपमान को बिहारी अस्मिता से जोड़ते हुए विपक्ष को बिहार चुनाव में जवाब मिलने की बात कही थी.

    अहम बात ये है कि इन तीनों चेहरे के अपमान के आरोपों को लेकर कटघरे में विपक्ष है, जिसे लेकर राजपूत समाज में विपक्ष को लेकर गुस्सा है. दरअसल राजपूतों की आबादी बिहार में करीब 6 से 8 फीसदी है. बिहार के करीब 30 से 35 विधानसभा क्षेत्र में राजपूत जाति जीत या हार में निर्णायक भूमिका निभाती रही है, यही वजह है कि सुशांत सिंह राजपूत और रघुवंश प्रसाद सिंह के मामले को लेकर जेडीयू की कोशिश है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राजपूत समाज का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की.

    वैसे विरोधी आनंद मोहन के बहाने नीतीश कुमार पर सवाल उठाते हैं. दरअसल करीब 8 महीने पहले 20 जनवरी 2020 को राजधानी पटना के मिलर स्कूल में महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह का आयोजन था जिसमें बड़ी संख्या में राजपूत समाज के लोग मौजूद थे. इसी समारोह में सीएम नीतीश के भाषण के दौरान राजपूत के नेता माने जाने वाले और कोसी क्षेत्र में दबदबा रखने वाले जेल में बंद बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई की मांग उठी, तो सीएम नीतीश कुमार को आनंद मोहन की रिहाई का भरोसा देना पड़ा था लेकिन अभी तक आनंद मोहन की जेल से रिहाई नहीं हो पाई और आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और बेटे चेतन आनंद ने आरजेडी का दामन थाम लिया.



    लवली आनंद ने नीतीश कुमार को खूब कोसा भी है. सूबे भर में आनंद मोहन की रिहाई के लिए मोर्चा और जुलुस निकाला जा रहा है. वैसे इसे राजपूत वोट अपने पाले लाने की सियासी दलों की कोशिश ही कहेंगे कि हर सियासी दल राजपूत चेहरे को आगे लाने की कोशिश में लगातार जुटे रहे. बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 5 राजपूतों को टिकट दिया था. राजद ने रामचंद्र पूर्वे की जगह इसी समाज से आनेवाले जगदानंद सिंह को अपना प्रदेश अध्यक्ष बनाया, फिर सुनील सिंह को एमएलसी बनाया और अब आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को अपने खेमे में शामिल कर लिया. हालांकि रघुवंश प्रसाद सिंह के निधन से पहले इस्तीफे और चिट्ठी से आरजेडी की कोशिश को झटका मिला है.

    राजपूत समाज से आने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह को लंबे समय से जदयू ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया हुआ है. कांग्रेस ने भी राजपूत समाज पर पकड़ बनाने के लिए पहले शक्ति सिंह गोहिल को प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी बनाया और फिर समीर सिंह को एमएलसी बनाया. जाहिर है राजपूत समाज को अपने पाले में लाने की कोशिश में सभी सियासी दल जुटे हैं, हालांकि विपक्ष की कोशिश पर सुशांत सिंह राजपूत और रघुवंश प्रसाद सिंह के मुद्दे के कारण पानी फिरता नजर आ रहा है.

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