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तेजस्वी यादव के लिए अग्निपरीक्षा क्यों है बिहार का उपचुनाव? जानिए 5 वजह

News18 Bihar
Updated: October 15, 2019, 12:03 PM IST
तेजस्वी यादव के लिए अग्निपरीक्षा क्यों है बिहार का उपचुनाव? जानिए 5 वजह
बिहार में हो रहे उपचुनाव में तेजस्वी यादव के सामने एक बार फिर खुद को साबित करने की चुनौती है. (फाइल फोटो)

दोनों ही गठबंधनों की ओर से पुरजोर कोशिश की जा रही है कि उपचुनाव (By Election) में अच्छी सफलता हासिल हो. लेकिन बिहार के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ये चुनाव एनडीए (NDA) की एकजुटता की परख के साथ ही तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के लिए अग्निपरीक्षा भी हैं.

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पटना. बिहार में 5 विधान सभा और एक लोक सभा सीट पर उपचुनाव (By Election) होने वाला है. इनमें समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के साथ ही नाथनगर, सिमरी बख्तियारपुर, दरौंदा, बेलहर और किशनगंज विधानसभा क्षेत्रों में मतदान (Voting) होने जा रही है. इन सीटों पर 21 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 24 अक्टूबर को काउंटिंग (Counting) होगी. उसी दिन रिजल्‍ट भी आ जाएगा. इसके लिए महागठबंधन में आरजेडी (RJD) चार विधानसभा सीटों पर तो कांग्रेस (Congress) ने एक विधानसभा सीट के साथ एक लोकसभा सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.  वहीं, एनडीए (NDA) की ओर से जेडीयू (JDU) ने चार और बीजेपी (BJP) ने एक किशनगंज विधान सभा सीट पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं. वहीं, एनडीए की सहयोगी एलजेपी (LJP) समस्तीपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ रही है.

जाहिर है दोनों ही गठबंधनों की ओर से पुरजोर कोशिश की जा रही है कि इसमें अच्छी सफलता हासिल हो. लेकिन बिहार के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ये चुनाव एनडीए की एकजुटता की परख के साथ ही तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के लिए अग्निपरीक्षा भी हैं. आइए जानते हैं कि किन वजहों से इसे तेजस्वी की अग्निपरीक्षा कहा जा रहा है.

फिर एक बार महागठबंधन के लीडर
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि उपचुनाव में अगर आरजेडी अच्छी सफलता हासिल करने में सफल होती है तो तेजस्वी यादव महागठबंधन के नेता के तौर पर एक बार फिर स्थापित हो सकते हैं. अगर चार में से दो सीट भी आरजेडी जीत पाने में कामयाब होती है तो इसे लोकसभा चुनाव के नतीजों से लिहाज से भी सफल कहा जाएगा.

बिहार उपचुनाव/महागठबंधन
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बिहार उपचुनाव में तेजस्वी यादव आरजेडी-कांग्रेस गठजोड़ को कामयाबी दिला पाते हैं तो यह महागठबंधन में उनके नेतृत्व पर सवाल उठाने वालों को भी एक जवाब होगा. (फाइल फोटो)


आरजेडी में नहीं उठेंगे विरोध के स्वर
बकौल अशोक शर्मा अगर तेजस्वी यादव कांग्रेस को समस्तीपुर लोकसभा चुनाव में भी सफलता दिलवा पाने में कामयाब होते हैं तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी. दरअसल ये एलजेपी की सीट है और रामविलास पासवान के छोटे भाई रामचंद्र पासवान के निधन के बाद ये सीट खाली हुई है. यहां से उनके बेटे प्रिंस राज चुनावी मैदान में हैं ऐसे में अगर कांग्रेस बाजी मारती है तो यह तेजस्वी की सफलता भी कही जाएगी.
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महागठबंधन में तेजस्वी की चलेगी
उपचुनाव के नतीजे किस तरह से तेजस्वी के लिए अग्निपरीक्षा है इस पर वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कुमार कहते हैं कि अगर इस उपचुनाव में आरजेडी-कांग्रेस के गठजोड़ को सफलता मिलेगी तो यह उनके लिए आगे की राह आसान करेगी. दरअसल महागठबंधन में शामिल जीतन राम मांझी, मुकेश सहनी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को जिस तरह से इस उपचुनाव में किनारे किया गया है यह आने वाले समय में इन दलों के बिना कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन की राजनीति भी आगे बढ़ा सकती है.

CM नीतीश का विकल्प बनने की ओर अग्रसर होंगे
प्रेम कुमार कहते हैं कि बिहार की राजनीति में अगर चेहरे की बात की जाए तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद अगर कोई फेस दिखता है तो वह तेजस्वी यादव ही हैं. जाहिर है लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने वाले तेजस्वी यादव अगर आरजेडी-कांग्रेस गठजोड़ को अच्छी सफलता दिला पाते हैं तो स्वाभाविक तौर पर वो नीतीश कुमार के विकल्प के तौर पर भी देखे जाएंगे. प्रेम कुमार कहते हैं कि हालांकि अगर हार भी होती है तो भी चेहरा तो वही हैं, लेकिन अगर जीत हुई तो ज्यादा दमदार नजर आएंगे.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर बिहार उपचुनाव में आरजेडी-कांग्रेस गठजोड़ को अच्छी सफलता मिलती है तो यह तेजस्वी यादव के नेतृत्व की सफलता मानी जाएगी. (फाइल फोटो)


'माय' समीकरण की एकजुटता की परीक्षा
प्रेम कुमार कहते हैं कि तेजस्वी यादव के लिए खुद को एक नेतृत्वकर्ता के तौर पर भी स्थापित करने की बड़ी चुनौती है. इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि मुस्लिम-यादव गठजोड़ आरजेडी-कांग्रेस के पक्ष में कितना काम करता है. अगर माय समीकरण एक बार फिर इस गठजोड़ के साथ आता है तो यह तेजस्वी यादव की भविष्य की राजनीति की राह आसान करेगा. अगर ऐसा नहीं हो पाता है और एनडीए फिर से एक बड़ी जीत हासिल करता है तो बिहार की राजनीति में एक तरह से विकल्पहीनता की स्थिति होगी.

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First published: October 15, 2019, 11:19 AM IST
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