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अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया नीतीश कुमार का मंत्रिमंडल विस्तार...

अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया नीतीश कुमार का मंत्रिमंडल विस्तार...

नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

मत्रिमंडल का विस्तार कर नीतीश कुमार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे और उनकी पार्टी किसी की अनुकंपा पर नहीं है,बल्कि बिहार में उनकी अपनी ताकत है.

    केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार का गठन और उस मंत्रिमंडल में जेडीयू की मात्र एक सीट की सांकेतिक भागीदारी मिलने के बाद नीतीश कुमार ने अपनी अघोषित नाराजगी के बीच नए मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया. जेडीयू से आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई गयी, लेकिन इस विस्तार में बीजेपी से कोई नहीं था. बदलते घटनाक्रम के बीच बिहार की राजनीति में यह विस्तार कई बड़े सवाल खड़े करता है. क्योंकि कल तक लोकसभा चुनाव में एक-दूसरे का हाथ थामे एक ही भाषा बोलने वाले अचानक से दोनों सहयोगी अलग-अलग से दिखने लगे. राजनीतिक दलों की ओर से अब जो भी फैसले होंगे, वह अब 2020 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही होंगे.

    लोकसभा में 16 सांसद और राज्यसभा में 6 सांसदों की ताकत रखने वाली जेडीयू को मोदी मंत्रिमंडल में सिर्फ सांकेतिक रुप से एक स्थान मिलना नीतीश कुमार को बुरी तरह अखर गया. नीतीश कुमार को यह बात इतनी बुरी लगी कि उन्होंने भविष्य में भी मंत्रिमंडल में शामिल होने से न सिर्फ इंकार कर दिया बल्कि सीधे तौर पर यह कह भी दिया कि बिहार में मिली जीत किसी एक की जीत नहीं, बल्कि बिहार की जनता की जीत है. हालांकि वे नाराज है, इससे उन्होंने साफ इंकार किया. हालांकि सबकुछ ठीक नहीं है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया गया कि इस पूरे प्रकरण पर उपमुख्यमंत्री और बिहार बीजेपी के सबसे बडे नेता सुशील कुमार मोदी ने कुछ भी नहीं कहा.

    लेकिन दिल्ली से लौटते ही अपने मंत्रिमंडल के विस्तार की घोषणा कर नीतीश कुमार ने हर किसी को चौंका दिया. आज जब विस्तार हुआ तो सिर्फ जेडीयू के ही विधायकों और विधान पार्षदों ने मंत्री पद की शपथ ली. बीजेपी की ओर से कोई नहीं था.  अपने मंत्रिमंडल का यह विस्तार कर नीतीश कुमार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे और उनकी पार्टी किसी की अनुकंपा पर नहीं है. बल्कि बिहार में उनकी अपनी ताकत है.

    2020 का विधानसभा चुनाव है लक्ष्य

    नीतीश कुमार का लक्ष्य अब 2020 का विधानसभा चुनाव है. दिल्ली से लौटने के बाद नीतीश कुमार मीडिया से बात कर रहे थे तो उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि बिहार में तपती गर्मी में जिन लोगों ने वोट दिया वे पिछड़ा अतिपिछड़ा वर्ग के लोग थे और गरीब गुरबा के इस वर्ग ने बिहार में जीत दिलाने में अपनी बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन मोदी मंत्रिमंडल में पिछड़ा, अतिपिछड़ा वर्ग की अनदेखी कर बिहार से जो छह मंत्री बनाए गए उसमें चार तो सवर्ण ही थे. ऐसे में नीतीश कुमार ने अपना जो मंत्रिमंडल विस्तार किया, उसमें अधिकतर पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर यह संदेश दे दिया कि जिस वर्ग की केन्द्र में अनदेखी हुई, उस वर्ग के साथ वे खड़े ही हैं. लेकिन साथ ही ब्राह्मण जाति से संजय झा और भूमिहार जाति से नीरज कुमार को भी मंत्री बनाकर यह भी संदेश दिया कि वे सवर्णों के भी साथ हैं.

    नीतीश ने कहा- ‘ऑल इज़ वेल’

    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नीतीश कुमार और सुशील मोदी दोनों ने ही एनडीए में किसी तरह के मनमुटाव से इंकार कर भले ही कह दिया कि ऑल इज वेल. लेकिन सुशील मोदी ने यह भी कहा कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने के लिए कहा गया था, लेकिन बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व ने फिलहाल मना किया. ऐसा नहीं था कि बीजेपी से अगर एक दो मंत्री जाते तो बीजेपी में कोई विद्रोह हो जाता. क्योंकि इस प्रचंड जीत के बाद बीजेपी में कोई चूं भी करे, संभव नहीं दिखता. यानि संदेश साफ है कि दिल्ली में अगर जेडीयू ने मना किया तो पटना में बीजेपी ने मना कर दिया. तो फिर एनडीए में ऑल इज वेल कैसे हुआ.

    आरजेडी-कांग्रेस ने साधी चुप्पी

    इन तमाम प्रकरण में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि पूरे चुनाव नीतीश कुमार पर हमलावर रही आरजेडी और कांग्रेस की ओर से इतनी बडी राजनीतिक घटना के बाद भी नीतीश कुमार और उनका पार्टी जेडीयू के खिलाफ कोई कटाक्ष नहीं किया. इससे साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कई मोड देखने को मिल सकते हैं.

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    Tags: Bihar News, BJP, Bjp jdu, Jdu, Nitish kumar, PATNA NEWS, Pm narendra modi, Sushil Modi

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