मिशन 2019 : मुसलमानों का राष्ट्रीय कांफ्रेंस कराने वाले को नीतीश ने भेजा विधान परिषद

रामेश्वर महतो और खालिद अनवर को सामने लेकर नीतीश ने भी दूसरे दलों की तरह 2019 चुनाव के लिए जातीय समीकरण बैठाने की कोशिश की है.

Utkarsh Kumar | News18 Bihar
Updated: April 17, 2018, 1:56 PM IST
मिशन 2019 : मुसलमानों का राष्ट्रीय कांफ्रेंस कराने वाले को नीतीश ने भेजा विधान परिषद
रामेश्वर महतो और खालिद अनवर को सामने लेकर नीतीश ने भी दूसरे दलों की तरह 2019 चुनाव के लिए जातीय समीकरण बैठाने की कोशिश की है.
Utkarsh Kumar | News18 Bihar
Updated: April 17, 2018, 1:56 PM IST
बिहार में चुनावी साल से पहले से सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. खुद बिहार के सीएम और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भी 2019 लोकसभा चुनाव के लिए कमर कसते नजर आ रहे हैं.


बीते रविवार को पटना में आयोजित मुसलमानों के बड़े कार्यक्रम 'दीन बचाओ देश बचाओ 'कांफ्रेंस  के  संयोजक रहे खालिद अनवर को नीतीश कुमार ने विधानपरिषद भेजा है. यह राष्ट्रीय स्तर का कांफ्रेंस थे, जिसे इमारत-ए-शरिया की ओर से आयोजित किया गया था. इसमें राज्य ही नहीं देशभर के मुस्लिम काफी संख्या में शामिल हुए थे.



नीतीश ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए जिस तरह जदयू उम्मीदवारों की घोषणा की. वह कहीं न कहीं उनकी चुनावी तैयारी को ही दर्शा रहा है. नीतीश कुमार अपने चौंकाने वाले निर्णय के लिए जाने जाते हैं. इस बार भी विधानपरिषद के लिए दो उम्मीदवारों रामेश्वर महतो और खालिद अनवर की घोषणा कर नीतीश कुमार ने एक बार फिर से सबको हैरान किया.

2019 चुनाव में नीतीश अपनी पकड़ किसी भी तरह ढीली नहीं रखना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने अल्पसंख्यकों का भी ख्याल रखा है. अल्पसंख्यकों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नीतीश ने खालिद अनवर को भी विधानपरिषद का टिकट दिया है. खालिद अनवर दो महीने पहले ही पार्टी में आये हैं. खालिद एक उर्दू अख़बार के संचालक हैं.

बीते रविवार को पटना के गांधी मैदान में इमारत- ए- शरिया की और से आयोजित हुए 'दीन बचाओ देश बचाओ' कांफ्रेंस के संयोजक भी खालिद अनवर ही थे. इस कार्यक्रम में राज्यभर से काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग पहुंचे थे. भले ही कार्यक्रम में किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं थे लेकिन आयोजन का कई मायनों में राजनितिक महत्व भी नजर आता है.

ऐसे में 2019 चुनाव के लिए नीतीश कुमार अभी से ही अल्पसंख्यक कार्ड खेलना शुरू कर दिया है. नीतीश के लिए इस बार यह कार्ड इसलिए भी खास है क्योंकि अब वो एनडीए का हिस्सा हैं. वहीं इस बारे में खालिद अनवर कहते हैं कि नीतीश कुमार हमेशा से ही अल्पसंख्यकों के लिए काम करते रहे हैं. मुझे उन्होंने मौका दिया है, इसका मैं बहुत आभारी हूं. अभी चुनाव में समय है.

कुशवाहा जाति से आने वाले रामेश्वर महतो दरभंगा के प्रभारी हैं. अपने क्षेत्र में कुशवाहा जाति के बीच अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं. आर्थिक स्थिति से भी काफी संपन्न नेता बताए जाते हैं और राजनीति के अलावा दूसरे कारोबार से भी जुड़े रहे हैं. ऐसे में नीतीश ने रामेश्वर महतो को टिकट देकर कहीं न कहीं कुशवाहा जाति के लोगों को भी अपनी और खींचने का प्रयास किया है. नीतीश को 2019 चुनाव में मिथांचल क्षेत्र के लिए रामेश्वर महतो से काफी उम्मीदें हैं.

यहीं नहीं अंबेडकर जयंती के दिन भी नीतीश कुमार एक मंच पर केंद्रीय मंत्री रामविलास के साथ नजर आएं. यहां भी उन्होंने जातिगत कार्ड की जरुरत को भांपते हुए पासवान जाति के लिए बड़ी घोषणा की. उन्होंने पासवान को भी महादलितों की सुविधा देने की घोषणा की. नीतीश की ये तमाम नीतियां उनके चुनावी तैयारी की ओर इशारा करती है.

राजद नेता शिवानंद तिवारी ने भी पिछले दिनों कहा था कि नीतीश कुमार चुनाव से पहले दलितों और मुस्लिमों को रिझाने में लग गए हैं. नीतीश कुमार मुस्लिम वोटर को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन, इससे उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने वाला है.

अगर बात करें 2014 चुनाव तो उस समय नीतीश की जदयू ने अकेले 40 सीटों पर चुनाव लड़ा था. हालांकि, इसमें सिर्फ 2 सीटों पर ही जदयू जीत पायी थी. ऐसे में इस बार नीतीश जरुर उम्मीद करेंगे इस बार उन्हें ज्यादा सीटें मिले. इस बार एनडीए में शामिल हुए नीतीश कुमार के लिए बीजेपी खुद बड़ी चुनौती है. नीतीश ने खुद पिछले दिनों कई बार बीजेपी को इशारे ही इशारे में कई संदेश दिए हैं. नीतीश भी समझते हैं कि इस बार का चुनावी समीकरण अलग है. इस बार एनडीए में 40 सीटों के लिए बंटवारे में भी दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए नीतीश अभी से अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं.
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