बिहार: क्या तेजस्वी यादव सिर्फ अपनी ही जाति की राजनीति करते हैं? पढ़ें जानकारों की राय
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बिहार: क्या तेजस्वी यादव सिर्फ अपनी ही जाति की राजनीति करते हैं? पढ़ें जानकारों की राय
तेजस्वी यादव (File Photo)

जेडीयू प्रवक्ता निखिल मंडल आरोप लगाते हैं कि तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की नींद तब क्यों नही खुली जब उन्हीं की पार्टी के एक विधायक अरुण यादव (Arun Yadav) पर एक नाबालिग़ युवती के साथ बलात्कार का आरोप लगा.

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पटना. कोरोना लॉकडाउन (Corona lockdown) के बीच गोपालगंज (Gopalganj) में हुई हत्या को लेकर बिहार की सियासत गर्म हो गई है.  तेजस्वी यादव ने जेडीयू विधायक अमरेन्द्र पांडे पर हत्या का आरोप लगाते हुए सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) पर ही मोर्चा खोल दिया है और गोपालगंज विधायकों के साथ मार्च करने की चेतावनी देकर सत्ताधारी दल पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है. लेकिन तेजस्वी यादव के इसी क़दम पर सत्ताधारी दल से लेकर तेजस्वी के विरोधी पप्पू यादव (Pappu Yadav) ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) जाति की राजनीति करते हैं और एक ख़ास जाति के लोगों के साथ हुी किसी घटना पर हरकत में आते हैं.

जेडीयू का तेजस्वी पर हमला
जेडीयू प्रवक्ता निखिल मंडल तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए आरोप लगाते है की तेजस्वी यादव की नींद तब क्यों नही खुली जब उन्हीं की पार्टी के एक विधायक अरुण यादव पर एक नाबालिग़ युवती के साथ बलात्कार का आरोप लगा. तेजस्वी की नींद तब क्यों नही खुली जब गया में घटना घटी  थी. लालू यादव बाढ़ के पूटूस हत्या कांड के समय तब बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल सियासत कर एक खास जाति के वोटरों को लुभाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसी बाहुबली के पत्नी को टिकट दिला चुनाव लड़वा दिया. ये दोहरा चरित्र जनता ठीक से समझ रही है.

पप्पू यादव ने खोला मोर्चा



तेजस्वी यादव के सबसे बड़े विरोधी पप्पू यादव तो खुल कर तेजस्वी पर जाति की राजनीति और जातीय उन्माद फैलाने का आरोप लगाते हैं. पप्पू यादव कहते हैं क गया में जब भूमिहार जाति के लोगों की हत्या हुई तब क्यों नहीं गए तेजस्वी. बेगूसराय में ग़ैर यादव की हत्या हुई तब क्यों नही गए तेजस्वी. पटना सिटी में गैर यादव की हत्या हुई तब क्यों नही नींद खुली. जब उनकी जाति विशेष की बात आई तो चले हैं यादवों के शुभ चिंतक बनने. लेकिन यादव समाज भी सब समझता है.



क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार
दरअसल राजनीतिक जानकार मानते हैं कि तेजस्वी के लिए गोपालगंज में हुई घटना पर सक्रिय होना उनकी मजबूरी भी है. गोपालगंज लालू यादव और राबड़ी देवी का गृह ज़िला है और वहां यादव जाति के शख्स की हत्या हो जाती है. जाहिर है यादवों में मैसेज देने के लिए वो भी लालू की ग़ैर मौजूदगी में तेजस्वी का सक्रिय होना ये संकेत देता है कि वो यादव जाति को ये मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि लालू यादव के जेल में होने के बावजूद वो उनकी कमी नही खलने देंगे.

जाति विशेष के वोट बैंक की चिंता
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं,  राजद का परम्परागत वोट बैंक रहा है यादव और मुस्लिम. लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव यादव वोट बैंक में भी एनडीए ने सेंघ लगा दिया है. तेजस्वी यादव भले ही अपने अगल बगल में जगदानंद सिंह, रघुवंश सिंह,  शिवानंद तिवारी और मनोज झा जैसे सवर्ण नेताओं को बैठा मैसेज देने की कोशिश करते हैं कि वो सारे जातियों को लेकर चल रहे हैं. लेकिन तेजस्वी की नजर अपने बेस वोट बैंक पर टिकी हुई है और वे इसे विधान सभा में छिटकने नहीं देना चाहते हैं.   गोपालगंज में सक्रिय होना इसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है.

राजद का सर्वसमाज के साथ चलने का दावा
राजद के पूर्व सांसद और लालू यादव के वफ़ादार माने जाने वाले जय प्रकाश यादव कहते हैं कि राजद शुरू से ही कमज़ोर तबके के हित में सवाल उठाते रहा है. हमारी पार्टी पर जाति विशेष का आरोप लगाना ग़लत है. हम सबको लेकर चलने वाले पार्टी के लोग हैं.

दरअसल तेजस्वी के सक्रिय होने से एनडीए भी तेजस्वी पर जाति का आरोप लगा उसी घेरे में कसने की कोशिश तेज़ कर सकती है जिस घेरे में राजद को एक ख़ास जाति की पार्टी का आरोप लगा गैर यादव बाक़ी जातियों को गोलबंद किया था जिसका फायदा विधान सभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक उठाया था और अब इसी खेल को खेल कर विधान सभा चुनाव में भी फ़ायदा उठाने की कोशिश तेज हो सकती है.

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First published: May 29, 2020, 7:51 AM IST
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