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बिहार में उपचुनाव के नतीजों से होगा कांग्रेस का 'टेस्ट', जीते तो 'शाबाशी' मगर हार से 'खतरा'

News18 Bihar
Updated: October 20, 2019, 7:29 PM IST
बिहार में उपचुनाव के नतीजों से होगा कांग्रेस का 'टेस्ट', जीते तो 'शाबाशी' मगर हार से 'खतरा'
बिहार में समस्तीपुर और किशनगंज सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी है मैदान में. (फाइल फोटो)

बिहार में समस्तीपुर लोकसभा (Samastipur) और किशनगंज (Kishanganj) विधानसभा सीट के उपचुनाव (by-election) में कांग्रेस पार्टी प्रतिष्ठा की जंग लड़ रही है. कांग्रेस (Congress) पार्टी के केंद्रीय नेताओं के चुनाव प्रचार में न आने को लेकर सियासी गलियारों में उठने लगे हैं.

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पटना. बिहार में लोकसभा की एक और विधानसभा की 5 सीटों पर होने वाले उपचुनावों के लिए सोमवार को वोट डाले जाएंगे. इन चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल भाजपा हो या जदयू या लोजपा, सभी पार्टियों ने पूरी ताकत झोंकी है . इसके उलट महागठबंधन (Mahagathbandhan) में शामिल प्रमुख दल कांग्रेस (Congress) के प्रमुख नेताओं की चुनाव प्रचार से दूरी ने कई सवाल उठा दिए हैं. कांग्रेस नेतृत्व ने बिहार में उपचुनावों के प्रचार का पूरा दारोमदार पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रभारी और अन्य नेताओं पर ही डाल दिया था. ऐसे में कांग्रेस प्रदेश इकाई के लिए ये उपचुनाव 'टेस्ट' की तरह हैं- जीते तो शाबाशी मिलेगी, लेकिन हार की सूरत में कई नेताओं की कुर्सी पर खतरा आ जाएगा. आपको बता दें कि बिहार में समस्तीपुर (Samastipur) लोकसभा सीट और किशनगंज (Kishanganj) विधानसभा सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

शक्ति सिंह गोहिल को छोड़ कोई नहीं आया
बिहार में समस्तीपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव के साथ-साथ 5 विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव हो रहे हैं. समस्तीपुर में महागठबंधन की ओर से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अशोक कुमार ही चुनाव लड़ रहे हैं. इस उपचुनाव के प्रचार के दौरान एनडीए की तरफ से जहां प्रदेश से लेकर देशस्तर तक के कई नेता पहुंचे, वहीं कांग्रेस की तरफ से बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल अकेले नेता ही आए. पूरे चुनाव प्रचार के दौरान कोई केंद्रीय नेता नहीं पहुंचा. ऐसे में सियासी गलियारों में यह सवाल अपने आप ही उठने लगा कि क्या केंद्रीय नेतृत्व, पार्टी की प्रदेश इकाई की ताकत को भांपना चाहता है?

किशनगंज विधानसभा भी दांव पर

समस्तीपुर लोकसभा सीट के अलावा किशनगंज विधानसभा सीट का उपचुनाव भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है. चूंकि यह सीट पहले कांग्रेस के पास ही थी, इसलिए यहां का चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल भी है. बावजूद इसके केंद्रीय नेतृत्व उपचुनाव के प्रति उदासीन बना रहा. विधानसभा उपचुनाव के प्रति भी केंद्रीय नेतृत्व की इस 'उदासीनता' के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं. यानी इस सीट की चुनावी लड़ाई भी प्रदेश इकाई के लिए महत्वपूर्ण है. अगर ये सीट कांग्रेस के हाथ से निकल जाती है, तो इस हार का ठीकरा प्रदेश नेतृत्व के सिर ही फूटेगा. ऐसे में बिहार में हो रहे इन दो सीटों के चुनाव ने पार्टी के प्रदेशस्तर के नेताओं की पेशानी पर बल ला दिए हैं.

पार्टी के नेता ने किया बचाव
इस मामले पर प्रदेश कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा से जब सवाल किया गया, तो वे बचाव की मुद्रा में दिखे. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के लिए जिन नेताओं की मांग उम्मीदवार के तरफ से की गई थी, उन नेताओं ने वहां जाकर प्रचार किया है. आपको बता दें कि उपचुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस ने स्टार प्रचारकों की लंबी-चौड़ी लिस्ट जारी की थी. इसमें प्रदेश के अलावा कई केंद्रीय नेताओं के भी नाम थे. लेकिन इसमें से कोई भी नेता चुनाव प्रचार के लिए बिहार नहीं आया. अब पूरी जिम्मेदारी प्रदेश नेतृत्व की है.
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(साकेत कुमार की रिपोर्ट)

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First published: October 20, 2019, 7:04 PM IST
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