बिहार चुनाव परिणाम: चिराग ने नीतीश ही नहीं तेजस्वी का भी खेल किया खराब! जानें क्या कहते हैं आंकड़े

तेजस्वी यादव और चिराग पासवान
तेजस्वी यादव और चिराग पासवान

चुनावी आंकड़े बता रहे हैं कि चिराग पासवान (Chirag Paswan) की लोजपा ने राजद (RJD) को 12 सीटों का नुकसान किया और कांग्रेस को 10 सीटों का. भाकपा माले (CPI-ML )को भी 2 सीटों पर हरवा दिया. जाहिर है चिराग की पार्टी ने 24 सीटों पर महागठबंधन (Grand Alliance) का भी खेल खराब कर दिया.

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  • Last Updated: November 12, 2020, 12:15 PM IST
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पटना. कहा जा रहा है कि लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) ने सुसाइड स्क्वॉयड के तौर पर काम किया और एनडीए को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. पर क्या यही हकीकत है कि चिराग पासवान (Chirag Paswan) के कारण सिर्फ एनडीए (NDA) को नुकसान पहुंचा है. दरअसल भाजपा और जदयू (BJP-JDU) नेताओं द्वारा जितना नुकसान पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, आंकड़े इस बात की पूरी तरह से तस्दीक नहीं कर रहे हैं. चिराग पासवान की अध्यक्षता वाली लोजपा ने एनडीए के साथ ही महागठबंधन (Mahagathbandhan) का भी काफी नुकसान पहुंचाया है. उन 54 सीटों पर जहां लोजपा ने वोट खेल बिगाड़ने का काम किया उनमें 25 जदयू (JDU) की थीं. इन सीटों पर लोजपा को जितने वोट मिले, वे जदयू की हार के मार्जिन से ज्यादा थे.

आंकड़े बता रहे हैं कि लोजपा ने सिर्फ जदयू ही नहीं एनडीए के ही मुकेश सहनी की पार्टी विकाशशील इंसान पार्टी (VIP) को भी चार सीटों पर काफी नुकसान किया. चिराग का शुरू से ही यह स्टैंड था कि वह  भाजपा के खिलाफ ज्यादा सीटों पर नहीं लड़ेंगे इसलिए उन्होंने भाजपा की केवल एक ही सीट पर गेम खराब किया है. वहीं अब यह भी साफ हो गया है कि चिराग ने महागठबंधन का भी नुकसान किया.

चुनावी आंकड़े बता रहे हैं कि चिराग पासवान की लोजपा ने राजद को 12 सीटों का नुकसान किया और कांग्रेस को 10 सीटों का. भाकपा माले को भी 2 सीटें पर हरवा दिया. जाहिर है चिराग की पार्टी ने 24 सीटों पर महागठबंधन का भी खेल खराब कर दिया.  हालांकि  चिराग की लोजपा के कारण ज्यादातर महागठबंधन के उम्मीदवार ही जीते.



लोजपा के वोट काटने से राजद को 24 सीटों पर जीत मिली और कांग्रेस को 6 सीटों पर. हालांकि लोजपा की वजह से सीएम नीतीश कुमार को भी 20 सीटों पर जीत मिली. लोजपा के वोट काटने से जीतनराम मांझी की पार्टी हम को भी 2 सीटें और भाजपा और विकासशील इंसान पार्टी को 1 सीट पर जीत मिली.  जाहिर है कि लोजपा ने एनडीए को 6 सीटों का नेट नुकसान किया (24 जीत 30 हार) और महागठबंधन को 6 नेट सीटों का फायदा पहुंचाया (30 जीत 24 हार).
डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि इस चुनाव में 54 ऐसी सीटें थीं जहां चिराग पासवान की लोजपा तीसरे स्थान पर थी, लेकिन इनको मिले वोट, जीत के मार्जिन से ज्यादा थे. तो यदि लोजपा के सारे वोट दूसरे स्थान वाली पार्टी को मिल जाते, तो जरूर पासा पलटता और परिणाम कुछ और होते.

चिराग पासवान को बड़ा वोटकटवा कहा जा रहा है, लेकिन इस बार 120 सीटें ऐसी थीं जहां वोट कटरों ने अपना खेल खेला. इन वोट कटरों में से 54 सीटों पर जहां चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने गेम बिगाड़ा, वहीं उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) ने भी कइयों का खेल खराब किया. RLSP खुद तो एक भी सीट न जीत पाई, लेकिन बसपा और ओवैसी की AIMIM के साथ एक नया फ्रंट बनाकर इसने एनडीए की 10 सीटों का नुकसान किया, जिसमें से 7 तो भाजपा की ही थी.

हकीकत यह भी है कि RLSP ने राजद को 7 सीटों पर फायदा पहुंचाया, कांग्रेस और सीपीआई को एक-एक सीट पर जीत दिलवाई. इसके अलावा ऐसी 20 सीटें थीं जहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने वोट कटर का काम किया. 20 निर्दलीय उम्मीदवारों ने एनडीए को 15 सीटों पर फायदा हुआ. इसका मतलब यह कि महागठबंधन के बागियों ने एनडीए के बागियों के मुकाबले 3 गुना ज्यादा नुकसान कर गए.
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