बिहार चुनाव 2020: मांझी की NDA में इंट्री से पार्टी में फूट, सुशील मोदी बोले- महागठबंधन में भगदड़
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बिहार चुनाव 2020: मांझी की NDA में इंट्री से पार्टी में फूट, सुशील मोदी बोले- महागठबंधन में भगदड़
जीतन राम मांझी की पार्टी के नेता उपेंद्र प्रसाद ने मांझी को अवसरवादी करार दिया.

Bihar Election 2020: विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व सीएम जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने आज NDA का दामन थामा तो उनकी अपनी ही पार्टी में फूट पड़ गई. हम नेता उपेंद्र प्रसाद ने मांझी को बताया अवसरवादी. बीजेपी के सुशील मोदी (Sushil Modi) ने महागठबंधन पर साधा निशाना.

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पटना. बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2020) की घोषणा से पहले गर्माई सियासत में रोज-रोज नए अध्याय जुड़ रहे हैं. इसी क्रम में जब आज पूर्व सीएम और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) नेता जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने जब NDA में जाने की घोषणा की, तो विभिन्न दलों के नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली. वहीं खुद मांझी के सहयोगी रहे उनकी ही पार्टी के सदस्य नाखुश दिखे. हम के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र प्रसाद ने तो सार्वजनिक रूप से मांझी को अवसरवादी भी करार दे दिया. इस बीच प्रदेश के डिप्टी सीएम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी (Sushil Modi) ने महागठबंधन पर फिर निशाना साधा. मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि चुनाव की घोषणा से पहले ही महागठबंधन में भगदड़ मच गई है.

चुनाव से पहले एनडीए में जाने का ऐलान करते हुए जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार की तारीफ की. साथ ही कहा कि वे गठबंधन में बिना शर्त शामिल हुए हैं. सीटों को लेकर जेडीयू के साथ बातचीत के बाद सहमति बनाई जाएगी. इधर, HAM प्रमुख के एनडीए में जाने के ऐलान से उनकी पार्टी कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र प्रसाद नाराज हैं. उपेन्द्र प्रसाद ने जीतन राम मांझी पर अवसरवादिता की राजनीति करने का आरोप लगाया. साथ ही यह दावा भी किया है कि पार्टी के कई बड़े नेता और आधे कार्यकर्ता उनके साथ हैं. उपेन्द्र प्रसाद ने कहा कि वे जल्द ही पार्टी की बैठक बुलाकर अगली रणनीति की घोषणा करेंगे.


इधर, बीजेपी नेता सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में महागठबंधन पर हमला करते हुए जीतन राम मांझी का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अभी तक बिहार विधानसभा का चुनाव कराने के बारे में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं किया है, लेकिन चुनाव टालने की दलील देने वाली पार्टी और महागठबंधन में भगदड़ मची है. लालू प्रसाद की चुनावी ब्रांड वैल्यू जीरो हो चुकी है, इसलिए पांच एमएलसी और सात विधायक राजद छोड़ चुके हैं. जीतन राम मांझी का महागठबंधन छोड़ना साबित करता है कि जेल से चलने वाली पार्टी दलितों-पिछड़ों का भला नहीं कर सकती.
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