लाइव टीवी

ANALYSIS: बिहार में हो रहा उपचुनाव लिटमस टेस्ट, इसी से तय होगी NDA और महागठबंधन की दिशा

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: October 11, 2019, 3:18 PM IST
ANALYSIS: बिहार में हो रहा उपचुनाव लिटमस टेस्ट, इसी से तय होगी NDA और महागठबंधन की दिशा
फिलहाल की स्थिति देखकर साफ पता चल रहा है कि दोनों गठबंधन में सबकुछ सामान्य नहीं है. (फाइल फोटो)

इस चुनाव में एनडीए और महागठबंधन दोनों कितने रहेंगे एकजुट और किस तरह बना पाएंगे सामंजस्य? महागठबंधन में साथ रहकर भी खिंची है तलवारें तो एनडीए में बीजेपी जेडीयू के बीच रिश्तों में आ चुकी है खटास.

  • Share this:
पटना. बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) से पहले उपचुनाव को लेकर रणभेरी बज चुकी है. 21 अक्टूबर को बिहार (Bihar) विधानसभा की पांच सीट दरौंदा (सीवान), किशनगंज (किशनगंज), सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा), बेलहर (बांका), नाथनगर (भागलपुर) और समस्तीपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव होने हैं. जिसे लेकर पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है. यह उपचुनाव बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से पहले का पहला लिटमस टेस्ट होगा.

पहला लिटमस टेस्ट इस मायने में कि अगले वर्ष अप्रैल-मई में राज्यसभा की 5 और विधानपरिषद की दो दर्जन से अधिक सीटों पर भी चुनाव होने हैं. इस लिहाज से यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि जहां एनडीए और महागठबंधन में सहजता लगभग खत्म हो गई है, ऐसे में कौन किसके साथ कितना एकजुट रह पाएगा?

उपचुनाव से पहले दोनों गठबंधन में घमासान
21 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है. सभी पार्टियों ने अपने अपने नेताओं को चुनावी मैदान में उतार दिया है. लेकिन बड़े नेताओं का चुनाव प्रचार शुरू होना बाकी है. हालांकि अब तक बिहार की राजनीति से लंबी दूरी बनाकर चल रहे तेजस्वी यादव ने सबसे पहले इसकी शुरुआत कर दी है. एनडीए की ओर से नीतीश कुमार और सुशील मोदी जैसे नेता भी जल्द इसकी शुरुआत करेंगे. लेकिन उपचुनाव से पहले दोनों ही गठबंधनों में घमासान मच चुका है.

सुशील मोदी और नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


जीतनराम मांझी का बागी तेवर
सबसे पहले बात करते हैं महागठबंधन की. आरजेडी को छोड़कर सभी पार्टियां इस बात का इंतजार कर रही थी कि सीटों को लेकर कुछ बात होगी, लेकिन महागठबंधन में बागी तेवर अपनाए हुए जीतनराम मांझी ने खुद से नाथनगर की सीट पर दावेदारी कर दी. वहां से अपने उम्मीदवार के रूप में अजय राय के नाम की घोषणा कर मामले को पेचीदा बना दिया था.
Loading...

कांग्रेस आलाकमान ने स्थिति को संभाला
इसी बीच आरजेडी ने भी सहयोगियों से बात किए बगैर किशनगंज को छोडकर सभी चारों सीटों पर अपने उम्मीदवार तय कर उन्हें सिंबल तक पकडा दिया. इन सब प्रकरण से तिलमिलाई कांग्रेस ने भी आनन-फानन में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा कर दी. इस बीच वीआईपी ने सिमरी बख्खियारपुर सीट पर अपना दावा ठोक दिया. लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने स्थितियों को संभाला और किशनगंज विधानसभा सीट और समस्तीपुर लोकसभा सीट पर ही उम्मीदवार खड़े किए.

प्रचार को लेकर असमंजस
नाथनगर में मांझी की पार्टी हम और आरजेडी के बीच मामला फंसा हुआ है. अभी तक दोनों दलों में किसी ने अपने उम्मीदवार को हटाने का फैसला नहीं किया है. अब ऐसे में जाहिर है कि महागठबंधन में सामंजस्य कतई नहीं है. तेजस्वी यादव चुनाव प्रचार में निकले जरूर हैं लेकिन वे कांग्रेस की सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे या नहीं, कहना मुश्किल है.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)


चारों सीट हार गए तो क्या होगा?
कमोबेश लोकसभा चुनाव वाली स्थिति है. जिसमें आरजेडी और कांग्रेस के नेता एक दूसरे की सीटों पर चुनाव प्रचार करने नहीं गए थे. पांच विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट का यह उपचुनाव तेजस्वी यादव के लिए बेहद मायने रखता है कि क्या वे अपने ऊपर लगे फेल के दाग को मिटा पाएंगे या नहीं. क्योंकि अगर एक दो सीट जीत गए तो साख बच जाएगी लेकिन अगर चारों सीट हारे, तब फिर क्या होगा?

बीजेपी-जेडीयू में भी सबकुछ ठीक नहीं
अब बात एनडीए की करते हैं. लोकसभा चुनाव तक बीजेपी-जेडीयू में सबकुछ ठीक था. लेकिन जेडीयू के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल न होने से फैसले ने दोनों दलों के बीच तल्खी बढा दी. वहां से शुरू हुई तल्खी पहले नेतृत्व के मुद्दे से होती हुई जलजमाव तक आई. फिर रावण वध आयोजन में बीजेपी के किसी नेता के शामिल न होने पर बात इस कदर बढ़ गई कि मानों गठबंधन अंतिम पायदान पर पहुंच गया. लेकिन जेपी नड्डा की गिरिराज सिंह को फटकार ने इसपर थोड़ी मरहम जरूर लगाई.

किशनगंज से बीजेपी का उम्मीदवार मैदान में
उपचुनाव में किशनगंज से बीजेपी ने अपना उम्मीदवार उतारा है जबकि बाकी की चारों सीटों पर जेडीयू के प्रत्याशी मैदान में हैं. समस्तीपुर लोकसभा सीट एलजेपी के खाते में है. दोनों ही पार्टियां में खटास आ चुकी है. लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि जिस तरह लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के बडे नेता एक दूसरे के लिए प्रचार में गए, क्या इस बार भी ऐसा होगा या नहीं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


नीतीश कुमार होंगे सबसे बड़े प्रचारक
इस उपचुनाव में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के आने की संभावना नहीं है. ऐसे में नीतीश कुमार ही सबसे बड़े प्रचारक होंगे. ऐसे में देखना होगा कि क्या नीतीश कुमार किशनगंज जाएंगे, क्या बीजेपी के बड़े नेता दरौंदा, सिमरी बख्तियारपुर, नाथनगर और बेलहर विधानसभा सीटों पर जेडीयू के लिए चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे या नहीं? चुनाव प्रचार इस बात का भी संकेत देगा कि आने वाले दिनों में बीजेपी-जेडीयू के बीच रिश्ते कैसे रहेंगे.

कुल मिलाकर यह उपचुनाव दोनों ही गठबंधन के लिए पहली अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा. जिसमें यह तय होगा कि 2020 के महासमर में कौन साथ रहेगा और कौन अपनी राह पकड़ेगा.

ये भी पढ़ें-

ANALYSIS: आखिरकार क्या मतलब है तेजस्वी यादव के राजनीतिक वैराग्य का?

ANALYSIS: क्या मजबूरी में तब्दील होती जा रही है BJP-JDU की दोस्ती?

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 11, 2019, 3:18 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...