बिहार चुनाव परिणाम 2020: आखिर कैसे बासी पन्नों को पलट बिहार के नेता बन उभरे तेजस्वी यादव?

बिहार के नये नायक के तौर पर उभरे तेजस्वी यादव.
बिहार के नये नायक के तौर पर उभरे तेजस्वी यादव.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने बिहारी समाज की बात की और सीएम नीतीश (CM Nitish) की छवि से अलग करते हुए बिहार की राजनीति में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में जुटे रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 3:33 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों की फाइनल तस्वीर तो अभी सामने आनी बाकी है, लेकिन रुझानों में एक बात साफ दिख रहा है कि लालू प्रसाद यादव ( Lalu Prasad Yadav) के बेटे तेजस्वी यादव (Tejaswi yadav) एक नायक के तौर पर उभरे हैं. सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के बड़े कद को चुनौती देकर वह बिहार के बड़े नेता बन गए हैं. लोकसभा चुनाव के बाद जिस तरह से उन्हें डेड मान लिया गया था उस झटके से आगे निकले और सूबे की सियासी आसमान पर छा गए. वह भी तब जब चुनावी साल शुरू होते ही  सीएम नीतीश कुमार ने सियासत की पिच बनानी शुरू कर दी थी और विरोधियों को खेल के लिए आमंत्रित करने में लग गए थे, लेकिन तेजस्वी ने इस सियासी पिच पर अपने बाउंसर डाले और सीएम नीतीश सहित पूरे एनडीए कुनबे को उन्हीं के अनुसार गेम को आगे बढ़ाना पड़ा.

तेजस्वी ने सेट की सियासी पिच

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि जनवरी में सीएम नीतीश की जल जीवन हरियाली मिशन यात्रा और मानव श्रृंखला का आयोजन इसी सियासी खेल का आगाज था. इससे पहले बीजेपी-जेडीयू के बीच तनाव के तमाम कयासों के बीत बीजेपी नेता अमित शाह को स्पष्ट करना पड़ा कि बिहार की चुनावी लड़ाई नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ी जाएगी. जाहिर है ये बीजेपी की ये घोषणा नीतीश कुमार का बड़ा सिक्सर था, लेकिन तेजस्वी ने बिहारी जनमानस को समझ बेरोजगारी का मुद्दा उठाया और उसे ही आगे बढ़ाते रहे. इसके बाद तो एनडीए को भी मजबूरी में ही सही  इसी पिच पर आगे बढ़ना पड़ा.




नये नेता के तौर पर उभरे तेजस्वी

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