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बिहार विधानसभा में 51 साल बाद फिर दोहराएगा इतिहास, वोटिंग के जरिए अध्यक्ष चुनने की तैयारी

बिहार में विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार
बिहार में विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार

बिहार विधानसभा अध्यक्ष चुनावः सीवान से पांचवीं बार चुनकर सदन में पहुंचे महागठबंधन प्रत्याशी अवध बिहारी चौधरी और एनडीए की तरफ से बीजेपी के विधायक विजय कुमार सिन्हा के बीच स्पीकर पद के लिए हो सकता है रोचक मुकाबला.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: November 26, 2020, 10:27 AM IST
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पटना. बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए NDA और महागठबंधन के बीच मुक़ाबला तय हो गया है.  एनडीए के सभी दलों ने इसको लेकर व्हिप जारी कर दिया है. जदयू की ओर से विजय चौधरी ने व्हिप जारी किया है तो वहीं बीजेपी, हम और वीआईपी ने भी व्हिप जारी किया है. ऐसे में सभी विधायक अपने दल के समर्थन में मत के लिए बाध्य हैं. विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर लड़ाई काफी रोचक है. इससे पहले 1969 में विधानसभा के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया था.

मंगलवार को अध्यक्ष पद के लिए दोनों ओर से नामांकन होने के बाद बुधवार को सदन में चुनाव लगभग तय है. ये बस कयास मात्र हैं कि सर्वसम्मति बनने पर मतदान से पूर्व शायद ही कोई एक पक्ष अपना प्रस्ताव वापस ले सकता है. संख्याबल की बात करें तो इस हिसाब से फ़िलहाल सता पक्ष का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन राजद की तरफ़ से विधायकों से अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट डालने की अपील कर मुक़ाबला रोचक बनाने की तैयारी की जा रही है. सत्ता पक्ष की तरफ से जोड़-घटाव कर पूरी बिसात बिछा दी गई है और NDA के रणनीतिकार NDA के तमाम विधायकों से फ़ोन करके उन्हें सदन में आने का निर्देश दे रहे हैं.

अगर आंकड़ों की बात करें तो NDA के पास 126 विधायकों का समर्थन है, जिसमें से एक निर्दलीय विधायक सुमित सिंह का भी समर्थन शामिल है. वहीं BSP के एकमात्र जीते हुए विधायक जमा खान ने जो इशारा किया है वो भी NDA के लिए उत्साहवर्धक है. जमा खान ने कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष पद की एक गरिमा होती है, उसका सर्वसम्मति से चुनाव होना चाहिए. चुनाव हो रहा है ये ठीक नहीं है.




लोजपा के एकमात्र विधायक राजकुमार सिंह के बारे में भी माना जा रहा है कि उनका झुकाव भाजपा के उम्मीदवार के तरफ़ ही होगा क्योंकि लोजपा हर बार भाजपा के समर्थन में रही है. यानी फ़िलहाल संख्याबल देखें तो NDA का पलड़ा भारी है. लेकिन राजद के उम्मीदवार अवध बिहारी चौधरी को उम्मीद है कि ऐसे कई विधायक हैं NDA के जिनका झुकाव मेरी तरफ़ हो सकता है.

राजद के दूसरे नेता भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं. दरअसल तेजस्वी यादव इसी बहाने एक बार फिर से अपनी ताक़त दिखाने की कोशिश में हैं और इसीलिए NDA के विधायकों से अंतरआत्मा की आवाज़ पर वोट की अपील कर रहे हैं. आंकड़ों की बात करे तो राजद गठबंधन के पास 110 वोट हैं. इधर, AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख़तरुल ईमान ने कहा है कि अध्यक्ष पद को लेकर चुनाव नहीं होना चाहिए. अध्यक्ष पद सत्ता धारी दल को और उपाध्यक्ष पद विरोधी दल को देना चाहिए, ऐसे में महागठबंधन को AIMIM का समर्थन लेने में मुश्किल आ सकती है. लेकिन अगर समर्थन मिल भी जाता है तो संख्या 115 पर जाकर रुक जाएगी.

1969 में हुआ था चुनाव
आपको बता दें कि 2020 से पहले एक बार और ऐसा मौक़ा आया था जब विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए मुक़ाबला हुआ था. 1969 में स्पीकर पद का चुनाव हुआ था, धनिक लाल मंडल पक्ष से थे और सरदार हरिहर सिंह विपक्ष से थे. स्पीकर पक्ष ने जीता था. सरदार हरिहर सिंह बिहार सरकार के वर्तमान मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह के दादा थे. बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार कहते हैं कि ऐसी परिपाटी अमूमन नहीं होती है. हम आग्रह करते हैं कि विरोधी अपने उम्मीदवार को वापस ले लें.
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