Bihar Budget 2021-22: आज पहली बार बजट पेश करेंगे तारकिशोर प्रसाद, रोजगार पर रहेगा फोकस

बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद (फाइल फोटो)

बिहार के डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद (फाइल फोटो)

Bihar Budget 2021-22: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने सबसे ज्यादा 13 बार बजट पेश किया है. डिप्टी सीएम बनने के बाद तारकिशोर प्रसाद का यह पहला बजट है.

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पटना. बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tar Kishore Prasad) बतौर वित्त मंत्री पहली बार सोमवार को विधानसभा में प्रदेश का बजट पेश करेंगे. उनका दावा है कि इस बजट में आम से लेकर खास तक का ध्यान रखा गया है. न्यूज़ 18 से एक्सलूसिव बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि बात चाहे उद्योग की करें या फिर स्वास्थ्य और शिक्षा की, सभी विभागों के लिये इस बजट (Bihar Budget) में पर्याप्त प्रावधान किया गया है. युवाओं को रोजगार मिले इसका भी विशेष ध्यान रखा गया है. हालांकि, उन्‍होंने बजट की राशि पर पूछे गए सवाल को टाल दिया.

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए दिए गए हलफनामे के मुतााबिक, तारकिशोर प्रसाद करोड़पति हैं. चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार उनका प्रोफेशन व्यापार और कृषि है. तारकिशोर प्रसाद की कुल घोषित संपत्ति 1.9 करोड़ रुपये है जिसमें 49.4 लाख रुपये चल संपत्ति है और 1.4 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है. तारकिशोर प्रसाद कुल घोषित आय 3.7 लाख है.

यह है तारकिशोर की टीम

तारकिशोर प्रसाद की टीम में सबसे पहला नाम आता है IAS एस सिद्धार्थ का. एस सिद्धार्थ वित्त विभाग के प्रधान सचिव हैं. इस टीम में दूसरा नाम आता है लोकेश कुमार सिंह का. लोकेश वित्त विभाग में सचिव के पद पर पदस्थापित हैं. इसके बाद आते हैं दिवेश सेहरा. ये वित्त सचिव हैं. इनके बाद नाम आता है गोरखनाथ का ये विशेष सचिव हैं. उदय मिश्रा एडिशनल सचिव के पद पर पदस्थापित हैं. इन लोगों के अलावा सभी विभागों के प्रधान सचिव इस टीम के सदस्य हैं. सभी से राय कर उनके विभागों के डिमांड ( स्वरूप ) के आधार पर ही बजट तैयार किया गया है.
कौन हैं तारकिशोर?

तारकिशोर प्रसाद मूल रूप से कटिहार के रहने वाले हैं. इनका जन्म 5 जनवरी 1956 में एक साधारण परिवार में हुआ था. इसके बाद इन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी करते हुए 1970 में दसवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की और फिर 1974 में इंटर की इंटर करने के दौरान ही ये 1974 में ही छात्र आंदोलन से अपनी राजनीतिक ककहरा सिखा. इस दौरान वो भूमिगत होकर भी आंदोलन को धार देते रहे और फिर 1980 में सक्रिय राजनीति में आ गए. 1976 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के रास्ते उन्होंने राजनीति शुरू की. 1981 से 83 तक वो कटिहार भाजपा नगर महामंत्री पद पर आसीन रहे और लगातार अपनी कर्म दक्षता के कारण 1997 में प्रदेश कार्यकारिणी समिति के सदस्य भी चुने गए. साल 2005 में उन्‍होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और उस वक़्त से लेकर अब तक वह लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं.

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