Bihar Assembly Elections: क्या था आरजेडी का मिशन-R, जिस पर रघुवंश बाबू के निधन ने फेर दिया पानी

आरजेडी अपने पुराने एमवाई समीकरण के अलावा राजपुत वोटर्स को लुभाने में जुटा था, लेकिन फिलहाल इस मंसूबे पर पानी फिरता दिख रहा है. (फाइल फोटो)

विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के मद्देनजर राजद (RJD) MY समीकरण के इतर मिशन-R पर भी काम कर रहा था. मिशन-R यानी राजपूत वोटर को साधने की कोशिश, लेकिन रघुवंश बाबू (Raghuvansh Prasad Singh) के निधन से इस पर तगड़ा झटका लगा है.

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पटना. पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) के निधन ने राजद (RJD) के मिशन-R पर ग्रहण लगा दिया है. इस समीकरण को साधने के लिए तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रयास कर रहे थे, लेकिन रघुवंश बाबू के निधन ने उन तमाम प्रयासों पर फिलहाल पानी फेर दिया है.

दरअसल इसकी भूमिका तब से ही तैयार होने लगी थी जब रघुवंश बाबू ने पहले दो पत्र लिखे. पहले पत्र में पार्टी से इस्तीफा दिया, जबकि दूसरे पत्र में सीएम नीतीश कुमार से वैशाली के विकास का आग्रह किया. इसी बीच उनका निधन हो गया. ये कड़ियां जैसे ही जुड़ीं, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आरजेडी के एक बड़े मिशन-R पर गहरा असर डाल दिया है.

MY के इतर मिशन R पर भी काम कर रहा था आरजेडी

राजद अपने मिशन MY (मुस्लिम-यादव) के इतर मिशन R पर भी काम कर रहा था. मिशन-R यानी राजपूत वोटर, जिसे साधने के लिए राजद लगातार कदम उठा रहा था. पहले जगदानंद सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाना, फिर सुनील सिंह को एमएलसी बनाना और तेजस्वी का सुशांत सिंह राजपूत मामले में सीबीआइ जांच की मांग सबसे पहले करना.  इसके बाद सूत्र बताते है कि बहुत जल्द राजद कुछ बड़े राजपूत चेहरे को राजद में शामिल करने की तैयारी में था, लेकिन ठीक उसके पहले रघुवंश सिंह की नाराजगी और निधन ने पार्टी के मंसूबे पर पानी फेर दिया.

वैसे राजद विधायक विजय प्रकाश किसी मिशन-R की बात से इंकार करते हैं, लेकिन सवाल पूछने पर रघुवंश बाबू के मामले में सफाई देकर इसका इशारा जरूर कर देते हैं.

उन्होंने कहा कि रघुवंश सिंह हमसे कभी दूर गए ही नहीं थे. उनके निधन पर जिस गंदी राजनीति का परिचय एनडीए के नेता दे रहे हैं. इससे कुछ नहीं होने वाला है. हमारे साथ हर तबके का वोट है. हम कभी सवर्ण के खिलाफ थे ही नहीं. अगर ऐसा होता तो क्या एक समय में हमारे 4 सांसदों में से 3 राजपूत जाति के होते.

एनडीए की भी R-फैक्टर पर नजर

वहीं एनडीए भी R-फैक्टर पर नजर गड़ाए हुए है. और अब रघुवंश बाबू के निधन के बाद उनके बहाने राजपूत वोटरों को लुभाने की कवायद में है. रघुवंश बाबू के वैशाली के विकास को लेकर लिखे गये पत्र के बहाने मिशन-R को साधने की एनडीए को कोशिश हो रही है. इससे पहले भी सुशांत सिंह मामले में नीतीश कुमार ने सीबीआई जांच की अनुशंसा कर इसके संकेत दे दिये थे. जेडीयू अब रघुवंश बाबू के बहाने मिशन-R को साधने की कवायद तेज कर दी है.

जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह कहते हैं, 'सिर्फ वोट लेने के लिए राजद किसी नेता का उपयोग करता है. रघुवंश बाबू जैसे नेता की चिंता जिंदा रहने पर नहीं की, लेकिन अब जब उन्होंने राजद की कलई खोल दी है और इसी गम में स्वर्ग सिधार गये, तो राजद नेता उनकी जाति के वोट खिसकने के डर से रघुवंश बाबू के लिए सहानुभूति दिखा रहे हैं.'

बहरहाल आगे चुनावी रण है. ऐसे में सभी पार्टियां अपनी पूरी ताकत जातीय समीकरण को साधने में लगा दी है. क्योंकि यही समीकरण जीत की नैया के असली खेवैया साबित होता रहा है.

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