Bihar Assembly Election: आसान नहीं है नीतीश कुमार की राह, PM मोदी और बीजेपी से आस
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Bihar Assembly Election: आसान नहीं है नीतीश कुमार की राह, PM मोदी और बीजेपी से आस
पीएम मोदी और बीजेपी के भरोसे इस बार नीतीश कुमार की चुनावी नैया पार लगने की संभावना है. (फाइल फोटो)

Bihar Assembly Elections: बिहार में इस बार नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की राह आसान नहीं दिख रही है. कोरोना (Corona), बाढ़ (Flood) और एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर जीत के रास्ते में बड़ा बाधा दिखाई पड़ रहे हैं.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 12, 2020, 1:26 PM IST
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पटना. कोरोना (Corona) के इस काल में अब बिहार चुनाव (Bihar Assembly Elections) की सरगर्मी तेज होने जा रही है. दूर से देखने में ऐसा लगता है कि मजबूत विपक्ष की विकल्पहीनता का फ़ायदा सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (NItish Kumar) को मिल सकता है. और वो एक बार फिर अपनी सरकार बचाने और बनाने में कामयाब हो सकते हैं. हालांकि करीब से देखने पर ये सब इतना आसान भी नहीं दिखता. कोरोना, बाढ़ और 15 साल की एंटी-इंकम्बेंसी, ये तीन मुद्दे नीतीश कुमार और उनकी जीत के बीच में खड़े हुए हैं.

कोरोना और बाढ़ को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे नीतीश  

कोरोना और बाढ़ के दौरान नीतीश कुमार की सरकार पर कई तरह के आरोप लगे. विपक्ष का आरोप था कि जनता ने इस दौरान भारी तकलीफ़ झेली, लेकिन नीतीश कुमार सरकार उतनी सक्रियता से नहीं दिखाई दी जैसा एक सरकार से उम्मीद की जाती है. इसके अलावा 15 साल की एंटी इंकम्बेंसी भी बड़ी चुनौती है.



पीएम मोदी और बीजेपी से आस
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 15 साल का शासन लंबा शासन होता है. लेकिन उसके बावजूद पीएम मोदी का चेहरा एक ऐसा अस्त्र है, जो विपक्ष को धाराशाही करने के लिए काफी है. अगले कुछ दिनों मे पीएम मोदी की बिहार में काफी योजनाओं का ऐलान भी करेंगे और वर्चुअल रैलियां भी होंगी.

अब से पहले के चुनावों में नीतीश कुमार हमेशा अपने सहयोगियों के लिए ड्राइवर की भूमिका में होते थे. उनका चेहरा राज्य का सबसे भरोसेमंद माना जाता था. लेकिन इस बार परिस्थिति बदली हुई है. नीतीश इस बार चेहरा तो हैं, लेकिन जानकार कहते हैं कि इस बार बीजेपी के कंधों पर ही नीतीश की नैया पार हो सकती है.

तेजस्वी ने बदली आरजेडी की छवि 

विपक्ष भले ही दूर से देखने में कमजोर लग रहा हो, लेकिन ये इतना सीधा नहीं है. बीजेपी के ही एक नेता ने बताया कि राजद अब तक मुस्लिम और यादव की पार्टी मानी जाती थी और ये एमवाई समीकरण उसका पुख्ता वोट बैंक था. लेकिन पिछले कुछ समय से राजद खासतौर से तेजस्वी यादव ने पार्टी की इस छवि को बदलने की कोशिश की. राजद ने पिछड़े और अति पिछड़े जातियों को ये समझाने की कोशिश की है कि गरीब गुरबों के लिए सिर्फ उनकी ही पार्टी खड़ी रही है. शायद यही कारण है कि बीजेपी विपक्ष को कमजोर आंकने की गलती नहीं कर रही है.

बीजेपी को ज्यादा सीट मिलने पर भी नीतीश ही बनेंगे सीएम 

हालांकि इस बार का चुनाव बीजेपी ने नीतीश कुमार की ही अध्यक्षता में लड़ने का फैसला किया है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अगर चुनाव के बाद बीजेपी की सीटें जेडीयू से अधिक भी आईं, तो भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं है.
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