Bihar Assembly Election 2020: फुलवारी में होगी रोचक टक्कर, भारी दिख रहा RJD का पाला

फुलवारी सीट पर श्याम रजक ने आरजेडी और बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है. (सांकेतिक तस्वीर)
फुलवारी सीट पर श्याम रजक ने आरजेडी और बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है. (सांकेतिक तस्वीर)

JDU का दामन छोड़कर RJD में गए श्याम रजक ने इस सीट पर अब मुकाबला रोचक कर दिया है. वहीं दलित और मुस्लिम वोटरों का दबदबा होने के चलते अब जेडीयू के सामने सबसे बड़ी समस्या ये रहेगी कि रजक के सामने किस उम्मीदवार को उतारा जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 7:21 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election ) में इस बार जिस सीट पर सभी की नजरें रहेंगी वो होगी फुलवारी. कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और जेडीयू के कद्दावर नेता माने जाने वाले श्याम रजक का इस सीट पर वर्चस्व कायम था. लेकिन हाल ही में रजक ने जेडीयू को छोड़कर आरजेडी का दामन थाम लिया. इससे पहले ये जेडीयू की पक्की सीटों में से एक मानी जाती थी लेकिन रजक के पार्टी छोड़ने के बाद अब इस सीट पर अब आरजेडी मजबूत होती नजर आ रही है. अब बीजेपी और आरजेडी के सामने मुश्किल ये है कि रजक के सामने कौन सा ऐसा उम्मीदवार उतारा जाए जो इस सीट पर जमीनी टक्कर देने के लिए तैयार हो.

कभी कांग्रेस का था दबदबा
फुलवारी सीट पर कभी कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था. 1977 में बनी इस सीट पर हमेशा से ही राष्ट्रीय जनता दल की नजर थी. इसी के साथ आरजेडी ने इस सीट पर अपना वर्चस्व कायम करना शुरू कर दिया और यहां से चार विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की. लेकिन समय के साथ गणित पलटा और जेडीयू ने 2010 में यहां पर जीत हासिल की. अब ये विधानसभा सीट एससी के लिए आरक्षित है.

फुलवारी सीट की एक और खास बात ये है कि यहां पर दलित वोटरों का बोलबाला है. करीब 2.80 लाख वोटरों की जनसंख्या में यहां पर 27 फीसदी दलित वोटर हैं. वहीं 25 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं. इसको देखते हुए गैर मुस्लिम और गैर दलित वोटर की भूमिका बड़ी हो जाती है और ये ट्रंप कार्ड साबित होते नजर आते हैं.
बड़ी जीत हासिल करते आए हैं रजक


इस सीट पर श्याम रजक का बड़ा दबदबा है. बात की पिछले चुनावों की तो रजक ने 94 हजार वोट हासिल किए थे, वहीं हम पार्टी के राजेश्वर मांझा को सिर्फ 48 हजार वोट मिले थे. आरजेडी के लिए ये तो ये सीट सपना ही साबित हुई थी. लेकिन अब रजक के आरजेडी के जाने के बाद पार्टी की स्थिति काफी मजबूत नजर आ रही है. अब इस सीट पर चुनाव काफी दिलचस्प होता नजर आ रहा है. रजक की मुस्लिम और दलित वोटरों में काफी अच्छी पैठ है. वहीं रजक समाज के वोट भी उनके साथ हैं. अब जब बीजेपी और जदयू साथ हैं तो रजक ने अपना रास्ता अलग करने की सोची. इस बात का फायदा उठाते हुए तेजस्वी यादव ने उनका आरजेडी में स्वागत कर लिया.
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