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BHU विवाद: डॉ फिरोज खान के समर्थन में आए सुशील मोदी, कही ये बड़ी बात

News18 Bihar
Updated: November 23, 2019, 7:57 AM IST
BHU विवाद: डॉ फिरोज खान के समर्थन में आए सुशील मोदी, कही ये बड़ी बात
बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मुस्लिम प्रोफेसर का विरोध करना सरासर मूर्खता है.

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) ने भी फिरोज खान का समर्थन किया है, लेकिन वे अब तक कोई क्लास नहीं ले सके हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में सिर्फ हिन्दू ही संस्कृत पढ़ा सकते हैं.

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पटना. कोई मुस्लिम संस्कृत कैसे पढ़ा सकता है? इस सवाल को लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)  संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान (Dr firoz khan) की नियुक्ति को लेकर सियासत अब भी जारी है. हालांकि इस विवाद के बीच बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी (Sushil kumar modi) ने इस विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है.

उऩ्होंने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट के जरिए अपना विरोध जताते हुए कहा कि इस नियुक्ति को धर्म के नजरिये से देखा जाना ठीक नहीं है. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, डॉ फिरोज खान का विरोध करना सरासर मूर्खता है. वह केवल एक मुस्लिम हैं. यदि कोई मुस्लिम या ईसाई हमारे वेद, उपनिषद का अध्ययन करता है और संस्कृत में रुचि दिखाता है तो हम उसका स्वागत करते हैं या विरोध करते हैं? यूनिवर्सिटी को इस तरह के आंदोलन के आगे नहीं झुकना चाहिए. काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का धर्म के आधार पर विरोध करना  दुर्भाग्यपूर्ण है.

सुशील मोदी ने आगे लिखा, यदि इस्लाम के मानने वाले लोग वेद-पुराण का अध्ययन-अध्यापन कर रहे हैं, तो यह हमारे लिए गर्व का विषय होना चाहिए.

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बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय स्वयं संघ ने भी इस विरोध को गलत ठहराया है. काशी में आरएसएस के विभाग संघ चालक डॉ. जय प्रकाश लाल ने लेटर जारी कर कहा है, 'संघ का मत है कि डॉ. फिरोज खान का विरोध गलत है. संघ इससे सहमत नहीं है और संघ का स्पष्ट और द्दढ़ मत है कि संस्कृत साहित्य को समर्पित व श्रद्धा भाव से उसे पढ़ाने वाले, वैधानिक चयन प्रक्रिया से नियुक्त किसी भी व्यक्ति का सांप्रदायिक आधार पर विरोध विधि विरुद्ध व सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है. संघ इस वृत्ति, प्रवृत्ति का विरोध करता है. यह संस्कृत भाषा व साहित्य का प्रसार व प्रभाव है, जिसका लाभ संपूर्ण विश्व के सभी को मिलना चाहिए.'

गौरतलब है कि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी ने भी फिरोज खान का समर्थन किया है, लेकिन वे अब तक कोई क्लास नहीं ले सके हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में सिर्फ हिन्दू ही संस्कृत पढ़ा सकते हैं. हालांकि धरना दे रहे छात्रों ने अब धरना खत्म कर दिया है.

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First published: November 23, 2019, 7:56 AM IST
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