STET की दोबारा होने वाली परीक्षा अब बिहार बोर्ड नहीं बेल्ट्रॉन लेगा, जानें क्यों हुआ ये फैसला
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STET की दोबारा होने वाली परीक्षा अब बिहार बोर्ड नहीं बेल्ट्रॉन लेगा, जानें क्यों हुआ ये फैसला
STET की परीक्षा अब बेल्टॉन आयोजित करेगा.

बिहार बोर्ड ( bihar board) की मानेंं तो परीक्षा के दौरान मोबाइल के माध्यम से प्रश्न पत्र कई जगह आदान-प्रदान भी किए गए थे. परीक्षा केंद्रों पर तोड़फोड़, हंगामा, प्रश्न पत्र फाड़ने तथा मारपीट जैसी घटनाएं भी हुई थीं.

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पटना. बिहार में राज्य शिक्षक पात्रता परीक्षा यानि STET के परीक्षार्थियों के आंदोलन का इस बार बड़ा असर देखने को मिला है. जहां शिक्षा विभाग ने 16 मई को रद्द हुई परीक्षा को दोबारा लेने की सहमति दे दी, वहींअब बिहार बोर्ड नहीं बल्कि बेल्ट्रॉन के द्वारा ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा आयोजित की जाएगी. सबसे खास बात यह कि ये प्रस्ताव खुद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने ही शिक्षा विभाग को दी थी जिस पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल ने मुहर लगा दी है. शिक्षा विभाग (education Department) ने बतौर बिहार बोर्ड को सहमति पत्र भी भेज दिया है. परीक्षा को लेकर अचानक हुए बड़े बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों के बीच चर्चे भी शुरू हो गए हैं. दरअसल अब तक राज्य में टीईटी, एसटीईटी परीक्षा का आयोजन बिहार बोर्ड ही करता आया है.

बिहार बोर्ड ने कैंसल की थी परीक्षा
बता दें कि एसटीईटी परीक्षा 28 जनवरी 2020 को राज्य के 317 केंद्रों पर ली गयी थी. दो पाली में हुई परीक्षा में दो लाख 47 हजार 241 परीक्षार्थी शामिल हुए थे. इसमें प्रथम पाली में एक लाख 81 हजार 738 और दूसरी पाली में 65 हजार 503 परीक्षार्थी शामिल हुए थे. परीक्षा रद्द करने के सवाल पर बोर्ड का स्पष्ट कहना था कि प्रश्न पत्र मोबाइल से लीक हुआ था जो कि जांच कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि एसटीईटी परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर प्रश्न पत्र को लेकर सवाल उठे है.

कदाचार के साथ हंगामा और तोड़फोड़ की थी शिकायतें
वहीं, बिहार बोर्ड ( bihar board) की मानेंं तो परीक्षा के दौरान मोबाइल के माध्यम से प्रश्न पत्र कई जगह आदान-प्रदान भी किए गए थे. परीक्षा केंद्रों पर तोड़फोड़, हंगामा, प्रश्न पत्र फाड़ने तथा मारपीट जैसी घटनाएं भी हुई थीं.  ऐन वक्त पर बोर्ड ने तब परीक्षा रद्द की थी जब परीक्षार्थी रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे.



परीक्षार्थियों में जगी नयी उम्मीद
इसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए बोर्ड ने चार सदस्यीय जांच कमिटी का भी चुपके से ही गठन कर दिया गया था. जांच कमिटी ने 5 माह बाद जैसे ही रिपोर्ट सौंपी कि परीक्षा में धांधली, गड़बड़ी हुई है तो बोर्ड ने कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा को रद्द कर दिया था. बहरहाल अब इतनी जद्दोजहद के बाद मामला पटरी पर आता दिख तो रहा है बशर्ते कि फिर कोई नया बखेड़ा खड़ा न हो जाए.
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