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बिहार चुनाव 2020: भाड़े की LED और स्मार्ट TV से वर्चुअल रैली करेंगे सियासी दल, सेटअप लगाएंगी प्राइवेट एजेंसी

इंटरनेट कनेक्शन और टेली-डेंसिटी के मामलों में देश में सबसे निचले पायदान पर है बिहार.

इंटरनेट कनेक्शन और टेली-डेंसिटी के मामलों में देश में सबसे निचले पायदान पर है बिहार.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) को लेकर निर्वाचन आयोग के निर्देशों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए किराये पर एलईडी और स्मार्ट टीवी (LED and Smart TV) के जरिए वर्चुअल रैली का तरीका ढूंढा.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) की तैयारियों को लेकर राजनीतिक पार्टियों में जोर-आजमाइश का दौर शुरू हो गया है. सभी राजनीतिक पार्टियां डिजिटली मजबूत कैसे बनें, इस पर फोकस कर रही है. सोशल मीडिया (Social Media) से लेकर वर्चुअल रैलियों (virtual rally) के लिए प्लानिंग तैयार की जा रही हैं. निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के निर्देश के बाद इस बार का बिहार चुनाव पहले के चुनावों से काफी अलग हटकर होने वाला है. बिहार में अगले कुछ दिनों में वर्चुअल रैलियों की भरमार होने वाली है. इसलिए बिहार में एलईडी और स्मार्ट टीवी (LED and Smart TV) की डिमांड बढ़ गई है. सभी राजनीतिक पार्टियां वर्चुअल रैलियों का सेट-अप तैयार करने वाली एजेंसियों को कॉन्ट्रैक्ट दे रही हैं. कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने वाली एजेंसियों ने बिहार में एक अलग ही तरीका ढूंढ निकाला है. एजेंसियों ने गांव से ही एलईडी टीवी किराये (Rent) पर लेकर लगाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे कुछ राजनीतिक पार्टियों ने स्वीकार कर लिया है.

गांवों के घरों से किराये पर लेंगे LED और Smart TV
कोरोनाकाल में वर्चुअल रैलियां दो-तीन तरह से की जा रही हैं. इसमें जूम, फेसबुक और यूट्यूब की भूमिका सबसे अहम है. फिलहाल बिहार में राजनीतिक पार्टियां वर्चुअल रैली के दौरान जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं से बात कर रहे हैं. दूसरी तरफ पार्टी के बड़े नेताओं के संदेश आम लोगों तक लगातार पहुंचते रहें, इसके लिए पार्टियों ने हर बूथ के मतदाताओं के हिसाब से एलईडी टीवी लगाने का ऑर्डर दिया है. बिहार की एक विधानसभा सीट पर औसतन 300 बूथ हैं. कुछ विधानसभा सीटों पर बूथों की संख्या 320 तो पटना जैसी जगहों पर यह संख्या 440 तक पहुंच जाती है.

चुनाव नजदीक होने और बाढ़ और बारिश की वजह से ऑडियो-वीडियो सेवा देने वाली कुछ कंपनियों ने अब गांवों के मुखिया, सरपंच और वार्ड कमिश्नर के जरिए संपर्क साधना शुरू कर दिया है. गांव के जिन घरों में बड़े स्क्रीन वाले एलईडी और स्मार्ट टीवी हैं, वहां से रेंट पर देने की बात कही जा रही है.

सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनियों का क्या कहना है
राजनीतिक दलों से कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली एजेंसियों की मानें तो इससे कई फायदे होंगे. ऑडियो-वीडियो सिस्टम इंट्रीगेटर और राजनीतिक पार्टियों को डिजिटल सर्विस प्रोवाइड करने वाले मिडिटास इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राकेश चौधरी कहते हैं, 'बिहार जैसे राज्यों में स्थानीय स्तर पर रेंट पर लेने में कई फायदे हैं. एक जगह से दूसरे जगह आने-ले जाने के झंझट से छुटकारा मिलेगा. ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा भी बचेगा. राजनीतिक पार्टियों ने स्थानीय स्तर से ही एलईडी प्रोवाइड करने की इच्छा जताई थी. इन पार्टियों का बजट काफी कम है, लेकिन इनको सर्विस अच्छी चाहिए. एडवांस में ये लोग पैसा नहीं दे रहे हैं. कई नेताओं ने अपने विधानसभा क्षेत्र में भी यह सुविधा देने के लिए कहा है. बाढ़-बारिश और सड़कों की स्थिति को लेकर हमलोगों ने स्थानीय स्तर पर ही एलईडी रेंट पर लेने का प्लान शुरू कर दिया है. हमलोग गांव-गांव जा कर स्थानीय लोगों के घरों से 24 इंच से लेकर 50-55 इंच तक का LED TV या स्मार्ट टीवी किराये पर ले रहे हैं.'

क्या कहते हैं नेता
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'इसमें कोई दो राय नहीं है कि चुनाव आयोग के निर्देश के बाद हमलोगों के लिए यह एक बड़ी समस्या बन गई है. वर्चुअल रैली के जरिए कार्यकर्ताओं से मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने तो बड़ी-बड़ी एजेंसियों को हायर कर लिया है, लेकिन हम जैसी छोटी पार्टियों के पास कम बजट है. आरएलएसपी राज्य के 30 से 40 विधानसभा सीटों के लगभग 1200 बूथों पर एलईडी टीवी लगाने पर विचार कर रही है. बजट कम है इसलिए एजेंसियों ने गांव से ही एलईडी टीवी रेंट पर लेने का फॉर्मूला सुझाया था. सर्विस प्रोवाइड करने वाली एजेंसियों का कहना था कि वैसे एक एलईडी टीवी एक दिन के लिए रेंट पर देने का चार्ज 2000 से 4000 रुपए है, लेकिन अगर गांव के घरों से ही लिया जाएगा तो तकरीबन 500 से 1000 रुपए तक हमलोग चार्ज करेंगे. शर्त है कि आपके कार्यकर्ता इसमें हमारे लोगों को मदद करें, जिसको हमलोगों ने मान लिया है.'

चुनाव विश्लेषक का नजरिया
वहीं ग्राउंड जीरो के निदेशक शशि शंकर सिंह कहते हैं, 'देखिए दो-तीन तरीके से वर्चुअल रैलियां होती हैं. पहला कोई पार्टी अपने चैनल के थ्रू रैली करती है. बीजेपी और कांग्रेस जैसी पार्टियों का अपना यूट्यूब चैनल है. अगर इन पार्टियों के नेता कहीं जाते हैं तो वहां की प्रोफेशनल टीम पूरा सेटअप तैयार करती है और यूट्यूब या जूम और फेसबुक के जरिए उनका संबोधन लाइव किया जाता है. दूसरा पार्टी की आंतरिक मीटिंग, जो इन दिनों जूम के जरिए ही हो रही हैं. नेता जब अपने बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं से मिलेंगे तो उसको दूसरे तरीके लाइव किया जाता है. हाल ही में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अमित शाह की वर्चुअल रैली की थी. यूट्यूब के जरिए बंगाल के 80 प्रतिशत बूथों पर एलईडी टीवी लगाया गया. 2000 से 4000 रुपए तक देकर किराये पर टीवी लिए गए थे. हर बूथ पर टीवी लगा कर उसको लैपटॉप या मोबाइल से जोड़ दिया गया था. हालांकि, बीजेपी जैसी पार्टियों ने खुद भी काफी टीवी खरीद ली है, लेकिन दूसरी पार्टियां अभी भी रेंट के जरिए ही वर्चुअल रैली कर रही हैं.'



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कुल मिलाकर कोरोना महामारी (Corona Epidemic) के बावजूद बिहार देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जहां महामारी के बीच में चुनाव करवाए जाएंगे. चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों से ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल रैलियों के जरिए जनता से जुड़ने को कहा है. सोशल डिस्टेंसिंग की खासतौर पर हिदायत दी गई है.

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