बिहार उपचुनाव: भतीजे के लिए नीतीश के साथ मैदान में उतरे थे रामविलास पासवान, मिली बंपर जीत

प्रिंस राज को बिहार लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया.

प्रिंस पासवान (Prince Paswan) रामचंद्र पासवान के पुत्र हैं. उनके पिता रामचंद्र पासवान के निधन से खाली हुई समस्तीपुर सीट (Samastipur Loksabha Seat) से लोजपा (LJP) ने टिकट दिया था.

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पटना. बिहार की एकमात्र लोकसभा सीट (Loksabha seat) के लिए हुए उपचुनाव (By Election) में एनडीए (NDA) को जीत मिली है. बिहार की समस्तीपुर (Samastipur) सीट से लोजपा प्रत्याशी प्रिंस पासवान ने जीत हासिल की है. प्रिंस पासवान, चिराग पासवान के भाई और रामविलास पासवान के भतीजे हैं. इस सीट से उनकी जीत तय मानी जा रही थी क्योंकि उपचुनाव से पहले ये सीट उनके ही पिता रामचंद्र पासवान (Ramchandra Pathak) की थी, जिनका कुछ दिनों पहले ही निधन हुआ था. प्रिंस ने पासवान खानदान की इस पुश्तैनी सीट से जीत हासिल कर लोजपा का कब्जा बरकरार रखा है. प्रिंस ने अपने पिता की इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार डॉ अशोक राम को हराया है. प्रिंस की जीत इस मायने में भी खास हैं.

प्रिंस राज ने मतगणना की शुरुआत से ही बढ़त बना ली और उन्होंने करीब एक लाख से अधिक मतों से ये जीत हासिल की है. गिनती के दौरान प्रिंस हर राउंड में कांग्रेस उम्मीदवार डॉ अशोक राम से ज्यादा बढ़त लेते रहे. 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रिंस के पिता रामचंद्र पासवान ने भी कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक राम को 2 लाख 50 हजार से अधिक वोटों से हराया था.

पासवान परिवार से सांसद बनने वाले पांचवे शख्स
रामविलास पासवान की पहचान दलित नेता के तौर पर होती है तो इसके साथ-साथ उनके परिवार की पहचान बिहार के बड़े राजनीतिक घराने के तौर पर होती है. वो खुद जहां केंद्र में मंत्री हैं, तो उनके भाई-पुत्र भी सांसद हैं. चिराग पासवान के बाद प्रिंस पासवान खानदान की नई पीढ़ी के दूसरे चेहरे हैं, जो संसद पहुंचे हैं. पासवान परिवार की बात करें तो 2019 के चुनाव में इस परिवार से चार लोग सांसद थे, जिनमें रामविलास पासवान, उनके भाई रामचंद्र पासवान (उनका अब निधन हो चुका है) और छोटे भाई पशुपति कुमार पारस समेत बेटे चिराग पासवान शामिल थे. प्रिंस सांसद बनने वाले पासवान परिवार के पांचवें चेहरे हैं. वो राजनीति में नए हैं लेकिन पिता के निधन से खाली हुई सीट से उनको रामविलास पासवान ने मौका देकर राजनीति में उतार दिया है.

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अपने परिवार के लोगों के साथ रामविलास पासवान (फाइल फोटो)


इस सीट से थे 11 प्रत्याशी
समस्तीपुर में लोकसभा उपचुनाव की जंग भी बड़ी रोचक थी. इस सीट से 11 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन का पर्चा दाखिल किया. इसमें एनडीए से लोजपा प्रत्याशी प्रिंस राज, महागठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी डॉ अशोक कुमार, युवा क्रांतिकारी पार्टी से रंजू देवी,वाजिव अधिकार पार्टी से विद्यानंद राम, निर्दलीय से सूरज दास, अनामिका, शशिभूषण दास, शैलेन्द्र चौधरी, निर्दोष कुमार, आनंद कुमार, आशा देवी शामिल थे.

पिता की जीत के रिकॉर्ड को रखा कायम
बिहार की समस्तीपुर सीट से वर्ष 2014 में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने छोटे भाई रामचंद्र पासवान को जीत दिलाई थी. इस वजह से ये उनके लिए  प्रतिष्‍ठा की सीट बन गई थी. प्रिंस राज की जीत से एलजेपी अपना गढ़ बचा पाने में कामयाब हो गई है.

नीतीश ने भी किया था प्रचार
बीते 17 सितंबर से जब सीएम नीतीश कुमार ने बिहार में चुनाव अभियान की शुरुआत की तो यहां उनके अलावा डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी एवं रामविलास पासवान एक साथ मंच पर नजर आए. जाहिर है तमाम विपरीत बातों के बीच यहां एनडीए पूरी तरह एकजुट दिखा और जनता में इसका अच्छा मैसेज गया. उनके साथ चिराग पासवान ने भी कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव प्रचार किया जिसका असर मतदाताओं के मिजाज पर स्पष्ट रूप से पड़ा.

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